<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><!-- generator="wordpress.com" -->
<rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	>

<channel>
	<title>यात्रा-विवरण &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/यात्रा-विवरण/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "यात्रा-विवरण"</description>
	<pubDate>Fri, 29 Aug 2008 19:47:13 +0000</pubDate>

	<generator>http://wordpress.com/tags/</generator>
	<language>en</language>

<item>
<title><![CDATA[नंदी हिल्स, बंगलुरू]]></title>
<link>http://nindapuran.wordpress.com/2007/12/30/nandi_hills/</link>
<pubDate>Sun, 30 Dec 2007 05:00:28 +0000</pubDate>
<dc:creator>अंकुर वर्मा</dc:creator>
<guid>http://nindapuran.wordpress.com/2007/12/30/nandi_hills/</guid>
<description><![CDATA[बंगलुरू से निकटतम दूरी (५५ कि.मी.) पर स्]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>बंगलुरू से निकटतम दूरी (५५ कि.मी.) पर स्थित पहाड़ी है नंदी हिल्स&#124; समुद्रतल से लगभग १४५० मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह पर्यटन स्थल सप्ताहांत सैर के लिए एकदम उपयुक्त है&#124; बंगलुरू से हैदराबाद राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या ७ (NH-7) पर लगभग ४० किलोमीटर चलने के बाद यहाँ के लिए रास्ता अलग होता है&#124; सड़कों की हालत ठीक ही है अतः आराम से ७० -८० कि.मी. प्रति घंटा की गति से वाहन चालन किया जा सकता है&#124; वैसे तो यहाँ जाने के लिए सरकारी बसें भी उपलब्ध हैं परन्तु व्यक्तिगत वाहन से यात्रा का अधिक आनंद उठाया जा सकता है&#124; चार-पाँच लोगों का साथ हो तो सोने पे सुहागा&#124; इस बार बड़े दिन की छुट्टी हमने मित्रों (दीपक, विवेक और मणि) के साथ नंदी हिल्स पर ही व्यतीत की&#124; नंदी हिल्स के बारे में ध्यान रखने योग्य बात यह है कि यह अपेक्षाकृत कम विकसित पर्यटन स्थल है इसलिए ऊपर खाने पीने के लिए कम विकल्प हैं&#124; कम विकसित होने का फ़ायदा यह है कि अक्सर भीड़ नहीं होती और आप आराम से वादियों का आनंद ले सकते हैं&#124; यह टीपू सुल्तान का ग्रीष्मावकाश निवास स्थल था और इस वजह से आस पास कुछ पुरानी इमारतें तथा वाटिकाएं हैं&#124; इसे मैं बंगलुरू के पास के अवश्य रूप से देखे जाने वाले पर्यटन स्थानों की सूचि में तो नहीं रखूंगा परन्तु मित्रों के साथ एक दिन बिताने के लिए ये बुरा नहीं है&#124;</p>
<p>निम्नांकित लिंक पर जाकर आप नंदी हिल्स का पूर्वदर्शन कर सकते हैं। समयाभाव के कारण अभी तक सभी छायाचित्र अपलोड नहीं किये गये हैं, कृपया कुछ समय पश्चात पुन: देखें ।</p>
<p><font color="#0000ff">सभी पाठकों को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें </font></p>
<p>धन्यवाद…</p>
<table style="width:194px;">
<tr>
<td style="background:transparent url('http://picasaweb.google.com/f/img/transparent_album_background.gif') no-repeat scroll left center;height:194px;" align="center"><a href="http://picasaweb.google.com/verma.ankur/NandiHills"><img src="http://lh4.google.com/verma.ankur/R4BV9onmxkE/AAAAAAAADHE/CerM6yj_198/s160-c/NandiHills.jpg" style="margin:1px 0 0 4px;" height="160" width="160" /></a></td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align:center;font-family:arial,sans-serif;font-size:11px;"><a href="http://picasaweb.google.com/verma.ankur/NandiHills">नंदी हिल्स, बंगलूरु</a></td>
</tr>
</table>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[जवाहर लाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केन्द्र, बंगलुरू]]></title>
<link>http://nindapuran.wordpress.com/2007/12/27/jncasr/</link>
<pubDate>Thu, 27 Dec 2007 11:49:10 +0000</pubDate>
<dc:creator>अंकुर वर्मा</dc:creator>
<guid>http://nindapuran.wordpress.com/2007/12/27/jncasr/</guid>
<description><![CDATA[बंगलुरू स्थित जवाहर लाल नेहरू उन्नत व]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>बंगलुरू स्थित जवाहर लाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केन्द्र, जोकि जे एन सी के नाम से प्रसिद्ध है, देश के अग्रणी वैज्ञानिक अनुसंधान केन्द्रों में गिना जाता है&#124; इसकी स्थापना भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के जन्मशती वर्ष अर्थात् १९८९ में भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (Department of Science and Technology/DST) के द्वारा की गयी&#124; शुरुआत में इसे भारतीय विज्ञान संस्थान (<a href="http://www.iisc.ernet.in/" target="_blank">Indian Institute of Science</a>/IISc) परिसर में ही प्रारंम्भ किया गया और फिर बाद में इसके विस्तृत परिसर का निर्माण यहाँ से लगभग १२ किमी दूर