wrote 1 year ago: उतरते काती की रात का पिछला पहर है. चांदनी, कपास के फोओं सी खिली है और सर्दी सरसों की ताजा पौधों की … more →
wrote 2 years ago: हूँ रंग – बिरंगा गोल पापड़, मैं सबके मन को भाता हूँ चाहे हो खाना कितना सादा मैं चटखारा उसे बन … more →
wrote 2 years ago: तुम अक्सर पूछती हो न मुझसे कि वो कौन सी पीड़ा है जो टीस मारती रहती है मेरे भीतर और मैं तड़पता रहता हू … more →
wrote 2 years ago: कोशिश जीवन-पथ पर चलने की और ये सूजन मेरे ‘पैरों’ में, आ जाओ पीड़ा बस जाओ है आँखें खुली अब सहरों में | … more →
wrote 2 years ago: कोशिश जीवन-पथ पर चलने की और ये सूजन मेरे ‘पैरों’ में, आ जाओ पीड़ा बस जाओ है आँखें खुली अब … more →
wrote 2 years ago: कितना मुश्किल होता है न एक दरख़्त होना | अपनी बिरादरी से अलग होकर गाँव में किसी चौराहे पर पड़े रहना सद … more →
wrote 2 years ago: है यह जनता का सत्याग्रह मत कम आँको इस आगाज़ को, बण्डल दबाये, सोना दबाया क्या दबा सकोगे इस आवाज़ को ? … more →
wrote 2 years ago: यूँ ही इन हवाओं से लड़ते – झगड़ते, कभी पानी में पत्थरों को फेंकते, कभी यूँ ही अकेले पेड़ों की छा … more →
wrote 2 years ago: माई पकावत होई पुआ वहाँ, पिरितिया करSत होई ठिठोली, रंग – गुलाल सब उड़Sत होई, दादा होईहन बेहोश ख … more →
wrote 2 years ago: बन गया है नासूर यह, शिव यह पीड़ा अब नहीं | तुम लो रतन, मैं पीयूं हलाहल, यह देव-दानव क्रीडा अब नहीं | … more →
wrote 2 years ago: बन गया है नासूर यह, शिव यह पीड़ा अब नहीं | तुम लो रतन, मैं पीयूं हलाहल, यह देव-दानव क्रीडा अब नहीं | … more →
wrote 2 years ago: अब पलकें भीगती नहीं, किसी अपने के दूर जाने पर | अपना दायरा बढ़ा है, या कि अपने जज्बात सिमटे हैं ? - … more →
wrote 2 years ago: अब पलकें भीगती नहीं, किसी अपने के दूर जाने पर | अपना दायरा बढ़ा है, या कि अपने जज्बात सिमटे हैं ? - … more →
wrote 2 years ago: हर ऊँचाई को जब मैंने छुआ, संग कायनात थी | मेरे जनाज़े पे कोई ना आया, किस्मत की बात थी | - राजेश … more →
wrote 2 years ago: हर ऊँचाई को जब मैंने छुआ, संग कायनात थी | मेरे जनाज़े पे कोई ना आया, किस्मत की बात थी | - राजेश … more →
wrote 2 years ago: क्या कहें कि तुम्हारा एहसास नहीं हो पाता जब तक कि सामने ना आ जाओ याकि एहसास करना नहीं चाहता क्योंकि … more →
wrote 2 years ago: क्या कहें कि तुम्हारा एहसास नहीं हो पाता जब तक कि सामने ना आ जाओ याकि एहसास करना नहीं चाहता क्योंकि … more →
wrote 2 years ago: शान्ति जन्म आंसू ख़ुशी उत्साह उमंग जोश मिलन विरह उम्मीद ठेस अहम प्यार राग द्वेष हंसी आंसू सुख दुःख आ … more →
wrote 2 years ago: शान्ति जन्म आंसू ख़ुशी उत्साह उमंग जोश मिलन विरह उम्मीद ठेस अहम प्यार राग द्वेष हंसी आंसू सुख दुःख आ … more →