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	<title>विविध &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/विविध/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "विविध"</description>
	<pubDate>Sun, 12 Oct 2008 11:25:14 +0000</pubDate>

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<title><![CDATA[विविध कार्य-साधक अम्बिका मन्त्र]]></title>
<link>http://shabarmantra.wordpress.com/?p=115</link>
<pubDate>Sat, 04 Oct 2008 09:37:22 +0000</pubDate>
<dc:creator>aspundir</dc:creator>
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<description><![CDATA[विविध कार्य-साधक अम्बिका मन्त्र
ॐ आठ-भ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>विविध कार्य-साधक अम्बिका मन्त्र</p>
<p>ॐ आठ-भुजी अम्बिका, एक नाम ओंकार।<br />
खट्-दर्शन त्रिभुवन में, पाँच पण्डवा सात दीप।<br />
चार खूँट नौ खण्ड में, चन्दा सूरज दो प्रमाण।<br />
हाथ जोड़ विनती करूँ, मम करो कल्याण।।<br />
नित्य 108 जप करके जो भी प्रार्थना की जायेगी, पूरी होगी। सिद्ध मन्त्र है, अलग से सिद्ध करना आवश्यक नहीं है। नित्य कुछ जप पर्याप्त है।<br />
8 1 6<br />
3 5 7<br />
4 9 2<br />
कुछ प्रयोग निम्नलिखित है -<br />
चुटकी में राख लेकर 3 बार अभिमन्त्रित करके मारने से लगी आग बुझ जायेगी, भूत-प्रेतादि दूर होंगे, बुखार उतर जायेगा, नजर आदि दूर होगी।<br />
शत्रुनाषार्थ- 1 नारियल, 2 नींबू, एक पाव गुड़, 1 पैसा भर सिंदूर, अगरबत्ती और नींबू बंध सके, इतना लाल कपड़ा। शनिवार को रात में कण्डे की आग जलाकर पूर्वाभिमुख बैठकर कण्डे की राख 1 चुटकी लेकर उस पर 1 बार मन्त्र पढकर शत्रु की दिशा में फेंके, ऐसा तीन बार करें। फिर कहे कि ‘‘मेरे अमुक शत्रु का नाश करो’’ और 1 नींबू काटकर आग पर निचोड़ें। फिर शेष बचा नींबू और सिन्दूर कपड़े में लपेट कर रात भर अपने सिरहाने रखे और सवेरे पहर 3-4 बजे उसे शत्रु के घर में फेंक दे या किसी से फिंकवा दें। नारियल, अगरबत्ती और गुड़ किसी देवी मन्दिर में चढ़ा दें। प्रसाद स्वयं न खाए। शत्रु का नाश होगा।</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मेने अपनी बंदी {Girlfriends} से मजे लिए]]></title>
<link>http://ramsewak.wordpress.com/?p=25</link>
<pubDate>Sun, 22 Jun 2008 11:47:09 +0000</pubDate>
<dc:creator>ramsewak</dc:creator>
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<description><![CDATA[में कई दिनों से सोच रहा था की में अपनी ब]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<h3>में कई दिनों से सोच रहा था की में अपनी बंदी से मजे लूँ<br />
मगर केसे लूँ इसका तरीका समझ नही आ रहा था</h3>
<h3>~~~~~~~~~~~~~~~~~</h3>
<h3>तब मेने अपने दोस्त को बताया की मुझे एसा करना हैं<br />
थो उसने मुझे राय दी की तूं कही उसे घुमाने ले जा<br />
तो मेने सोचा की यह सही हैं और मेने एसा ही किया!!<br />
और में उसे ग्रीन परक  ले गया और मेने वही किया जो करना चाहिए था आप तो समझ ही गए होंगे!!</h3>
<p>~~~~~~~~~~~~~~~~~~</p>
<h3><span style="color:#00ced1;">आपकी  राय में मेने जो किया वह ठीक था</span> <span style="color:#00fa9a;">या मुझे एसा नही कर</span><span style="color:#00ffff;">ना चाहिए था अपनी राय दे???</span></h3>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मेरा दूसरा प्यार]]></title>