बंगलुरू-हैदराबाद राष्ट्रीय राज मार्ग संख्या ७ के निकट जक्कूर नामक स्थान पर किया गया&#124; जक्कूर स्थित जे एन सी परिसर काफ़ी शांत, मनोरम तथा अनुसंधान के लिए एकदम उपयुक्त वातावरण देता है&#124; आई आई एस सी परिसर से जे एन सी परिसर के बीच समय समय पर संस्थान की बस सुविधा है&#124; अभी भी आई आई एस सी परिसर में जे एन सी कार्यालय तथा जे एन सी अतिथि गृह (जवाहर विजिटर्स हाउस / जे वी एच) स्थित हैं&#124; जे एन सी में स्थित ७ विभागों में, जिन्हें यहाँ इकाई कहते हैं, लगभग ४० प्राध्यापक तथा २०० शोधार्थी हैं&#124; यहाँ पर शोध कार्य भौतिकी, रसायन, पदार्थ विज्ञान व जीवविज्ञान के अतिरिक्त बहुविषयक अनुसंधान पर केंद्रित है&#124; आधारभूत सुविधाओं की दृष्टि से यह केन्द्र काफ़ी धनी है तथा अनुसंधान के लिए आवश्यक लगभग सभी मुख्य उपकरण यहाँ उपलब्ध हैं&#124; सुप्रसिद्ध रसायन शास्त्री प्रो. सी एन आर राव के नेतृत्व में इस संस्थान ने पिछले एक दशक में काफ़ी उन्नति की है&#124;</p>
<p>जे एन सी की आधिकारिक वेब साइट (हिन्दी में): <a href="http://www.jncasr.ac.in/hindi" target="_blank">http://www.jncasr.ac.in/hindi</a></p>
<p>परिसर के कुछ छाया चित्र निम्नांकित लिंक पर उपलब्ध हैं</p>
<table style="width:194px;">
<tr>
<td style="background:transparent url('http://picasaweb.google.com/f/img/transparent_album_background.gif') no-repeat scroll left center;height:194px;" align="center"><a href="http://picasaweb.google.com/verma.ankur/JNC"><img src="http://lh4.google.com/verma.ankur/R280c4nmqIE/AAAAAAAACMo/Da-A7SHf-Xo/s160-c/JNC.jpg" style="margin:1px 0 0 4px;" height="160" width="160" /></a></td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align:center;font-family:arial,sans-serif;font-size:11px;"><a href="http://picasaweb.google.com/verma.ankur/JNC">जे एन सी</a></td>
</tr>
</table>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[कर्नाटक में देशाटन के सूचना स्रोत]]></title>
<link>http://nindapuran.wordpress.com/2007/12/12/karnataka_tour/</link>
<pubDate>Wed, 12 Dec 2007 13:45:56 +0000</pubDate>
<dc:creator>अंकुर वर्मा</dc:creator>
<guid>http://nindapuran.wordpress.com/2007/12/12/karnataka_tour/</guid>
<description><![CDATA[बंगलुरू आने के बाद से यहाँ की काफ़ी कम च]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>बंगलुरू आने के बाद से यहाँ की काफ़ी कम चीजें ही मुझे प्रभावित कर पायी हैं उनमें से एक है यहाँ की सरकारी सड़क परिवहन सेवा&#124; यदि आप बंगलुरू के आस पास कहीं भी घूमने जाना चाहते हैं तो <a href="http://kstdc.nic.in" target="_blank">कर्नाटक राज्य पर्यटन विकास निगम</a> की वेबसाइट से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और उसके द्वारा संचालित पैकेज यात्रा का भी लाभ उठा सकते हैं&#124; आसपास के लगभग सभी रमणीय स्थानों के लिए यहाँ से पैकेज यात्राएं उपलब्ध हैं&#124; साथ ही यदि आप किसी निकटवर्ती स्थान (तीन-चार सौ किलोमीटर तक) पर जाने के लिए राज्य सड़क परिवहन सेवा का लाभ उठाना चाहते हों तो भारतीय रेलवे की भाँति ही इसका भी टिकट <a href="http://ksrtc.in/" target="_blank">ऑनलाइन</a> बुक कर सकते हैं&#124; परन्तु ऑटो रिक्शा से मेरे कई कटु अनुभव रहें हैं इसलिए मैं इसके प्रति सभी को सचेत करना अपना कर्तव्य समझता हूँ&#124; अधिकतर ऑटो रिक्शा चालक आपसे बोलेंगे कि मीटर काम नहीं कर रहा है&#124; अब कल ही की बात ले लीजिये पहले तो आई. आई. एस सी. से मल्लेश्वरम जाने के लिए कोई तैयार नहीं हुआ फ़िर जब तैयार हुआ तो २.५ किलोमीटर के ३० रुपये मांगे (नियमानुसार १५ रुपये बनते हैं) और जब हमलोग तैयार भी हो गए ३० रुपये देने को तो गंतव्य स्थान पर पहुँच कर वह ४० रुपये की माँग करने लगा&#124; यहाँ पर गौर करने वाली बात यह थी कि यात्रा से पहले व यात्रा के दौरान उसे हिन्दी व अंग्रेजी भाषाओं का ज्ञान नहीं था परन्तु पैसे मांगने के लिए उसे पता नहीं कैसे हिन्दी आ गयी&#124; मैं जानता हूँ कि इस घटना का सामान्यीकरण करना उचित नहीं है परन्तु यदि आपके अधिकतर अनुभव ऐसे ही हों तब और किया भी क्या जा सकता है? वैसे सुना है कि यदि आपको स्थानीय भाषा का ज्ञान है तो उनका व्यवहार एकदम विपरीत होता है&#124; सही है एक और रेसियल डिस्क्रिमिनेशन देखने को मिला&#124;</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[लालबाग वानस्पतिक उद्यान, बंगलुरू]]></title>
<link>http://nindapuran.wordpress.com/2007/12/07/lalbagh/</link>
<pubDate>Fri, 07 Dec 2007 13:17:43 +0000</pubDate>
<dc:creator>अंकुर वर्मा</dc:creator>
<guid>http://nindapuran.wordpress.com/2007/12/07/lalbagh/</guid>
