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	<title>मेरी-नज़्म &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/मेरी-नज़्म/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "मेरी-नज़्म"</description>
	<pubDate>Fri, 29 Aug 2008 19:30:36 +0000</pubDate>

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	<language>en</language>

<item>
<title><![CDATA[उसका सूरज जलते-जलते राख़ हो गया]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1076</link>
<pubDate>Wed, 20 Aug 2008 12:17:18 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1076</guid>
<description><![CDATA[उसका सूरज जलते-जलते राख़ हो गया
मेरा च]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">उसका सूरज जलते-जलते राख़ हो गया<br />
मेरा चाँद पिघलते-पिघलते पिघल गया<br />
ना उस दिन उसके दिल से उफ़ आयी<br />
ना आज तक मेरे दिल से आह निकली</span></p>
<p><span style="color:#000000;">मेरे पास उसकी दी हुई हर एक चीज़ है<br />
जो न उसने मुझसे बेतरह माँगी कभी<br />
न उसने कुछ कहा ही ख़त के ज़रिए<br />
और न मैंने ही यह नब्ज़ बाँधी कभी</span></p>
<p><span style="color:#000000;">वह लबों को सीं कर<br />
बैठा रहता है मेरे पास ही<br />
उससे मेरी इक शर्त है<br />
जो न मैंने तोड़ी<br />
और न उसने तोड़ी कभी<br />
वह नयी शाख़ पर पहला फूल था<br />
ज़िन्दगी का एक उम्दा उसूल था<br />
क़ुबूल किया था मैंने उसको<br />
अपना हाथ देकर<br />
पर मैं न उसको कभी क़ुबूल था</span></p>
<p><span style="color:#000000;">ज़िन्दगी के रंग आँखों की नमी ने सोख लिए<br />
मैं फिरता रहा हमेशा ही उसकी याद लिए<br />
मालूम नहीं वह ख़ाब था या कोई रंग था<br />
मेरे जिस्म का मोम जलता रहा फ़रियाद लिए</span></p>
<p><span style="color:#000000;">वह आया था मेरी ज़िन्दगी में<br />
सूरज की पहली किरन जैसे<br />
वह फिरता था दिल के बाग़ीचे में<br />
इक चंचल हिरन जैसे<br />
उसके लबों से उड़ती थी<br />
तितलियाँ हँसी बनकर<br />
अब वह बैठा रहता है<br />
अपने माथे पर शिकन लिए<br />
इक बार फिर वहीं आ गये<br />
जहाँ से चले थे पहले कभी-</span></p>
<p><span style="color:#000000;">उसका सूरज जलते-जलते राख़ हो गया<br />
मेरा चाँद पिघलते-पिघलते पिघल गया<br />
ना उस दिन उसके दिल से उफ़ आयी<br />
ना आज तक मेरे दिल से आह निकली </span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[जो मुझको जानते हैं]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1018</link>
<pubDate>Mon, 14 Jul 2008 16:59:08 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1018</guid>
<description><![CDATA[जो मुझको जानते हैं ज़रा कम जानते हैं
जो ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">जो मुझको जानते हैं ज़रा कम जानते हैं<br />
जो नहीं जानते हैं ज़रा ज़्यादा जानते हैं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">जो ढीठ बनके बैठा हुआ है मेरी जानिब<br />
वो नहीं जानता है कि बहुत ढीठ है 'विनय'</span></p>
<p><span style="color:#000000;">यह एक दिन न ढलेगा, ढलेंगे लाखों सूरज<br />
देखता हूँ कब तक बैठोगे फेरके अपनी सूरत</span></p>
<p><span style="color:#000000;">बस शिकन में छुपा लोगे तुम अपनी चाहत<br />
मगर कैसे छुपाओगे इक तड़प की हालत</span></p>
<p><span style="color:#000000;">ख़ुद से थोड़ा मुतमइन हूँ और तुझसे भी<br />
जाने क्या बात है तुम कुछ कहते नहीं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">देखता हूँ शर्त तू जीतेगी या मैं जीतूँगा<br />