<link>http://ramsewak.wordpress.com/?p=24</link>
<pubDate>Mon, 16 Jun 2008 02:31:47 +0000</pubDate>
<dc:creator>ramsewak</dc:creator>
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<description><![CDATA[

मेरे पहले प्यार की खत्म होने की बात मे]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<div class="content">
<div class="snap_preview">
<h3>मेरे पहले प्यार की खत्म होने की बात मेरा दूसरा प्यार सुरु हो गया हैं</h3>
<h3>इसमे में पहले की तरह गलती नही करना चाहता क्योकि  ये प्यार मेरे को बहुत मुश्किल से मिला हैं</h3>
<p>~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~</p>
<h3>और यह प्यार बहुत अच्छा हैं में इस प्यार से बहुत<br />
खुस हूँ आप मेरे प्यार के बारे में कुछ कहना चाहते हैं ??</h3>
</div>
</div>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मैंने तुमको देखा]]></title>
<link>http://ramsewak.wordpress.com/?p=23</link>
<pubDate>Sun, 08 Jun 2008 03:33:16 +0000</pubDate>
<dc:creator>ramsewak</dc:creator>
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<description><![CDATA[जब मैंने तुमको देखा में आपका दीवाना हो]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<h3>जब मैंने तुमको देखा में आपका दीवाना हो गया<br />
मुझे लगा में आपसे एक दिन जरुर प्यार की बात<br />
करूँगा और आप मुझे मन नही करोगे</h3>
<h3>में सोच रहा था की आपसे प्यार का इजहार केसे करू</h3>
<h3>~~~~~~~~~~~~~</h3>
<h3>क्या पता आप मुझे मन कर दो ये में नही चाहता की आप मेरा दिल थोडो??</h3>
<h3>~~~~~~~~~~~~~</p>
<p>में आपसे प्यार की बात केसे करू में आपसे इसके बरे में जानना चाहता हूँ करपा मेरे प्यार की बारे में कुछ बताये</h3>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[प्यार प्यार बस प्यार ]]></title>
<link>http://ramsewak.wordpress.com/?p=21</link>
<pubDate>Sun, 04 May 2008 02:35:10 +0000</pubDate>
<dc:creator>ramsewak</dc:creator>
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<description><![CDATA[
लड़का लड़की का प्यार बहुत समय से चला आ ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<h3>
लड़का लड़की का प्यार बहुत समय से चला आ रहा हैं यह प्यार हमारे देश की शान हैं क्योकी प्यार से बढ़ कर कुछ भी नही मन जाता इसलिए प्यार से कभी भी  नही डरना चाहिए प्यार तो हर उमर में हो सकता हैं वो चाहे जवानी हो या बुढापा इसलिए प्यार ही सब कुछ हैं</h3>
<h3>~~~~~~~~~~~~</h3>
<h3>ये न हो तो कुछ भी नही सब बेकार हैं</h3>
<h3>~~~~~~~~~~~~</h3>
<h3>
और भगवान ने भी प्यार को सर्व पर्थ्म मन हैं इसलिए मेरी राय से सबको प्यार करना चाहिए</h3>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मेरा प्यार खत्म हो जाएगा ]]></title>
<link>http://ramsewak.wordpress.com/?p=20</link>
<pubDate>Sun, 04 May 2008 02:27:08 +0000</pubDate>
<dc:creator>ramsewak</dc:creator>
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<description><![CDATA[मेने बहुत सोचा और अब जन की मेरा प्यार क]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<h3>मेने बहुत सोचा और अब जन की मेरा प्यार कहातम होने वाला हैं कोयिकी मेने अपने प्यार का सही से इस्तेमाल नही किया और इसका नतीजा यह निकला की</h3>