<description><![CDATA[बंगलुरू में अपने दूसरे सप्ताहांत पर अ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>बंगलुरू में अपने दूसरे सप्ताहांत पर अपने मित्र चन्द्रशेखर (जिसे मैं चंदू और ऑफिस वाले चन्द्रा जी बुलाते हैं) के साथ लालबाग वानस्पतिक उद्यान (botanical garden) घूमने का अवसर प्राप्त हुआ&#124; बंगलुरू में यह देखा जाय तो यह हमारा प्रथम पर्यटक स्थान भ्रमण था, वैसे पिछले सप्ताह हम आई. आई. एस सी. के पास ही यशवंतपुर स्थित इस्कॉन मन्दिर भी गए थे&#124; इस उद्यान की स्थापना मैसूर के सुल्तान हैदर अली ने १७४० से १७६० के बीच की थी, बाद में अंग्रेजों तथा आज़ादी के बाद सरकार ने इसका विस्तार तथा देखभाल की&#124; यह एक शाम बिताने के लिए अच्छा स्थल है और प्रेमी युगल तो अपनी कई शामें यहीं बिताते हैं&#124; यह लगभग बंगलुरू के केन्द्र में है और यातायात की कोई असुविधा नहीं है&#124; यहाँ पर देखने के लिए अनेक दुर्लभ प्रजाति के पेड़-पौधे और पक्षी, एक शीश महल, लालबाग झील इत्यादी स्थान हैं&#124; पूरा घूमने के लिए कम से कम २ घंटे का समय चाहिए, वैसे विद्युत चालित वैन भी चलती है जिससे इसे कम समय में भी निपटाया जा सकता है&#124; इस जगह का मूल्यांकन आप निम्नांकित लिंक पर उपस्थित मेरी चित्रावली से भी कर सकते हैं&#124;</p>
<table style="width:194px;">
<tr>
<td style="background:transparent url('http://picasaweb.google.com/f/img/transparent_album_background.gif') no-repeat scroll left center;height:194px;" align="center"><a href="http://picasaweb.google.com/verma.ankur/Lalbagh"><img src="http://lh6.google.com/verma.ankur/R1O51YJikZE/AAAAAAAACD8/SKUJZ0fHOkk/s160-c/Lalbagh.jpg" style="margin:1px 0 0 4px;" height="160" width="160" /></a></td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align:center;font-family:arial,sans-serif;font-size:11px;"><a href="http://picasaweb.google.com/verma.ankur/Lalbagh">लालबाग, बंगलुरू</a></td>
</tr>
</table>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[बंगलुरू में पहले तीन दिन...]]></title>
<link>http://nindapuran.wordpress.com/2007/11/20/%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%82-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%a8/</link>
<pubDate>Tue, 20 Nov 2007 12:16:12 +0000</pubDate>
<dc:creator>अंकुर वर्मा</dc:creator>
<guid>http://nindapuran.wordpress.com/2007/11/20/%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%82-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%a8/</guid>
<description><![CDATA[आजकल हम अपने शोधकार्य हेतु बंगलुरू स्]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>आजकल हम अपने शोधकार्य हेतु बंगलुरू स्थित जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च (या  संक्षेप में जे.एन.सी.) में आए हुए हैं&#124; अगले करीब ६ सप्ताह यहीं की जलवायु में बीतेंगे&#124; रविवार सुबह साढ़े ६ बजे हम बंगलुरू पहुंचे&#124; हमारे आवास की व्यवस्था यहाँ पर आई. आई. एस. सी. स्थित जवाहर विसिटर्स हॉउस मैं की गयी है जहाँ हमें पहुँचने में तनिक देर न लगी&#124; यहाँ पर एक बात का उल्लेख अत्यन्त आवश्यक है कि बंगलुरू पहुँचने से पूर्व हमारे मित्रों ने, जोकि यहाँ से किसी न किसी प्रकार से सम्बन्ध रखते हैं, बताया था कि यहाँ ऑटो रिक्शा से यात्रा करना अपेक्षाकृत सस्ता और विश्वसनीय है; जोकि एकदम खोखला दावा साबित हुआ, बंगलुरू सिटी रेलवे स्टेशन से आई. आई. एस. सी. तक की करीब ५ किलोमीटर की सवारी के हमें ८० रुपये देने पड़े&#124; बाद में जब हमने और तफ्तीश की तो पता चला कि प्रीपेड ऑटो के सिर्फ़ ४३ रुपये लगते हैं और हमसे पहले भी अनेक व्यक्ति इस ठगी का शिकार हुए हैं&#124; इससे अच्छा तो अपना कानपुर ही है कम से कम कोई इमानदारी का दावा तो नहीं करते&#124;</p>
<p>रविवार का दिन हमने अपने पुराने मित्रों से मेल मिलाप में गुजारा&#124; सुबह हम अपने आई आई टी कानपुर के मित्र विवेक और मणि से मिले और दोपहर का भोजन हमने उन्हीं के निवास पर भारत - पाकिस्तान एकदिवसीय क्रिकेट मैच देखते हुए किया&#124; शाम को हमारे कॉलेज के मित्र दीपक पन्त और चन्द्रशेखर (चंदू) हमसे मिलने आए&#124; दोनों ही आजकल यहाँ पर सॉफ्टवेयर टाइप कि जॉब करते हैं&#124; पूरा दिन कैसे गुज़रा पता ही नहीं चला&#124;</p>
<p>सोमवार प्रातः ९ बजे हम जे.एन.सी. पहुँच गए&#124; आई.आई.एस.सी. से जे.एन.सी. करीब १५ किलोमीटर दूर है और समय समय पर  इन दोनों संस्थानों के बीच बस की व्यवस्था है&#124; सौभाग्यवश इस समय जे. एन. सी. का वार्षिक इन हाउस कार्यक्रम चल रहा है, जोकि नेहरू जी के जन्मदिन के आस पास आयोजित किया जाता है&#124; इसमें यहाँ पर स्थित सभी विभागों के लोग एकत्रित होकर आपस में आपने शोध कार्य की चर्चा करते हैं&#124; सायंकाल चौदहिया मेमोरियल हाल में पद्म श्री उस्ताद राशिद खान के हिन्दुस्तानी सुर वाचन  का आयोजन था&#124; चौदहिया मेमोरियल हाल आई. आई. एस. सी. परिसर के निकट ही स्थित है और एक वायलिन के आकार का बना हुआ है&#124; कहते हैं कि यह एक रमणीय स्थान है पर हमें तो कुछ ख़ास लगा नहीं&#124;</p>