न हारना तेरी फ़ितरत में होगा न मैं हारूँगा</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[क्यों बेशर्म क़तरा-क़तरा ज़हन नहीं ढलता]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=983</link>
<pubDate>Fri, 13 Jun 2008 16:53:10 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=983</guid>
<description><![CDATA[क्यों? बेशर्म क़तरा-क़तरा ज़हन नहीं ढलता
]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">क्यों? बेशर्म क़तरा-क़तरा ज़हन नहीं ढलता<br />
क्यों? मुझे बेक़रारियों से क़रार नहीं मिलता<br />
क्यों? ढल रहा हूँ दिल में ख़ुद के ही, आज!<br />
क्यों नहीं हूँ कोशिशे-इश्क़ में, ख़ुद के ही आज?<br />
मग़रूर तो हूँ मैं, मजबूर भी हूँ, ऐसा क्यों?<br />
आज तक बेकसूर भी हूँ मैं, न जाने ऐसा क्यों?</span></p>
<p><span style="color:#000000;">पनाह दे दे, पाँव में किसी के जगह दे दे, मुझे<br />
भटकता हुआ ख़ुद ही बीन रहा हूँ अपने टुकड़े!</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[एक लड़की ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=980</link>
<pubDate>Wed, 11 Jun 2008 15:50:34 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=980</guid>
<description><![CDATA[एक लड़की मुझको सारा दिन परेशाँ किये घू]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">एक लड़की मुझको सारा दिन परेशाँ किये घूमती है<br />
ख़ाबों में भी आयी ख़्यालों को हैराँ किये रहती है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">उसकी बातों में जाने कैसी ख़ुशबू है नाज़ुक मिज़ाज की<br />
अदाए-हरकत है कभी गुल तो कभी मिराज़ की</span></p>
<p><span style="color:#000000;">यूँ तो इस जा में मेरी शख़्सियत है खाकसार-सी<br />
लफ़्ज़ यूँ बुनती है' जैसे हूँ तबीयत ख़ाबे-ख़ुमार की</span></p>
<p><span style="color:#000000;">चाहती क्या है, बात क्या है, मैं पता करूँ तो कैसे?<br />
दर्दो-ग़म की बात छोड़, दिल का भेद तो कह दे!</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[हर गली में ढूँढ़ा तेरा निशाँ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=957</link>
<pubDate>Wed, 02 Apr 2008 20:21:33 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=957</guid>
<description><![CDATA[हर गली में ढूँढ़ा तेरा निशाँ
मैं भटकता]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">हर गली में ढूँढ़ा तेरा निशाँ<br />
मैं भटकता रहा यहाँ-वहाँ</font></p>
<p><font color="#000000">बेताब है हर लम्हा नज़र<br />
उतरे न इश्क़ का ज़हर</font></p>
<p><font color="#000000">प्यास है तेरे दीदार की<br />
चाहत है तेरे एतबार की</font></p>
<p><font color="#000000">रुख़ पे ज़ुल्फ़ परेशान है<br />
अधूरी तेरी-मेरी दास्तान है</font></p>
<p><font color="#000000">तस्वीरें तेरी चुनता रहा<br />
रोज़ नये ख़ाब बुनता रहा</font></p>
<p><font color="#000000">तस्वीरों से बात करता हूँ मैं<br />
प्यार तुमसे करता हूँ मैं</font></p>
<p><font color="#000000">संगदिल से इल्तिजा की<br />
ख़ुदा से तेरे लिए दुआ की</font></p>
<p><font color="#000000">किस दर पे न माँगा तुम्हें<br />
अब तक क्यों न पाया तुम्हें</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तस्व्वुरे-हुस्नो-सादगिए-'शीना']]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=947</link>
<pubDate>Sun, 23 Mar 2008 18:08:24 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=947</guid>
<description><![CDATA[सुबह-सा चेहरा, माथे पर सूरज-सी बिन्दिय]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">सुबह-सा चेहरा, माथे पर सूरज-सी बिन्दिया<br />