<h3>मेरा प्यार अब मेरे से दूर जा रहा हैं</h3>
<h3>अब में उसे रोक भी नही सकता</h3>
<h3>आप ही बताओ में अब क्या करू मुझे आपकी राय लिखो</h3>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[लव और ई लव यू का मतलब]]></title>
<link>http://ramsewak.wordpress.com/?p=17</link>
<pubDate>Thu, 13 Mar 2008 15:19:43 +0000</pubDate>
<dc:creator>ramsewak</dc:creator>
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<description><![CDATA[लव तो आई लव यू के बात आता हैं क्योकी पहल]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<h3>लव तो आई लव यू के बात आता हैं क्योकी पहले लड़का लड़की से आई लव यू कहता हे और फिर वह लड़की सी प्यार करता है</p>
<p>मगर आई लव यू तो लड़का जब कहता हैं जब वह लड़की को पटाता हैं उसके बात वह वह उससे सच्चा लव करता हैं</h3>
<h3>**************</h3>
<h3><font color="#ff00ff">राम सेवक की तो यह राय हैं आपकी राय से <font color="#00fa9a"><font color="#00bfff">लव और आई लव यू का मतलब क्या हैं अपनी राय दें </font><br />
</font></font></h3>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[और तुम्‍हारी नस्‍ल क्‍या है गोरो ?]]></title>
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<pubDate>Tue, 08 Jan 2008 17:20:53 +0000</pubDate>
<dc:creator>Sanjay</dc:creator>
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<description><![CDATA[इंसान की नस्‍लों में भेदभाव का चलन क्‍]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p class="MsoNormal"><span style="font-size:9pt;font-family:Mangal;">इंसान की नस्‍लों में भेदभाव का चलन क्‍यों शुरू हुआ और कैसे शुरू हुआ यह तो मैं नहीं बता सकता क्‍योंकि मैं इस क्षेत्र का विशेषज्ञ नहीं हूं. लेकिन मैं यह देख सकता हूं कि हरभजन सिंह पर नस्‍लभेदी टिप्‍पणी करने का आरोप लगाकर प्रतिबंध का दंड देने में रंगभेद जरूर है. ध्‍यान दें मैने नस्‍लभेद नहीं रंगभेद कहा है. ये दोनों अलग अलग शब्‍द हैं तथापि दोनों का आशय किसी न किसी प्रकार के भेदभाव से है. <!--more--></span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:9pt;font-family:Mangal;">भारतीय होने के कारण रंगभेद का शिकार हमें सदियों पहले से बनाया जाता रहा है. मोहनदास करमचंद गांधी से लेकर शिल्‍पा शेट्टी तक यह सिलसिला बदस्‍तूर जारी है. हरभजन तो इसके एक और शिकार मात्र हैं. आप पूछ सकते हैं कि हरभजन पर तो आरोप है फिर वे शिकार कैसे हुए</span><span style="font-size:9pt;">?</span><span style="font-size:9pt;font-family:Mangal;"> जवाब यह है कि उन पर लगाया आरोप साबित नहीं होने के बावजूद दंडित किया जाना उनके साथ अन्‍याय था. इसलिए वे भेदभाव के आरोपी नहीं खुद इसके शिकार हैं.</span></p>
<p class="MsoNormal"> </p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:9pt;font-family:Mangal;">हरभजन को इसलिए दंडित किया गया क्‍योंकि उनके खिलाफ गोरी चमड़ी वाले कुछ ऐसे लोगों ने गवाही दी, जो खुद से लाख दर्जे ऊपर सचिन तेंदुलकर की गवाही से महत्‍वपूर्ण मानी गई. सचिन की गवाही भी इसीलिए नहीं मानी गई क्‍योंकि वे गोरी चमड़ी वाले नहीं हैं. यानि माइक प्रॉक्‍टर हो या माइक डेनिस (दक्षिण अफ्रीका दौरा) भारतीय कभी न कभी इन गोरों के शिकार बनते रहे हैं.</span></p>