<p><a href="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/11/chowdiah.jpg" title="चौदहिया मेमोरियल हॉल"></a></p>
<p style="text-align:center;"><a href="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/11/chowdiah.jpg" title="चौदहिया मेमोरियल हॉल"><img src="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/11/chowdiah.jpg" alt="चौदहिया मेमोरियल हॉल" /></a></p>
<p style="text-align:center;" align="center"><u><em>चौदहिया मेमोरियल हॉल, मल्लेश्वरम, बंगलुरू  (सौजन्य से : गूगल अर्थ)</em></u></p>
<p>हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत में अरुचि के कारण जनाब राशिद खान हमें एक घंटे से अधिक नहीं रोक पाये&#124; वैसे इस बीच हमने कई ऐसे लोग देखे जोकि उनके गायन का भरपूर आनंद उठा रहे थे&#124; तत्पश्चात रात्रिभोज का आयोजन था जोकि हमारे जैसे लोगों के लिए सुर संध्या के समापन की प्रतीक्षा किए बगैर ही समय से पूर्व प्रारम्भ हो गया था&#124; अभी बंगलुरू और जे.एन.सी. में तो काफी दिनों रहना है इसलिए इनके बारे में बाद में विस्तार से लिखूंगा&#124;</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[आखिरकार ताजमहल भी देख ही लिया]]></title>
<link>http://nindapuran.wordpress.com/2007/11/09/%e0%a4%86%e0%a4%96%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%b2-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%96-%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%b2/</link>
<pubDate>Fri, 09 Nov 2007 00:27:44 +0000</pubDate>
<dc:creator>अंकुर वर्मा</dc:creator>
<guid>http://nindapuran.wordpress.com/2007/11/09/%e0%a4%86%e0%a4%96%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%b2-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%96-%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%b2/</guid>
<description><![CDATA[पिछले कुछ दिनों से वो क्या कहते हैं हम]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>पिछले कुछ दिनों से वो क्या कहते हैं हमारे पैरों में सनीचर सवार हो गया है&#124; यही कारण था की गत २६ वर्षों में २० से अधिक बार आगरा जाने के बाद भी जो काम हमने नहीं किया पैरों में सवार सनीचर ने इस बार करा दिया&#124; जीहाँ अब हम भी ताज देखने वालों के समूह में आ गए हैं&#124; दरअसल इन दिनों श्री रोद्रिगो मार्तिनेज़, जोकि कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय इरविन में शोधार्थी हैं, ३ माह के लिए सहयोगी शोधकार्य हेतु आई आई टी कानपुर स्थित हमारी प्रयोगशाला में आए हुए हैं&#124; हमारे सभी मित्र पहले से ही ताज देख चुके थे इसलिए केवल हम ही बचे उनके साथ जाने के लिए&#124; कानपुर से आगरा करीब ढाई सौ किलोमीटर दूर है अतः हमने केवल एक दिन का प्लान बनाया&#124; प्रातः साढ़े ८ बजे इलाहबाद-मथुरा एक्सप्रेस से हम आगरा कैंट स्टेशन पर उतरे और वहाँ से सीधा ईदगाह बस-स्टैंड पहुँच गए फ़तेहपुर-सीकरी जाने के लिए&#124; करीब सवा ९ बजे बस चली जिसने हमें ११ बजे फ़तेहपुर-सीकरी उतार दिया&#124; वहाँ पहले हमलोग बुलंद दरवाजा और सलीम चिश्ती दरगाह देखने गए&#124; पता चला कि यह क्षेत्र अभी भी सरकार ने अपने संरक्षण में नहीं लिया है और चिश्ती परिवार ही अभी भी इसकी देखरेख करता है अतः आप यहाँ के रखरखाव से संतुष्ट नहीं हो सकते&#124; इसके अतिरिक्त उसी परिसर में एक मस्जिद चिश्ती परिवार की अन्य कब्रें तथा अनारकली का सुरक्षित भूमिगत पलायन मार्ग भी देखा; बताया गया कि यह आगरा के लालकिले से दिल्ली होता हुआ लाहौर तक जाता है जहाँ पर आज भी अनारकली की मज़ार उपस्थित है&#124; खैर गाइड महोदय को भी शायद ज़्यादा उम्मीद नहीं थी कि हम उनकी इस बात से सहमत होंगे&#124; कहानी कुछ इस प्रकार है कि सलीम चिश्ती अजमेर के ख्वाज़ा मुईनुद्दीन् चिश्ती के पौत्र थे&#124; जब बादशाह अकबर द्वारा संतान प्राप्ति की दिशा में किए गए सभी प्रयास निष्फल रहे तो वह स्वप्न में आए निर्देश के मुताबिक़ बाबा सलीम चिश्ती के पास आए&#124; उन्हीं के आशीर्वाद से अकबर को महारानी जोधाबाई से पुत्र प्राप्ति हुई और बाबा के नाम पर उसका नाम भी सलीम रखा गया&#124; बाबा सलीम चिश्ती के सम्मान में ही बादशाह ने ये बुलंद दरवाजा बनवाया&#124; उसके बाद अकबर ने फ़तेहपुर सीकरी को अपनी राजधानी भी बनाया परन्तु केवल १५ वर्षों में ही उसे अपना यह निर्णय बदलना पड़ा&#124; इसके अलावा यहाँ पर बादशाह अकबर का महल भी है जोकि भारत सरकार के पुरातत्व संरक्षण विभाग द्वारा संरक्षित है&#124; यहाँ पर हमने जोधाबाई महल, पंचमहल, अस्तबल, पचीसी दरबार, दीवान-ऐ-खास, दीवान-ऐ-आम, बीरबल महल, अनूप तालाब (जहाँ पर सुरसम्राट तानसेन अपना संगीत वाचन करते थे) इत्यादि भी देखा&#124; यह सब जानकर एक बार को तो यकीन हो गया कि जो भी मुग़ल-ऐ-आज़म में दिखाया गया था वो कुछ तो वास्तविकता से प्रेरित था&#124;</p>