हँसी, जैसे ख़ुशबू हो कोई, गुनगुनाती हुई<br />
आँखें साँवली-सी, कजरारी-सी<br />
ऐसे झुकती और खुलती थीं<br />
जैसे रात पे सुबह का दरिया बहा दिया हो<br />
वह लट जब चेहरे पर गिरती थीं<br />
यूँ लगता था मानो! बादल की ओट में चाँद हो</font></p>
<p><font color="#000000">उसके पाँव की आहट जैसे बादे-सबा फूलों पर<br />
रूप की सादगी ऐसी जैसे सूफ़ी का तस्व्वुर<br />
रंग बिल्कुल गुले-अंदाम ज़रा-सी बनावट नहीं<br />
लब सुर्ख़ थे ऐसे, जिस तरह गुलाब के पैमाने<br />
ज़ुबाँ नाज़ुक मिज़ाज, वाइज़ो-नासेह की तरह<br />
बदन शीशे जैसा, साफ़-शफ़्फ़ाक़-गुल्फ़ाम<br />
अदा में जुज़ सादगी और कुछ नहीं झलकता था</font></p>
<p><font color="#000000">मालूम नहीं, वह बरस ख़ाब का था कि सच था<br />
उसका वह मेरे घर आना<br />
काँधे से गिरते वह कमर पे दुप्पटे की गाँठ<br />
वह दीपावली के दिए, वह सजावट सब<br />
देखना उसे मेरा एक टुक, सुबहो-शाम, रोज़<br />
वह तूफ़ान जी का, कुछ करके दिखा दें<br />
लिखना तेरा नाम दरो-दर पर, आदतन</font></p>
<p><font color="#000000">आज पाँच बरस हो गये...<br />
I'm still reminiscing about you...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३-२००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ख़लिश को जगह न दो दिल में]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=943</link>
<pubDate>Tue, 18 Mar 2008 17:23:21 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=943</guid>
<description><![CDATA[ख़लिश को जगह न दो दिल में
नासूर बन जाये]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">ख़लिश को जगह न दो दिल में<br />
नासूर बन जायेगी<br />
मरहम भी न लगा पाओगे<br />
साँस घुट के मर जायेगी<br />
ज़ीस्त अलग है, ज़ीस्त जीना अलग<br />
समझे 'नज़र'!<br />
मजलिस में बैठोगे वाइज़ के साथ<br />
बाँह खुल जायेगी...</font></p>
<p>ज़ीस्त= जीवन, Life</p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ख़ुदा ने जब किसी को]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=853</link>
<pubDate>Wed, 27 Feb 2008 16:35:37 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=853</guid>
<description><![CDATA[ख़ुदा ने जब किसी को
न कहा अपना ख़ुदा
फि]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">ख़ुदा ने जब किसी को<br />
न कहा अपना ख़ुदा<br />
फिर तूने क्यों कहा<br />
ग़ैर को अपना ख़ुदा</font></p>
<p><font color="#000000">यह तो हद ही कर दी तूने,<br />
यह तो हद ही कर दी तूने!</font></p>
<p><font color="#000000">ग़ैर कभी कोई<br />
एहसान नहीं उठाते<br />
वह तो बस<br />
ईमान को क़त्ल करते हैं<br />
वह तेरा हो या ख़ुद उनका</font></p>
<p><font color="#000000">हर क़दम पे इक नया दरवाज़ा<br />
हर क़दम पे इक नयी चौखट<br />
चौखट से टकराकर<br />
बार-बार गिरता हूँ</font></p>
<p><font color="#000000">काश!<br />
इस बार चौखट पे दिए हों...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[गिरते सितारे को]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=837</link>
<pubDate>Tue, 26 Feb 2008 03:28:11 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=837</guid>
<description><![CDATA[हमने आसमाँ से टूटके
गिरते सितारे को
ज़म]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">हमने आसमाँ से टूटके<br />
गिरते सितारे को<br />
ज़मीं पे आते देखा है<br />
आसमाँ पे था तो चमकता था<br />
ज़मीं पे है तो दहकता है</font></p>
