Blogs about: राजेश

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बीच सफर दर्द का झोंका1 comment

prithvi wrote 1 year ago: उतरते का‍ती की रात का पिछला पहर है. चांदनी, कपास के फोओं सी खिली है और सर्दी सरसों की ताजा पौधों की … more →

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पापड़1 comment

राजेश 'आर्य' wrote 2 years ago:  हूँ रंग – बिरंगा गोल पापड़, मैं सबके मन को भाता हूँ चाहे हो खाना कितना सादा मैं चटखारा उसे बन … more →

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आखिरी तसलीम

राजेश 'आर्य' wrote 2 years ago: तुम अक्सर पूछती हो न मुझसे कि वो कौन सी पीड़ा है जो टीस मारती रहती है मेरे भीतर और मैं तड़पता रहता हू … more →

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सूजन मेरे ‘पैरों’ में

राजेश 'आर्य' wrote 2 years ago: कोशिश जीवन-पथ पर चलने की और ये सूजन मेरे ‘पैरों’ में, आ जाओ पीड़ा बस जाओ है आँखें खुली अब सहरों में | … more →

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सूजन मेरे 'पैरों' में1 comment

राजेश 'आर्य' wrote 2 years ago: कोशिश जीवन-पथ पर चलने की और ये सूजन मेरे ‘पैरों’ में, आ जाओ पीड़ा बस जाओ है आँखें खुली अब … more →

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कठोर......1 comment

राजेश 'आर्य' wrote 2 years ago: कितना मुश्किल होता है न एक दरख़्त होना | अपनी बिरादरी से अलग होकर गाँव में किसी चौराहे पर पड़े रहना सद … more →

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एक और सत्याग्रह !1 comment

राजेश 'आर्य' wrote 2 years ago: है यह जनता का सत्याग्रह मत कम आँको इस आगाज़ को, बण्डल दबाये, सोना दबाया क्या दबा सकोगे इस आवाज़ को ? … more →

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ज़िन्दगी

राजेश 'आर्य' wrote 2 years ago: यूँ ही इन हवाओं से लड़ते – झगड़ते, कभी पानी में पत्थरों को फेंकते, कभी यूँ ही अकेले पेड़ों की छा … more →

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जोगीरा सा रा रा............

राजेश 'आर्य' wrote 2 years ago: माई पकावत होई पुआ वहाँ, पिरितिया करSत होई ठिठोली, रंग – गुलाल सब उड़Sत होई, दादा होईहन बेहोश ख … more →

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शिव यह पीड़ा अब नहीं !!2 comments

राजेश 'आर्य' wrote 2 years ago: बन गया है नासूर यह, शिव यह पीड़ा अब नहीं | तुम लो रतन, मैं पीयूं हलाहल, यह देव-दानव क्रीडा अब नहीं | … more →

टैग: कविता, देश-काल, धर्म-अध्यात्म, आर्य, पर्व, प्रेरणा, भारत, महाकाल, शिव

शिव यह पीड़ा अब नहीं !!1 comment

राजेश 'आर्य' wrote 2 years ago: बन गया है नासूर यह, शिव यह पीड़ा अब नहीं | तुम लो रतन, मैं पीयूं हलाहल, यह देव-दानव क्रीडा अब नहीं | … more →

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क्यों ?3 comments

राजेश 'आर्य' wrote 2 years ago: अब पलकें भीगती नहीं, किसी अपने के दूर जाने पर | अपना दायरा बढ़ा है, या कि अपने जज्बात सिमटे हैं ? - … more →

टैग: कविता, जीवन एक सफ़र, रिश्ते, Arya, आर्य, क्षणिका, तन्हाई, Emotion, hindi

क्यों ?2 comments

राजेश 'आर्य' wrote 2 years ago: अब पलकें भीगती नहीं, किसी अपने के दूर जाने पर | अपना दायरा बढ़ा है, या कि अपने जज्बात सिमटे हैं ? - … more →

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किस्मत2 comments

राजेश 'आर्य' wrote 2 years ago: हर ऊँचाई को जब मैंने छुआ, संग कायनात थी | मेरे जनाज़े पे कोई ना आया, किस्मत की बात थी | - राजेश … more →

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किस्मत 3 comments

राजेश 'आर्य' wrote 2 years ago: हर ऊँचाई को जब मैंने छुआ, संग कायनात थी | मेरे जनाज़े पे कोई ना आया, किस्मत की बात थी | - राजेश … more →

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क्या कहें2 comments

राजेश 'आर्य' wrote 2 years ago: क्या कहें कि तुम्हारा एहसास नहीं हो पाता जब तक कि सामने ना आ जाओ याकि एहसास करना नहीं चाहता क्योंकि … more →

टैग: कविता, धर्म-अध्यात्म, प्रेरणा-संकल्प, आर्य, गायत्री परिवार, बसंत पंचमी, श्रीराम शर्मा आचार्, Emotion, hindi

क्या कहें 2 comments

राजेश 'आर्य' wrote 2 years ago: क्या कहें कि तुम्हारा एहसास नहीं हो पाता जब तक कि सामने ना आ जाओ याकि एहसास करना नहीं चाहता क्योंकि … more →

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चक्र

राजेश 'आर्य' wrote 2 years ago: शान्ति जन्म आंसू ख़ुशी उत्साह उमंग जोश मिलन विरह उम्मीद ठेस अहम प्यार राग द्वेष हंसी आंसू सुख दुःख आ … more →

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चक्र

राजेश 'आर्य' wrote 2 years ago: शान्ति जन्म आंसू ख़ुशी उत्साह उमंग जोश मिलन विरह उम्मीद ठेस अहम प्यार राग द्वेष हंसी आंसू सुख दुःख आ … more →

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