दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: सुबह का भूला शाम को घर वापस आ जाता है प … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बौद्धिक अँधेरे में ज्ञान के चिराग कुछ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बौद्धिक अँधेरे में ज्ञान के चिराग कुछ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: (यह व्यंग्य कविता काल्पनिक है और इसका … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: न पीडा से न किसी चाहत से न किसी शब्द से … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जब पीते थे तो कोई बुलाता नहीं था मांगत … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: क्रिकेट,फिल्म,राजनीति और और पत्रकारि … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज दीपकबापू…पर निष्काम और सहज भाव स … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: थका हुआ शरीर उदास मन सूनी आँखें और कां … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मित्रों, रिश्तेदारो … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: धर्म क्या है यह समझे बि … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: दोस्त हम ऐसा चाहें जो वक्त पर काम आये प … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: एक सुबह से टीवी समाचार च … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: थका हुआ शरीर उदास मन सूनी आँखें और कां … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जळ बिन सब सून -य … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हम सारा दिन किसी न क … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जब सामान्य आदमी के म … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: चारों और वृक्षों से घिरा खिर्की पर है … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: किसके मन में क्या है कौन जानेगा अपने म … more →