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	<title>मोहतरमा &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
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	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "मोहतरमा"</description>
	<pubDate>Sat, 30 Aug 2008 09:50:26 +0000</pubDate>

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	<language>en</language>

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<title><![CDATA[सिग्नल पर होता मेकअप]]></title>
<link>http://pryas.wordpress.com/?p=162</link>
<pubDate>Wed, 16 Apr 2008 10:45:17 +0000</pubDate>
<dc:creator>pryas</dc:creator>
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<description><![CDATA[दफ्तर आते हुए ट्रैफिक सिग्नल पर एक अजी]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>दफ्तर आते हुए ट्रैफिक सिग्नल पर एक अजीब सा नजारा देखा...</p>
<p>एक ३०-३२ वर्ष की गोरी-चिट्टी मोहतरमा अपनी लंबी सी गाडी में बैठी सिग्नल के हरे होने के इंतज़ार कर रही हैं. इंतजार कुछ लंबा है क्यों ना दर्पण से गुफ्तगु की जाये. बस रियर-व्यु मिरर्र में लगी अपना चेहरा निहारने और गाडी बन गयी ब्यूटी पार्लर.</p>
<p>तभी ठक-ठक की आवाज से उनकी एकाग्रता भंग हुई. देखा कोई २५-२८ साल का एक नौजवान, अपने दोनों हाथों और दोनों पैरों की साहयता से एक चौपाये की तरह चल रहा था, भीख माँग रहा था. उन मोहतरमा ने एक नफरत भरी नजर उस पर डाली और फिर लिप्स्टिक निकाल कर अपने होटों की आभा बढाने लगी.</p>
<p><a href='http://pryas.files.wordpress.com/2008/04/madam.jpg'><img src="http://pryas.wordpress.com/files/2008/04/madam.jpg" alt="Madam" width="250" height="166" class="alignright size-medium wp-image-163" /></a></p>
<p>मैं उनके लाल-गुलाबी चमकते होठों को निहार रहा था तभी मुझे उस भिखारी का ख्याल आया और मैंने उसके होटों की तरफ देखा. उसके सुखे होटों पर ना खत्म होने वाली एक प्यास थी. फिर उस सुंदरी ने आई-लाईनर लगा कर अपनी सुंदर आँखों को और सुंदर बनाया. मैने भिखारी की उनींदी और अलसाई आँखों की तरफ देखा, उनमें कुछ पाने की लालसा अभी भी दम साधे खडी थी. आँखों के बाद गालों का नम्बर आया. धूप से गुलाबी हुए गालों को और गुलाबी किया जा रहा था. भिखारी के पिचके और भीतर धंसे हुए गाल शायद गुलाबी गालों से इर्ष्या कर रहे थे.</p>
<p>इस दौरान कभी-कभी स्वप्न सुंदरी भिखारी की तरफ भी देख लेती थी शायद पूछ रही हो-कैसी लग रही हूँ? हल्की सी मुस्कुराहट के साथ हाथ अब रंग-बिरंगी बिंदी को एड्जैस्ट करने के लिये माथे पर पहुँच चुके थे. और वो भिखारी उसके हाथ भी माथे पर थे पसीना पोंछ रहा था या शायद अपनी तकदीर को एड्जैस्ट कर रहा था...पता नहीं.</p>
<p>तभी सिग्नल हरा हो गया और गाडी फर्राटे से निकल गयी. पता नहीं कितने सिग्नलों पर कितनी बार वह गाडी रुकेगी और कितनी बार वह अपने रूप को सँवारेगी और कितने ही भिखारीयों को उनके वाकई भिखारी होने का एहसास करवायेगी.</p>
<p>उस भीखारी को मैंने बहुत ध्यान से देखा था. उसके चेहरे पर एक सवाल मुँह बाये खडा था. क्यों भगवान, इतना फर्क क्यों किया?  तूने अमीर को अमीर बनाया मुझे उससे शिकायत नहीं. किंतु कम-से-कम मेरे हाथ-पैर तो सलामत बना देता.</p>
<p>तभी ड्राईवर की आवाज से तंद्रा टूटी, "क्यों सर मजा आ गया"? मैं फीकी सी हँसी हँस दिया.</p>
<p><em>चित्र http://www.jupiterimages.com से लिया गया है<br />
यदि किसी को इस पर आपत्ति होगी तो यह चित्र हटा दिया जायेगा.</em></p>
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