<p><font color="#000000">फ़र्क़ है बस थोड़ा-सा<br />
'कितना है?' इतना है!<br />
जाओ उठा लाओ उसे...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मौत और मेरे दर्मियान]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=835</link>
<pubDate>Tue, 26 Feb 2008 03:05:05 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=835</guid>
<description><![CDATA[ज़िन्दगी&#8230;
एक हीरे की अंगूठी है
न उंगल]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">ज़िन्दगी...<br />
एक हीरे की अंगूठी है<br />
न उंगली में पहन सकूँ<br />
न ज़ुबाँ से चाट सकूँ</font></p>
<p><font color="#000000">मौत और मेरे दर्मियान<br />
बस यही तो है!</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[रक़ाबी चाँद जला दो]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=816</link>
<pubDate>Tue, 19 Feb 2008 13:01:58 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=816</guid>
<description><![CDATA[रक़ाबी चाँद जला दो
यह रात चाँदनी हो जाय]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">रक़ाबी चाँद जला दो<br />
यह रात चाँदनी हो जाये<br />
कभी तो पास बुला लो<br />
तेरी नज़दीकियों का<br />
मुझे एहसास हो जाये</font></p>
<p><font color="#000000">गुलाबी शाम ढलती है<br />
रोज़ गुज़रती हो<br />
मेरे घर के सामने से<br />
मैं दिल थाम के बैठा रहता हूँ<br />
आइना जब भी हो हाथों में<br />
उससे तेरी बातें करता हूँ...</font></p>
<p><font color="#000000">रक़ाबी चाँद जला दो<br />
यह रात चाँदनी हो जाये<br />
एक रिश्ता बना लो<br />
मुलाक़ात लाज़मी हो जाये</font></p>
<p><font color="#000000">तेरे सिले हुए लबों पर<br />
क्या इक़रार होगा<br />
मेरा ख़्याल है कि इज़हार होगा<br />
बात कोई नही, बात तुम में है<br />
मैं न हूँ शायद तुझमें<br />
पर तू मुझमें है...</font></p>
<p><font color="#000000">रक़ाबी चाँद जला दो<br />
यह रात चाँदनी हो जाये</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[यह ज़िन्दगी मेरी एक पतंग है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=811</link>
<pubDate>Mon, 18 Feb 2008 18:46:20 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=811</guid>
<description><![CDATA[यह ज़िन्दगी मेरी एक पतंग है
मैं जिसको च]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">यह ज़िन्दगी मेरी एक पतंग है<br />
मैं जिसको चाहता हूँ<br />
वह मुझसे बेरंग है<br />
उड़ती है बिल्कुल अकेली<br />
ढ़ूढ़ती है कोई सहेली<br />
यह सच है या कोई पहेली<br />
कभी इधर डोलती है<br />
कभी उधर डोलती है<br />
जाने किसमें क्या टटोलती है<br />
यह मुमकिन को<br />
ना-मुमकिन समझती है<br />
जितना समझती है<br />
उतना ही उलझती है</font></p>
<p><font color="#000000">यह ज़िन्दगी मेरी, एक पतंग है<br />
मैं जिसको चाहता हूँ<br />
वह मुझसे बेरंग है<br />
वह साथ नहीं मेरे<br />
फिर भी लगता है मेरे संग है<br />
यह ज़िन्दगी मेरी एक पतंग है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[जब से भूल जाना चाहा तुमको ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=771</link>
<pubDate>Thu, 14 Feb 2008 06:32:16 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=771</guid>
<description><![CDATA[जब से भूल जाना चाहा तुमको
तेरी याद और भ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">जब से भूल जाना चाहा तुमको<br />
तेरी याद और भी आती है<br />
सपना क्या कभी कोई ऐसा हुआ<br />
जो बिखरा नहीं<br />
बची राख को आँधी<br />