<p align="center"><a href="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/11/fatephur-sikri.jpg" title="बुलंद दरवाज़ा"><img src="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/11/fatephur-sikri.thumbnail.jpg" alt="बुलंद दरवाज़ा" /></a>     <a href="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/11/anup-talav.jpg" title="अनूप तालाव"><img src="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/11/anup-talav.thumbnail.jpg" alt="अनूप तालाव" />   </a><a href="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/11/panch-mahal.jpg" title="पंच महल"><img src="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/11/panch-mahal.thumbnail.jpg" alt="पंच महल" /></a></p>
<p>फ़तेहपुर सीकरी से लौटने के बाद हम लोगों ने सीधे ताजमहल जाने का निर्णय लिया&#124; वहाँ जाकर पता चला कि प्रवेश शुल्क भारतीयों के लिए केवल २० रुपये है जबकि विदेशी नागरिकों के लिए यह ७५० रुपये है&#124; विदेशियों के साथ इसके बदले कोई खास विशिष्ट व्यव्हार नहीं किया जाता&#124; अपने मित्र के इस बात से संबंधित प्रश्नों का कोई उत्तर नहीं था हमारे पास&#124; इसके अतिरिक्त आगरा के लालकिले व फ़तेहपुर-सीकरी किले में भी इसी प्रकार भेदकर शुल्क का प्राविधान है&#124; भारतीय रु.२० और विदेशी रु.२५०&#124; हाँ यदि आप ताज का टिकट पहले ले लें तो कोई दूसरे टिकट लेने की आवश्यकता नहीं है&#124; जहाँ तक ज्ञान जी के इस प्रश्न का सवाल है कि पाकिस्तानी व बंगलादेशी को कैसे पहचानते है कि वे विदेशी हैं, दरअसल वहाँ ऐसा कोई प्राविधान नहीं है जिससे कि यह पता चल सके कि कोई देशी है या विदेशी&#124; यह आपकी इमानदारी पर आश्रित है कि आप वहाँ लगे निर्देशों का पालन करें&#124; यह बात अवश्य है कि यदि आप गोरी चमड़ी वाले हैं या फ़िर नीग्रो हैं तो आप को वहाँ गेट पर रोक दिया जाएगा&#124; ताज के प्रवेश द्वार पर सुरक्षा जाँच के लिए दो (स्त्री व पुरूष) लम्बी कतार लगी थी&#124; वहाँ पर उपस्थित कुछ दलालों ने हमें बिना पंक्तिबद्ध हुए प्रवेश कराने का प्रस्ताव दिया&#124; इसके बदले उनकी मांग २५० से शुरू होकर ५० रुपये तक आ गयी पर हमने साफ कर दिया कि भ्रष्टाचार से सख्त परहेज है और उनके द्वारा बताई गयी यह बात भी सफ़ेद झूठ साबित हुयी कि पंक्ति में हमें एक घंटे से ज्यादा लगेगा क्योंकि १५ मिनट से भी कम समय में हम अन्दर थे&#124; अतः यदि आप या आपका कोई संबन्धी ताज जाय तो कृपया इस प्रकार के माफिया से सावधान रहे और उनकी किसी भी बात पर यकीन न करे&#124;</p>
<p align="center"><a href="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/11/taj-entrance.jpg" title="ताज महल प्रवेश द्वार"><img src="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/11/taj-entrance.thumbnail.jpg" alt="ताज महल प्रवेश द्वार" /></a> <a href="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/11/taj-mahal.jpg" title="ताज महल"><img src="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/11/taj-mahal.thumbnail.jpg" alt="ताज महल" />  </a><a href="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/11/taj-mahal-crowd.jpg" title="ताज महल की �ीड़"><img src="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/11/taj-mahal-crowd.thumbnail.jpg" alt="ताज महल की �ीड़" /></a></p>
<p>अगले करीब ढाई घंटे हम लोगों ने ताज परिसर में बिताये&#124; ताजमहल की सबसे ख़ास बात मेरे हिसाब से इसकी सिमेट्री है क्योंकि भारत में इससे कहीं अधिक कलाकारी के और नमूने उपलब्ध हैं&#124; परन्तु शायद कोई भी इतना बड़ा और सुडौल नहीं होगा&#124; एक और बात हमने ध्यान दी कि आप ताज को जितना दूर से देखें यह उतना ही सुंदर लगता है क्योंकि दूर से ही आप उसकी सुडौलता को समझ सकते हैं&#124; ताज मैं शाम के समय बहुत भीड़ होती है अतः संभवतः सुबह का समय उपयुक्त होता है यहाँ भ्रमण के लिए&#124; ताज के पीछे बहती यमुना यदि साफ़ होती तो दृश्य काफ़ी मनोरम होता&#124; समयाभाव के कारण हम आगरा के किले नहीं जा पाए जो कि संभवतः फतेहपुर-सीकरी जैसा ही है बजाय इसके कि यहाँ से ताजमहल दिखता है&#124; इसके अलावा आगरा का प्रसिद्ध पंछी पेठा खाने का भी अवसर नहीं मिला&#124;<br />
यात्रा के अन्य छायाचित्र निम्नांकित लिंक पर उपलब्ध हैं...</p>
<table style="width:194px;">
<tr>
