कहीं नन्हें फुलों सा, और नीली कलियों सा, हाथों से सहेजकर, हवाओं से बचाकर, संबंधों को सहेजा है मैनें । मीठे स्वपनों सा, अठखेली गीतों सा, छिप गुनगुनाकर, उसी हवा को सुनाकर, सखाओं संग गाया है मैनें । जब क… more →
प्रेमपीयूषwrote 5 years ago: कहीं नन्हें फुलों सा, और नीली कलियों सा, हाथों से सहेजकर, हवाओं से बचाकर, संबंधों को सहेजा है मैनें … more →
wrote 5 years ago: हिन्दुस्तान अमरीका बन जाए तो कैसा होगा – पाँच बातें । यह बीस-सुत्री कार्यक्रम जैसे स्टाईल में … more →
wrote 5 years ago: प्रिय अनूप जी, आपका लेख पढ़ा । ऐसे मैनें वहाँ टिप्पणी तो डाल दी है पर कुछ और लिखना चाहता हूँ । आप मा … more →