मेरी कब्र तक उड़ा ले जाती है</font></p>
<p><font color="#000000">तुम फिर क्यों मेरी निगाहों में<br />
भर आये आँसू<br />
क्या कोई दर्द हुआ दिल में<br />
या फिर वह तस्वीर मिल गयी<br />
यह तो बताये कोई<br />
मुझे तू क्यों याद आती है?</font></p>
<p><font color="#000000">जब से भूल जाना चाहा तुमको<br />
तेरी याद और भी आती है</font></p>
<p><font color="#000000">चाँद है आसमाँ पर, ज़मीं पर नहीं<br />
बस बात इतनी है जो मुझे तुमसे<br />
दूर नहीं जाने देती है आँसू,<br />
क्या हुआ ऐसा? गुल खिल गये<br />
जो दिए जल गये<br />
क्या यह सब ख़ाब है?<br />
मुझे तू नज़र आती हैं...</font></p>
<p><font color="#000000">जब से भूल जाना चाहा तुमको<br />
तेरी याद और भी आती है</font></p>
<p><font color="#000000">निगाहों में, नज़ारों में, तू बेवफ़ा<br />
सपनों से दूर जा, न याद आ </font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[किस राह को चल रहे थे]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=761</link>
<pubDate>Wed, 13 Feb 2008 06:47:32 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=761</guid>
<description><![CDATA[किस राह को चल रहे थे
किस राह को हम चल दि]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">किस राह को चल रहे थे<br />
किस राह को हम चल दिये,<br />
उनसे प्यार लिए<br />
हम चले इक नये सफ़र पर,<br />
लुटा दिया सारा जो कुछ था<br />
उनकी इक नज़र पर,<br />
कुछ कर गुज़रने की तमन्ना लिए<br />
अकेले हर मंज़िल तक चल रहे,<br />
जाने किसका ख़्याल लिये...</font></p>
<p><font color="#000000">दूरियाँ बहुत हैं लम्बे हैं रास्ते<br />
मगर हम चले किसी के वास्ते<br />
जिस डगर पर भी रुके<br />
वहाँ कुछ अपने बन गये<br />
किस राह को हम चल रहे थे<br />
किस राह को हम चल दिये...</font></p>
<p><font color="#000000">इक बात थी दिल में<br />
सबको प्यार देने की<br />
और हमेशा हम बाँटते रहे,<br />
उड़ते बादलों की तरह<br />
हम चले हर डगर, हर नगर<br />
जाने क्यों छा गये, बेग़ाने शहर पर</font></p>
<p><font color="#000000">क्या चाहें वह हमसे हम समझ गये<br />
कोई मिले इस सफ़र में<br />
तारीख़ों के गुज़रते मंज़र में<br />
यह क्या हुआ हम कहाँ रुक गये<br />
फिर सभी हमसे मिल गये<br />
किस राह को चल रहे थे<br />
किस राह पर हम रुक गये...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[इक तरफ़ वह इक तरफ़ हम]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=759</link>
<pubDate>Tue, 12 Feb 2008 17:29:16 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=759</guid>
<description><![CDATA[इक तरफ़ वह इक तरफ़ हम
बीच में यह फ़ासले
इश्]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">इक तरफ़ वह इक तरफ़ हम<br />
बीच में यह फ़ासले<br />
इश्क़ की डोर से<br />
हमने जो बाँधे बन्धन<br />
क्या ख़बर उन पर गींठ लगी भी</font></p>
<p><font color="#000000">इश्क़ के दायरे में खड़े<br />
मगर वह साथ नहीं<br />
पल-पल बन रहा है कल<br />
क्या ख़बर वह हमसे मिलेंगे भी</font></p>
<p><font color="#000000">इक तरफ़ वह इक तरफ़ हम<br />
बीच में यह फ़ासले<br />
इश्क़ का असर है इधर<br />
दिल हमारा गुमसुम है<br />
क्या ख़बर उन पर असर हुआ भी</font></p>
<p><font color="#000000">इश्क़ में न मिले मौत<br />
और हम ज़िन्दा भी नहीं<br />
आती-जाती है वह रोज़<br />
क्या ख़बर वह फ़िरोज़ मिलेगी भी</font></p>
<p><font color="#000000">इक तरफ़ वह इक तरफ़ हम<br />
बीच में यह फ़ासले<br />
इश्क़ में निभाते हैं हम<br />