<td style="background:transparent url('http://picasaweb.google.com/f/img/transparent_album_background.gif') no-repeat scroll left center;height:194px;" align="center"><a href="http://picasaweb.google.com/verma.ankur/AgraTrip"><img src="http://lh6.google.com/verma.ankur/RzOrwWpyqDE/AAAAAAAABgY/SioIdd9akZg/s160-c/AgraTrip.jpg" style="margin:1px 0 0 4px;" height="160" width="160" /></a></td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align:center;font-family:arial,sans-serif;font-size:11px;"><a href="http://picasaweb.google.com/verma.ankur/AgraTrip">आगरा यात्रा </a></td>
</tr>
</table>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मेरी कोलकाता यात्रा और ऐ. टी. एम. सी. - ०७]]></title>
<link>http://nindapuran.wordpress.com/2007/11/04/%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%90-%e0%a4%9f/</link>
<pubDate>Sun, 04 Nov 2007 04:33:57 +0000</pubDate>
<dc:creator>अंकुर वर्मा</dc:creator>
<guid>http://nindapuran.wordpress.com/2007/11/04/%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%90-%e0%a4%9f/</guid>
<description><![CDATA[गत सप्ताह मैं एक अल्पकालिक पाठ्यक्रम ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>गत सप्ताह मैं एक अल्पकालिक पाठ्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए कोलकाता गया था और इसी कारणवश कोई ब्लॉग नहीं लिख सका&#124; अल्पकालिक पाठ्यक्रम का विषय था "पदार्थ लक्षण-वर्णन के उन्नत तरीके : सूक्ष्मदर्शिकी एवं विवर्तन" (Advanced Techniques of Materials Characterization : Microscopy and Diffraction)&#124; इसका आयोजन मेटीरियल्स रिसर्च सोसाइटी ऑफ़ इंडिया (कोलकाता चैप्टर) द्वारा केंद्रीय कांच व सेरेमिक अनुसंधान संस्थान (CGCRI) में किया गया था&#124;</p>
<p>झारखण्ड बंद की बदौलत हमारी सियालदाह राजधानी एक्सप्रेस पाँच घंटा देरी से मंजिल पे पहुँची&#124; आयोजकों द्वारा दी गयी पूर्वसूचना और हमारी अपने स्थानीय मित्रों से की गयी पूछताछ की वजह से बंगाल इंजीनियरिंग और साइंस यूनिवर्सिटी के अतिथि गृह पहुँचने में कोई दिक्कत नहीं हुई&#124; क्योंकि शाम हो चुकी थी तो हमने पास ही में केवल रबीन्द्र सदन जाने का प्लान बनाया&#124; वहाँ पर हम नंदन भी गए जोकि पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा पोषित फ़िल्म केन्द्र है&#124; एकैडमी ऑफ़ फाइन आर्ट्स में स्थित कुछ कलाकारों की विकृत कलाकारी के नमूने देखे जो हमारी समझ से पूर्णतया परे थे&#124; फिर थोड़ा सड़कों पे फिरते हुए बिड़ला तारामंडल और विक्टोरिया मेमोरियल प्रांगण में स्थित प्रकाशमय वाटर फाउंटेन शो देखकर वापस अतिथि गृह लौट आये&#124;</p>
<p><a href="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/11/atmc-inauguralsession.jpg" title="उद्घाटन समारोह"></a></p>
<p style="text-align:center;"><a href="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/11/atmc-inauguralsession.jpg" title="उद्घाटन समारोह"><img src="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/11/atmc-inauguralsession.jpg" alt="उद्घाटन समारोह" height="355" width="470" /></a></p>
<p>प्रातः ८ बजे सजधज के तैयार हुए CGCRI जाने के लिए जहाँ पर इस पाठ्यक्रम का आयोजन था&#124; साढ़े ९ बजे उद्घाटन सत्र प्रारम्भ हुआ&#124; थोड़ी और बकबक और माननीयों द्वारा एक दूसरे की प्रसंशा के पुल बंधने के बाद १० बजे पहला विशिष्ट व्याख्यान शुरू हुआ&#124; प्रवक्ता डिफेंस मेटीरियल्स रिसर्च लैब के डा. दीपांकर बनर्जी थे&#124; उन्होंने ट्रांस्मिशन इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप से संबंधित कुछ रोचक तथ्य बताये&#124; फ़िर दिनभर पदार्थ लक्षण-वर्णन (Materials Characterization) से संबन्धित अन्य तरीकों पे कुछ व्याख्यान तथा बहस हुई&#124; ये पदार्थ लक्षण-वर्णन क्या होता है और इसे कैसे किया जाता है ये आपको बाद में एक तकनीकी लेख में बताऊँगा&#124; दूसरा दिन आई. आई. एस. सी. के डा. रविशंकर के व्याख्यान  के अलावा नीरस ही रहा&#124; महत्त्वाकांक्षी हाई-टेक विडियो-कॉन्फरेंसिंग से लैब प्रदर्शन की योजना फ्लॉप साबित हुई&#124;</p>
<p><a href="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/11/atmc-lab-demo.jpg" title="लैब प्रदर्शन"></a></p>
<p style="text-align:center;"><a href="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/11/atmc-lab-demo.jpg" title="लैब प्रदर्शन"><img src="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/11/atmc-lab-demo.jpg" alt="लैब प्रदर्शन" height="350" width="463" /></a></p>
