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	<title>रूप &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/रूप/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "रूप"</description>
	<pubDate>Sat, 30 Aug 2008 10:06:42 +0000</pubDate>

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	<language>en</language>

<item>
<title><![CDATA[धुँधलियाँ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=970</link>
<pubDate>Mon, 28 Apr 2008 18:02:06 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=970</guid>
<description><![CDATA[धुँधलियाँ-धुँधलियाँ
तेरी यादों की धु]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">धुँधलियाँ-धुँधलियाँ<br />
तेरी यादों की धुँधलियाँ<br />
छायी हैं ज़हन पर<br />
तेरी बातों की बदलियाँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">नज़दीकियाँ नज़दीकियाँ<br />
तेरी मुझसे नज़दीकियाँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">अहसास हो क़रीबी का<br />
मिज़ाज हो ख़ुशनसीबी का<br />
बदले हैं रंग फ़िज़ाओं ने<br />
नूर हो माह रकाबी का</span></p>
<p><span style="color:#000000;">धुँधलियाँ धुँधलियाँ<br />
तेरी यादों की धुँधलियाँ<br />
छायी हैं ज़हन पर<br />
तेरी बातों की बदलियाँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">बिजलियाँ बिजलियाँ<br />
तेरे रूप की बिजलियाँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">जिस्म रेशमी आग का<br />
चिकने मखमली आफ़ताब का<br />
ख़ुशरू पे बैठी हैं मुस्कियाँ<br />
उतरा है रंग हिजाब का</span></p>
<p><span style="color:#000000;">धुँधलियाँ धुँधलियाँ<br />
तेरी यादों की धुँधलियाँ<br />
छायी हैं ज़हन पर<br />
तेरी बातों की बदलियाँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तब्दीलियाँ तब्दीलियाँ<br />
मुझमें इतनी तब्दीलियाँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">भूल गया सारी मजबूरियाँ<br />
दूर हो गयीं सब दूरियाँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तब्दीलियाँ तब्दीलियाँ<br />
मुझमें इतनी तब्दीलियाँ<br />
छायी हैं ज़हन पर<br />
तेरी बातों की बदलियाँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">नज़दीकियाँ नज़दीकियाँ<br />
तेरी मुझसे नज़दीकियाँ</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तस्व्वुरे-हुस्नो-सादगिए-'शीना']]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=947</link>
<pubDate>Sun, 23 Mar 2008 18:08:24 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=947</guid>
<description><![CDATA[सुबह-सा चेहरा, माथे पर सूरज-सी बिन्दिय]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">सुबह-सा चेहरा, माथे पर सूरज-सी बिन्दिया<br />
हँसी, जैसे ख़ुशबू हो कोई, गुनगुनाती हुई<br />
आँखें साँवली-सी, कजरारी-सी<br />
ऐसे झुकती और खुलती थीं<br />
जैसे रात पे सुबह का दरिया बहा दिया हो<br />
वह लट जब चेहरे पर गिरती थीं<br />
यूँ लगता था मानो! बादल की ओट में चाँद हो</font></p>
<p><font color="#000000">उसके पाँव की आहट जैसे बादे-सबा फूलों पर<br />
रूप की सादगी ऐसी जैसे सूफ़ी का तस्व्वुर<br />
रंग बिल्कुल गुले-अंदाम ज़रा-सी बनावट नहीं<br />
लब सुर्ख़ थे ऐसे, जिस तरह गुलाब के पैमाने<br />
ज़ुबाँ नाज़ुक मिज़ाज, वाइज़ो-नासेह की तरह<br />
बदन शीशे जैसा, साफ़-शफ़्फ़ाक़-गुल्फ़ाम<br />
अदा में जुज़ सादगी और कुछ नहीं झलकता था</font></p>
<p><font color="#000000">मालूम नहीं, वह बरस ख़ाब का था कि सच था<br />
उसका वह मेरे घर आना<br />
काँधे से गिरते वह कमर पे दुप्पटे की गाँठ<br />
वह दीपावली के दिए, वह सजावट सब<br />
देखना उसे मेरा एक टुक, सुबहो-शाम, रोज़<br />
वह तूफ़ान जी का, कुछ करके दिखा दें<br />
लिखना तेरा नाम दरो-दर पर, आदतन</font></p>
<p><font color="#000000">आज पाँच बरस हो गये...<br />
I'm still reminiscing about you...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३-२००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[माहे-कामिल कहूँ कि शाहे-ख़ुदा कहूँ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=895</link>
<pubDate>Wed, 12 Mar 2008 04:00:12 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=895</guid>
<description><![CDATA[माहे-कामिल कहूँ कि शाहे-ख़ुदा कहूँ
हुस]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">माहे-कामिल कहूँ कि शाहे-ख़ुदा कहूँ<br />
हुस्न-बानो कहूँ कि रंगे-फ़िज़ा कहूँ<br />
आपको कहूँ तो आख़िर मैं क्या कहूँ</font></p>
<p><font color="#000000">आपका हुस्न तो बेमिसाल है<br />
रूप, रंग, अदा का विसाल है<br />
उन्तिस चाँद में भी दाग़ है<br />
आपका बदन रेशमी आग है</font></p>
<p><font color="#000000">इस रेशमी आग को कहूँ तो क्या कहूँ<br />
हुस्न-बानो कहूँ कि रंगे-फ़िज़ा कहूँ</font></p>
<p><font color="#000000">हुस्न आपका सबसे आला है<br />
रब ने किस साँचे में ढाला है<br />
चाँदनी में खिला हुआ कँवल हो<br />
मुझको अल्लाह का फ़ज़ल हो</font></p>
<p><font color="#000000">अल्लाह के फ़ज़ल को नाम क्या दूँ<br />