रात का सुबह से जो बन्धन<br />
क्या ख़बर वह यह हालात जानते भी</font></p>
<p><font color="#000000">इश्क़ का है यह दस्तूर<br />
क्या वह यह समझते भी<br />
कुछ नहीं है इस बात का हल<br />
क्या ख़बर वह जो हल है मिलेगा भी</font></p>
<p><font color="#000000">इक तरफ़ वह इक तरफ़ हम<br />
बीच में यह फ़ासले...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[वह कहाँ चले गये]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=740</link>
<pubDate>Sun, 10 Feb 2008 04:39:02 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=740</guid>
<description><![CDATA[वह कहाँ चले गये
जो कल घर आये थे हमारे
थो]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">वह कहाँ चले गये<br />
जो कल घर आये थे हमारे<br />
थोड़ा-सा और क़रीब हमारे<br />
वह कहाँ चले गये<br />
जो कल घर आये थे हमारे</font></p>
<p><font color="#000000">बड़ी रहमत की थी<br />
जो आये किसी बहाने से<br />
उनके चेहरे पर थी<br />
दबी-सी मुस्कुराहट<br />
आँखें कह रही थीं<br />
अनकहे अफ़साने</font></p>
<p><font color="#000000">वह कहाँ चले गये<br />
जो कल घर आये थे हमारे<br />
कुछ न कहकर भी<br />
सब कुछ कह गये<br />
तोहफ़े में हमें<br />
अपनी यादें दे गये</font></p>
<p><font color="#000000">वह कहाँ चले गये<br />
जो कल घर आये थे हमारे<br />
दिल ने चाहा था<br />
कुछ देर और ठहरें<br />
और कुछ देखें नज़ारें<br />
जो सजाये थे मैंने</font></p>
<p><font color="#000000">वह कहाँ चले गये<br />
जो कल घर आये थे हमारे<br />
पहला करम था उनका<br />
जब नज़रें मिलायी थीं<br />
नज़रें मिलाकर<br />
निगाहें झुकायी थीं</font></p>
<p><font color="#000000">वह कहाँ चले गये<br />
जो कल घर आये थे हमारे<br />
फ़र्श पर जो निशाँ बने<br />
वह  तो मिट गये<br />
मिटे कब वह निशाँ<br />
जो दिल पर रह गये</font></p>
<p><font color="#000000">वह कहाँ चले गये<br />
जो कल घर आये थे हमारे<br />
दिल चाहता था<br />
वह पास बैठें हमारे<br />
दीदार करें हम<br />
खींचे उनकी तस्वीरें</font></p>
<p><font color="#000000">वह कहाँ चले गये<br />
जो कल घर आये थे हमारे</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तेरी यादों के साये तले ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=724</link>
<pubDate>Fri, 08 Feb 2008 14:31:34 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=724</guid>
<description><![CDATA[तेरी यादों के साये तले
जाने हम-
कितनी द]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">तेरी यादों के साये तले<br />
जाने हम-<br />
कितनी दूर तक चले<br />
क्या ख़बर कब...<br />
थकते क़दमों की शाम ढले<br />
जाने कब पतझड़ को<br />
महकता सावन मिले<br />
तेरी यादों की शाम<br />
है नीली-नीली<br />
सागर तट की रेत<br />
है गीली-गीली </font></p>
<p><font color="#000000">तेरी यादों के साये तले<br />
जाने हम-<br />
कितनी दूर तक चले<br />
क्या ख़बर किसलिए...<br />
बुझी राख में चिन्गारी जले<br />
जाने क्यों तेरे बिना...<br />
चलते हैं यहाँ सिलसिले<br />
इक डोर बाँधी थी हमने<br />
वह टूटी नहीं है,<br />
दिल को लगी थी जो लगन,<br />
वह छूटी नहीं है... </font></p>
<p><font color="#000000">तेरी यादों के साये तले<br />
जाने हम-<br />
कितनी दूर तक चले<br />
क्या ख़बर कैसे क्या हुआ<br />
जो तुम रुसवा हो गये...<br />
हम बिल्कुल अकेले,<br />
तन्हा रह गये तुम जो गये<br />
जब कोई आहट आती है<br />
तेरी ही याद जगाती है<br />
तन्हा कर-करके हमें<br />