<p>फ़िर आया ममता बनर्जी का बंगाल बंद&#124; आयोजकों ने भी ठान लिया कि चाहे जो हो जाय ये कोर्स नहीं रुकेगा&#124; प्रातः चार बजे ही हमें गेस्ट हाउस से निकाल कर CGCRI में नज़रबंद कर दिया गया&#124; ख़ैर इतनी जल्दी उठाने के अलावा बाकी कोई परेशानी नहीं हुई&#124; इसी प्रकार दिन  एक एक करके गुजरे और कैसे पाँच दिन बीत गए पता ही नहीं चला&#124; एक बड़ी उपलब्धि की बात ये रही कि हमने कोर्स का एक भी व्याख्यान या सत्र नहीं  छोड़ा जिसमें ५ विशिष्ट व्याख्यान १४ कोर्स व्याख्यान और ६  लैब प्रदर्शन थे&#124; यह बताने की कोई आवश्यकता तो नहीं है कि इसके अलावा ५ लंच तथा १० चाय सत्रों में भी हमने अपनी उपस्थिति बड़ी ईमानदारी से दर्ज की&#124;</p>
<p><a href="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/11/atmc-besu10.jpg" title="ये हैं बेसू-१०"></a></p>
<p style="text-align:center;"><a href="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/11/atmc-besu10.jpg" title="ये हैं बेसू-१०"><img src="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/11/atmc-besu10.jpg" alt="ये हैं बेसू-१०" height="350" width="462" /></a></p>
<p>छठा दिन हमने कोलकाता भ्रमण के नाम रखा था&#124; इसमें हमने बेलूर मठ, दक्षिणेश्वर मन्दिर, धर्मतला (esplanade) और विक्टोरिया मेमोरियल का भ्रमण किया&#124; राधा कृष्ण मन्दिर जो बिड़ला मन्दिर के नाम से अधिक प्रसिद्ध है पहले ही एक दिन CGCRI से लौटते समय देख लिया था&#124;</p>
<p align="center"><a href="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/11/bidla-temple.jpg" title="बिड़ला मन्दिर"><img src="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/11/bidla-temple.thumbnail.jpg" alt="बिड़ला मन्दिर" /></a> <a href="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/11/victoria.jpg" title="विक्टोरिया मेमोरियल"><img src="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/11/victoria.thumbnail.jpg" alt="विक्टोरिया मेमोरियल" /></a><a href="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/11/dakshineshwar.jpg" title="दक्षिणेश्वर मन्दिर"> <img src="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/11/dakshineshwar.thumbnail.jpg" alt="दक्षिणेश्वर मन्दिर" /></a></p>
<p>इस लेख में लगाई गयी कुछ तस्वीरों के अलावा यदि आप में धैर्य है और समय भी तो आप निम्नांकित लिंक पर जाकर अन्य तस्वीरों का लुत्फ़ (शायद) उठा सकते हैं&#124;</p>
<table style="width:194px;">
<tr>
<td style="background:transparent url('http://picasaweb.google.com/f/img/transparent_album_background.gif') no-repeat scroll left center;height:194px;" align="center"><a href="http://picasaweb.google.com/verma.ankur/KolkataTripAndATMC07"><img src="http://lh5.google.com/verma.ankur/Ry2MTUn_cLE/AAAAAAAABGg/Ff8HKClX1zg/s160-c/KolkataTripAndATMC07.jpg" style="margin:1px 0 0 4px;" height="160" width="160" /></a></td>
</tr>
<tr>
<td style="text-align:center;font-family:arial,sans-serif;font-size:11px;"><a href="http://picasaweb.google.com/verma.ankur/KolkataTripAndATMC07">कोलकाता यात्रा और ऐ. टी. एम. सी. - ०७</a></td>
</tr>
</table>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[हमारी पूर्वी उत्तर प्रदेश की यात्रा ]]></title>
<link>http://nindapuran.wordpress.com/2007/10/24/%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a5%80-%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a5%87/</link>
<pubDate>Wed, 24 Oct 2007 16:12:32 +0000</pubDate>
<dc:creator>अंकुर वर्मा</dc:creator>
<guid>http://nindapuran.wordpress.com/2007/10/24/%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a5%80-%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a5%87/</guid>
<description><![CDATA[विगत सप्ताह नीरज के साथ पूर्वी उत्तर प]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>विगत सप्ताह नीरज के साथ पूर्वी उत्तर प्रदेश की यात्रा का सौभाग्य प्राप्त हुआ&#124; नीरज एक माह के लिए ह्यूस्टन से भारत आया हुआ है&#124; जब उसने इस यात्रा का प्रस्ताव रखा तो मैंने सहर्ष स्वीकार कर लिया&#124; १९ अक्टूबर शुक्रवार को प्रातः ६ बजे नीरज कानपुर पहुँचा&#124; दिनभर मैंने उसे आई. आई. टी.  तथा अपनी प्रयोगशाला का भ्रमण कराया&#124; आश्चर्यजनक रूप से उसे हमारी मेस का भोजन काफी पसंद आया&#124; सायंकाल हम लोग अनूप जी के साथ उनके अरमापुर स्थित आवास पर गए&#124; अनूप जी के साथ कई विषयों पर चर्चा हुई जिनमे से साम्यवाद तथा आई. आई. टी. का इन्फोठेला प्रमुख थे&#124; उन्होंने मुझे राग दरबारी व नीरज को हिन्दी पुस्तक भेंट की&#124; मुझे भी ब्लॉग जगत में पदार्पण करने हेतु काफी कुरेदा गया&#124;</p>
<p><a href="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/10/img_1984.jpg" title="नीरज और मैं अनूप जी के घर पर"></a></p>