माहे-कामिल कहूँ कि शाहे-ख़ुदा कहूँ</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: ३१ मई २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[वह तो कमाल है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=886</link>
<pubDate>Mon, 10 Mar 2008 08:11:05 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=886</guid>
<description><![CDATA[वह तो कमाल है, इक वबाल है
ज़ुल्फ़ों में जि]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">वह तो कमाल है, इक वबाल है<br />
ज़ुल्फ़ों में जिसकी रेशमी रूमाल है<br />
हाए! पलटकर देखे' क्यों न वह<br />
कोई बताये उसको जो मेरा हाल है</font></p>
<p><font color="#000000">क्या रूप है क्या रंग है कैसे कहूँ<br />
क्या अदा है क्या नशा है कैसे कहूँ<br />
वह तो कमाल है, इक वबाल है<br />
ज़ुल्फ़ों में जिसके रेशमी रूमाल है</font></p>
<p><font color="#000000">वह तो शमअ है दीवानों की जाँ है<br />
वह दिल की धड़कन, मेरा जहाँ है<br />
उसकी इक झलक से पागल हुआ<br />
मैं पहली नज़र में ही घायल हुआ</font></p>
<p><font color="#000000">हाए! पलटकर देखे' क्यों न वह<br />
कोई बताये उसको जो मेरा हाल है</font></p>
<p><font color="#000000">मैंने उसको अपना ख़ुदा बनाया है<br />
दिन, रात, दोपहर, दुआ बनाया है<br />
हर किसी को ठुकरा के दुनिया में<br />
अपने दिल में उसको बसाया है</font></p>
<p><font color="#000000">हाए! पलटकर देखे' क्यों न वह<br />
कोई बताये उसको जो मेरा हाल है<br />
वह तो कमाल है, इक वबाल है<br />
ज़ुल्फ़ों में जिसकी रेशमी रूमाल है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २९ मई २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[जीज़स से पूछेंगे तुमको बनाया कैसे]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=803</link>
<pubDate>Mon, 18 Feb 2008 13:34:57 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=803</guid>
<description><![CDATA[जीज़स से पूछेंगे तुमको बनाया कैसे
कम्प]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">जीज़स से पूछेंगे तुमको बनाया कैसे<br />
कम्प्यूटर से रचा या बनाया हाथ से<br />
कुछ न कुछ बात तो सभी में थी<br />
पर हसीना तेरी कुछ और ही बात है</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ुदाया यह कितना हसीन इत्तिफ़ाक़ है<br />
तेरे जैसी ख़ूब-रू हसीना मेरे साथ है<br />
गोरा-गोरा रंग तेरा क़ातिल हैं निगाहें<br />
जबसे देखा तुझे चाहा थामूँ तेरी बाँहें</font></p>
<p><font color="#000000">जीज़स से पूछेंगे तुमको बनाया कैसे<br />
कम्प्यूटर से रचा या बनाया हाथ से</font></p>
<p><font color="#000000">रूप तुम्हारा ऐसा हम फ़िदा हो गये<br />
जबसे देखा तुम्हें हम दिलरुबा खो गये<br />
सुर्ख़-गीले होंठ तेरे, जैसे गुलाब खिले<br />
दिल गया मेरा काम से तुम ऐसे मिले</font></p>
<p><font color="#000000">जीज़स से पूछेंगे तुमको बनाया कैसे<br />
कम्प्यूटर से रचा या बनाया हाथ से</font></p>
<p><font color="#000000">सुन नौ-जवाँ प्यार का इश्क़ नाम है<br />
डूबें तुझमें हमें और क्या काम है<br />
ख़ुदा ने नवाज़ा तुझे बेपनाह हुस्न से<br />
कैसे न हम तेरा हर पल दीदार करें</font></p>
<p><font color="#000000">जीज़स से पूछेंगे तुमको बनाया कैसे<br />
कम्प्यूटर से रचा या बनाया हाथ से</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मैं खु़द को दो बाँहों में भरकर]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/15/%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%96%e0%a5%81%e0%a4%bc%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%a6%e0%a5%8b-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%81%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ad/</link>
<pubDate>Sat, 15 Sep 2007 13:46:32 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/15/%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%96%e0%a5%81%e0%a4%bc%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%a6%e0%a5%8b-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%81%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ad/</guid>
<description><![CDATA[तुम्हें देखता हूँ तो
तुम्हारी मासूम ह]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">तुम्हें देखता हूँ तो<br />
तुम्हारी मासूम हँसी से यूँ लगता है कि<br />
तुम मुझे चाहती हो<br />
इन चंद लम्हों में मुझे<br />
यह महसूस होता है शायद<br />
तुम मेरे लिए बनी हो</font></p>
<p><font color="#000000">तुम्हारे रूप का जादू मुझे<br />
तुम्हारी तरफ़ खींचने लगता है<br />
दुनिया थम-सी जाती है<br />
मन बहकने लगता है<br />
जिस्म की सौंधी मिट्टी महक उठती है<br />
तुम्हारी खु़श्बू के साथ...</font></p>
<p><font color="#000000">तुम्हारी अदा तुम्हारा तस्व्वुर<br />
मेरे मन से जाता ही नहीं<br />
मैं खु़द को दो बाँहों में भरकर<br />
बैठा रहता हूँ देर तलक<br />
तुम्हारी याद दिल में पाज़ेब छमकाती रहती है...</font></p>
<p><font color="#000000">तुम्हारा नाम चाँदनी है ना!<br />
मुझे अपनी बाँहों में भर लो तुम<br />
यह उदासी के अँधेरे छँटते नहीं अब...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>

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