पल-पल तोड़ जाती है...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[सफ़र बहुत तवील है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=709</link>
<pubDate>Tue, 05 Feb 2008 21:42:31 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=709</guid>
<description><![CDATA[बहारों का मौसम
शाख़ों पर खिलने लगा है
]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">बहारों का मौसम<br />
शाख़ों पर खिलने लगा है<br />
मज़िलों की बेताबी का<br />
चाँद अब दिखने लगा है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">सफ़र बहुत तवील है<br />
और लम्हें मुख़्तसर...</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २०००-२००१</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[जब-जब चाँद को]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=706</link>
<pubDate>Tue, 05 Feb 2008 21:13:51 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=706</guid>
<description><![CDATA[जब-जब चाँद को
छूना चाहा है मैंने
बादलो]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">जब-जब चाँद को<br />
छूना चाहा है मैंने<br />
बादलों के साये<br />
उसको दूर ले गये<br />
मैं अब कि ऐसा<br />
मौसम बनाऊँगा<br />
बादलों के क़तरे भी<br />
न नज़र आयेंगे<br />
मेरी चन्द्रमा तुझे<br />
लकीरों में सजाऊँगा</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २०००-२००१</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[यह रंगीन फ़िज़ा ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2008/02/06/yah-rangeen-fiza/</link>
<pubDate>Tue, 05 Feb 2008 19:40:18 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/2008/02/06/yah-rangeen-fiza/</guid>
<description><![CDATA[यह रंगीन फ़िज़ा
बेरंग दिख रही है
सावन की ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">यह रंगीन फ़िज़ा<br />
बेरंग दिख रही है<br />
सावन की बदली<br />
तंग दिख रही है<br />
एक मैं सिर्फ़ मैं<br />
यहाँ बैठा रहता हूँ<br />
बैठकर तेरा नाम<br />
अपने साथ लेता हूँ<br />
सदियाँ गुज़र गयीं<br />
(ऐसा लगता है मुझको,<br />
शायद कुछ ग़लत कह गया मैं,<br />
लेकिन ऐसा ही है!!)<br />
मौसम बदल गये<br />
अरमाँ बदल जायें<br />
अब तो लौट आ<br />
अब तो लौट आ<br />
मुझे तेरा इंतज़ार है<br />
सिर्फ़ तेरा ही...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २०००-२००१</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मेरी मुहब्बत तो झूठी नहीं]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=702</link>
<pubDate>Tue, 05 Feb 2008 04:58:51 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=702</guid>
<description><![CDATA[मेरी मुहब्बत तो झूठी नहीं
अगर मैं झूठा]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">मेरी मुहब्बत तो झूठी नहीं<br />
अगर मैं झूठा हूँ<br />
तुम जो गये हो यहाँ से<br />
पल-पल मैं टूटा हूँ<br />
किसी का एतबार नहीं करता<br />
किसी को देखकर नहीं मरता<br />
एक फ़ितरत-सी बन गयी है<br />
हर पल तुम्हें याद करने की<br />
तुम्हें भूलने की कोशिश में<br />
हर पल तुम्हें क़रीब रखता हूँ</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २०००-२००१</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[क़िस्मत की लकीरें]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=701</link>
<pubDate>Tue, 05 Feb 2008 04:47:51 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=701</guid>
<description><![CDATA[क़िस्मत की लकीरें