<p style="text-align:center;"><a href="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/10/img_1984.jpg" title="नीरज और मैं अनूप जी के घर पर"><img src="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/10/img_1984.jpg" alt="नीरज और मैं अनूप जी के घर पर" height="301" width="400" /></a></p>
<p>रात्रि साढ़े ग्यारह बजे हमने रेलवे स्टेशन की ओर कूच किया&#124; शिव गंगा एक्सप्रेस करीब एक घंटा विलम्ब से आई परन्तु हमने समय कुछ ऐसा काटा कि पता नहीं चला&#124; खैर प्रातः ९ बजे हम बनारस पहुंचे&#124; थोड़ी जद्दोजहद के बाद एक होटल में कमरा लिया और तरोताजा होने के बाद सारनाथ की ओर प्रस्थान किया&#124; सारनाथ में हम मंदिरों के अतिरिक्त संग्रहालय भी गए&#124; नीरज भारत सरकार के द्वारा किए गए संरक्षण प्रबंधों से काफी प्रभावित हुआ और बोला कि हम लोग बेवजह ही सरकार कि हर बात पर निंदा किया करते हैं&#124;</p>
<p><a href="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/10/img_2037.jpg" title="नीरज सारनाथ स्तूप के सामने"></a></p>
<p style="text-align:center;"><a href="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/10/img_2037.jpg" title="नीरज सारनाथ स्तूप के सामने"><img src="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/10/img_2037.jpg" alt="नीरज सारनाथ स्तूप के सामने" height="308" width="406" /></a></p>
<p>अपराह्न में हम काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बी. एच. यू.) गए और काशी विश्वनाथ मन्दिर में दर्शन के पश्चात् अपने पूर्व शिक्षक श्री राम शरण सिंह से भी मिले&#124; सर के साथ करीब डेढ़ घंटे तक हमने विभिन्न विषयों पर विचार विमर्श किया&#124; सर ने हमें रात्रिभोज पर आमंत्रित किया जिसका हमने भारत व आस्ट्रेलिया के बीच ट्वेन्टी-ट्वेन्टी मैच के साथ आनंद लिया&#124; इससे पहले सायंकाल हमने अस्सी घाट से दशाशमेघ घाट तक नौका विहार का आनंद भी लिया&#124;</p>
<p><a href="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/10/img_2048.jpg" title="मैं और सर"></a></p>
<p style="text-align:center;"><a href="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/10/img_2048.jpg" title="मैं और सर"><img src="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/10/img_2048.jpg" alt="मैं और सर" height="307" width="407" /></a></p>
<p>अगले दिन प्रातः ही हमने इलाहाबाद कि ओर चढा़ई कर दी&#124; प्रातः अल्लापुर स्थित मामा जी के आवास पर नाश्ता करने के पश्चात् हम नीरज के अंकल जी के साथ संगम नहाने गए&#124; नीरज के अंकल जी दरअसल एक रोचक व्यक्तित्व निकले&#124; जीवन के अनेक पहलुओं पर हमने उनके विचार सुने&#124; उन्होंने हमें ब्रह्म विवाह, अष्टावक्र गीता, स्वस्थ जीवन शैली इत्यादी के बारे में बताया&#124; उनकी सभी बातों से मैं सहमत था यह तो नहीं कहूँगा परन्तु हिंदुत्व के बारे में काफी जानने को मिला&#124;</p>
<p><a href="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/10/img_2079.jpg" title="नीरज के अंकल जी"></a></p>
<p style="text-align:center;"><a href="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/10/img_2079.jpg" title="नीरज के अंकल जी"><img src="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/10/img_2079.jpg" alt="नीरज के अंकल जी" height="311" width="407" /></a></p>
<p>संगम स्नान के बाद हम मुग़ल सम्राट अकबर के किले में स्थित अक्षयवट देखने गए&#124; इस वृक्ष का मुख्य भाग अब किले के सेना अधीन क्षेत्र में है जो कि आम नागरिकों के लिए निषिद्ध है&#124; कहते हैं आदिकाल में जब जलप्रलय आई थी तब इसी अक्षयवट के सहारे ही कुछ लोग बच पाये थे&#124; खैर प्रलय तो क्या गंगा में भीषण बाढ़ आयी होगी&#124; सायंकाल हम लोग शिवकुटी स्थित ज्ञानदत्त पांडे जी के आवास गए&#124; थोड़ी मशक्कत और कुछ फोन कॉल्स के फलस्वरूप हमने ज्ञानदत्त जी का घर ढूंढ़ निकाला&#124; उनसे हमने रेलवे से संबंधित कई शंकाओं का समाधान किया &#124; उन्होंने रेलवे-लालू किस्से पर भी प्रकाश डाला&#124; वे हमारे शोध कार्य के बारे में जानने के लिए भी काफी उत्सुक थे &#124; नीरज ने उन्हें गैस हाईड्रेट्स के बारे में बताया तो उन्होंने काफी दिलचस्पी दिखाई&#124;</p>
<p><a href="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/10/img_2089.jpg" title="नीरज और ज्ञानदत्त पांडे जी"></a></p>
<p style="text-align:center;"><a href="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/10/img_2089.jpg" title="नीरज और ज्ञानदत्त पांडे जी"><img src="http://nindapuran.wordpress.com/files/2007/10/img_2089.jpg" alt="नीरज और ज्ञानदत्त पांडे जी" height="312" width="413" /></a></p>
<p>रात में हम इलाहाबाद-मथुरा एक्सप्रेस से वापस कानपुर लौट आए&#124; अंततः हमारी तीन दिवसीय थकान भरी पूर्वी उत्तर प्रदेश की यात्रा समाप्त हुई &#124;</p>
]]></content:encoded>
</item>

</channel>
</rss>
