बुरे राजा के राज में भला जनता कैसे सुखी रह सकती है। बुरे मित्र से भला क्या सुख मिल सकता है। वह और भी गले की फांसी सिद्ध हो सकता है। बुरी स्त्री से भला घर में सुख शांति और प्रेम का भाव कैसे हो सकता है।… more →
दीपक भारतदीप की हिंदी पत्रिकाwrote 4 years ago: उस दिन अफलातून जी ने अंतर्जाल पर सीधे वार्तालाप के दौरान उन्होंने अपने शैशव ब्लाग का एक पाठ पढ़ने के … more →
wrote 5 years ago: कोई हमारे दर्द को आकर सहलाये इस चाह में इन्तजार करने का ज़माना अब नहीं रहा किसी के दर्द को सहलाकर हम … more →
wrote 5 years ago: सावन और बसंत के मौसम पर शीतल हवाओं के चलने की बात लिखना अब मजाक लगता है अगर कोई प्रियतम अपने प्रेयसी … more →
wrote 5 years ago: ख्वाहिशें तो जिंदगी में बहुत होतीं हैं पर सभी नहीं होतीं पूरी जो होतीं भी हैं तो अधूरी पर कोई इसलिए … more →
wrote 5 years ago: १.शत्रु को अपने से अधिक जानकर उसके बल के कारण उपेक्षा कर स्थिर ही रहता है उसको उपेक्षासन कहते हैं। ज … more →
wrote 5 years ago: रहिमन गली है सांकरी, दूजो न ठहराहिं आपु अहैं तो हरि नहीं, हरि आपुन नाहि संत शिरोमणि रहीम कहते हैं की … more →
wrote 5 years ago: कोई भी धर्म अपने अनुयायियों के विश्वास के बिना नहीं चल सकता , और उसके मुखिया अपना प्रभुत्व जमाने के … more →
wrote 5 years ago: बुरे राजा के राज में भला जनता कैसे सुखी रह सकती है। बुरे मित्र से भला क्या सुख मिल सकता है। वह और भी … more →
wrote 5 years ago: आजकल जिसे देखो अपने लोगों-यानी अपने रिश्तेदारों , परिचितों, मित्रों और परिवार -पर यकीन नहीं करता । ह … more →
wrote 5 years ago: देश को विकास की ओर ले जाने की बात सभी करते है और करना चाहिऐ, पर आज तक कोई भी स्पष्ट नहीं का सका कि उ … more →
wrote 5 years ago: देवराज इंद्र द्वारा राजा हरिश्चन्द्र के पुत्र रोहित को उपदेश के रुप में संस्कृत में दिए गये श्लोक का … more →
wrote 5 years ago: बौद्धिक अँधेरे में ज्ञान के चिराग कुछ यूँ बेचे जा रहे हैं सदियों से अपनी जगह खडे बुत भी लोगों को चलत … more →
wrote 5 years ago: (यह व्यंग्य कविता काल्पनिक है और इसका किसी घटना या व्यक्ति से कोई संबंध नहीं है) अपने आईने में हमारा … more →
wrote 5 years ago: न पीडा से न किसी चाहत से न किसी शब्द से वह बहता आता है सहज भाव से अपनी पीडाओं को भुला दो अपनी चाहतों … more →
wrote 5 years ago: क्रिकेट,फिल्म,राजनीति और और पत्रकारिता का क्षेत्र समाज में आकर्षण का केंद्र होते हैं । यही नहीं जिन … more →
wrote 5 years ago: अपनी इच्छाओं और आशाओं की सतत पूर्ती को ही मनुष्य वास्तविक सुख समझता है -उसे लगता है … more →
wrote 5 years ago: उनके इन्तजार में गुजारे कयी बरस जिन्हें कभी हमारी याद न आयी जब वह आये हमारे घर उनका बदल रुप देखकर ल … more →
wrote 5 years ago: हमारे देश के अनेक महापुरुष कह चुके हैं कि जीवन अपने आप में एक मृग तृष्णा है । और ऐसा नहीं है कि हमार … more →
wrote 5 years ago: थका हुआ शरीर उदास मन सूनी आँखें और कांपती जुबान पूछते है पता वह सुख और ख़ुशी का ओढ़े हैं लिबास स्वार … more →