मुझे तुझसे दूर रखती ह]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">क़िस्मत की लकीरें<br />
मुझे तुझसे दूर रखती हैं<br />
यह नम आँखें<br />
तेरी याद में चाँद तकती हैं<br />
आँखें जब बंद करता हूँ<br />
मैं तेरा चेहरा देखता हूँ<br />
गुलों की तरह<br />
यह साँसों में महकता है<br />
माहताब की तरह<br />
ख़ाबों में दमकता है<br />
भूलता नहीं कुछ भी<br />
सिलसिला चला करता है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २०००-२००१</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[किसी आस्माँ के परे तो]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=690</link>
<pubDate>Mon, 04 Feb 2008 19:39:26 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=690</guid>
<description><![CDATA[किसी आस्माँ के परे तो
तेरी मुहब्बत का ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">किसी आस्माँ के परे तो<br />
तेरी मुहब्बत का हासिल मिलेगा<br />
कितनी तन्हाइयाँ तय करें<br />
कब हमें इनका हासिल मिलेगा</font></p>
<p><font color="#000000">तुम मीलों दूर हो सकती हो<br />
तुम किसी और को चाह सकती हो<br />
मेरा क्या, मैं तुमको चाहूँगा<br />
तेरी उम्मीद में जानम मर जाऊँगा</font></p>
<p><font color="#000000">चाँद ने परदा किया<br />
जब-जब तेरा हुस्न सामने आया<br />
उफ़ वह बे-तस्कीनियाँ<br />
कि चाँद तुझसे हुस्न माँगने आया</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००२</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[उम्मीदो-शौक़ सारे मैंने ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2008/02/05/ummeed-o-shauq-saare-maine/</link>
<pubDate>Mon, 04 Feb 2008 19:28:43 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/2008/02/05/ummeed-o-shauq-saare-maine/</guid>
<description><![CDATA[उम्मीदो-शौक़ सारे मैंने
तुझसे जोड़ लिए
]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">उम्मीदो-शौक़ सारे मैंने<br />
तुझसे जोड़ लिए<br />
सारे रास्तों की मंज़िलें<br />
कुछ और थीं<br />
वह रास्ते तेरी ओर मोड़ लिए<br />
अब जिस मोड़ पर है तू<br />
उसी मोड़ पर आकर मिलूँगा<br />
चाहे जिस मोड़ पर मुड़ जाना<br />
हर मोड़ पर मैं खड़ा मिलूँगा</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००२</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[जाने क्या ढूँढ़ता हूँ बे-दर्द ज़माने में]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2008/02/04/jaane-kya-dhhoondhhataa-hoon-bedard-zamaane-mein/</link>
<pubDate>Mon, 04 Feb 2008 03:25:19 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/2008/02/04/jaane-kya-dhhoondhhataa-hoon-bedard-zamaane-mein/</guid>
<description><![CDATA[जाने क्या ढूँढ़ता हूँ बे-दर्द ज़माने मे]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">जाने क्या ढूँढ़ता हूँ बे-दर्द ज़माने में<br />
बड़ा दर्द है अपना किरदार निभाने में</font></p>
<p><font color="#000000">धीरे-धीरे ज़माने के साथ चलते रहे<br />
फासलों को नज़दीकियों में बदलते रहे</font></p>
<p><font color="#000000">समझते थे यह करना हमारी गरज़ है<br />
अब न करें तो इसमें क्या हरज़ है</font></p>
<p><font color="#000000">हर जगह क्या हम ही फर्ज़ निबाहेंगे<br />
और वह ग़ुरूर करके बस इतरायेंगे</font></p>
<p><font color="#000000">वह मान बैठे हैं वह हमसे उम्दा हैं<br />
यह साबित कर दिखायेंगे हम उम्दा हैं</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००२</p>
]]></content:encoded>
</item>

</channel>
</rss>