<p class="MsoNormal"> </p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:9pt;font-family:Mangal;">अपने आप को सर्वश्रेष्‍ठ साबित करने के लिए ऑस्‍ट्रेलियाई कप्‍तान की रची इस साजिश में वह सचमुच कर बंदरनुमा इंसान एंड्रयू सायमंड्स मोहरा बना. यह वही सायमंड्स है जो भारत में बड़ी डींग हांक कर गया था कि मैं सिर्फ खेल से मतलब रखता हूं और बात ठीक भी है. यह भी एक खेल ही था जो ब जरिये हरभजन भारतीय क्रिकेट टीम के साथ खेला गया.</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:9pt;font-family:Mangal;">पीटर रोबक जैसा समीक्षक ऑस्‍ट्रेलियाई टीम की थू-थू कर रहा है, तो समझा जा सकता है कि इन गोरों ने क्‍या किया. खेलों को हमेशा से भाईचारे और सद्भाव का संदेश सारी दुनिया में फैलाने का सबसे सशक्‍त माध्‍यम माना जाता रहा है. लेकिन ऑस्‍ट्रेलियाई टीम ने जो कुछ किया उससे न केवल खेल बल्कि सारी खेल बिरादरी शर्मसार हो रही है. </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:9pt;font-family:Mangal;">भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को इस मामले में कड़ा रवैया बरकरार रखना होगा वरना यह भेदभाव का सिलसिला रुकने वाला नहीं है. यह केवल खेल की बात नहीं है. टीम भारत का प्रतिनिधित्‍व कर रही है इसलिए खिलाडियों का अपमान भारत का भी अपमान है. यदि बीसीसीआई की नजर में इसकी भी अहमियत नहीं है तो लानत है उन पर. यदि हरभजन को निर्दोष नहीं माना जाता तो भारत को दौरा समाप्‍त कर देना चा‍हिए. </span></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[पुलिस ने एक ब्‍लॉगर को जेल में डाला ]]></title>
<link>http://sanjayuvach.wordpress.com/2008/01/05/%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%b8-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e2%80%8d%e0%a4%b2%e0%a5%89%e0%a4%97%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%b2/</link>
<pubDate>Sat, 05 Jan 2008 10:31:08 +0000</pubDate>
<dc:creator>Sanjay</dc:creator>
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<description><![CDATA[ब्‍लॉगर्स के लिए यह बुरी खबर है. सउदी अ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>ब्‍लॉगर्स के लिए यह बुरी खबर है. सउदी अरब के सबसे लोकप्रय ब्‍लॉग के लेखक फुआद अल फरहान को वहां की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया क्‍योंकि उन्‍होंने राजनीतिक भ्रष्‍टाचार के खिलाफ अपने ब्‍लॉग पर आवाज उठाई. सउदी अरब में काफी लोग अंग्रेजी और अरबी में ब्‍लॉग लिखते हैं लेकिन पुलिस के ऐसे हस्‍तक्षेप का यह पहला मामला है. कुवैत, बहरीन और मिस्र जैसे देशों से ब्‍लॉगर्स को उत्‍पीडि़त किए जाने के समाचार आते रहते हैं. अब सउदी अरब में भी यह शुरू हो गया है.<!--more--></p>
<p>एक सीधे नजरिए से देखें तो ऐसी घटनाएं अभिव्‍यक्ति की स्‍वतंत्रता के हनन का मामला दिखती है और हम कूद कर इसके खिलाफ भर्त्‍सना के स्‍वर उठाने लगते हैं. फरहान की गिरफ्तारी भी ऐसा ही मामला है और इसकी सभी निंदा कर रहे हैं. उन्‍हें करीब एक माह पहले पकड़ा गया था. बहरहाल क्‍या यह घटना सिर्फ निंदा किए जाने का विषय मात्र है? या इसके निहितार्थ कुछ और भी हैं.</p>
<p>मेरे ख्‍याल से इसका दूसरा पहलू यह है कि ब्‍लॉगिंग अब एक ऐसी ग्‍लोबल विधा बन गई है कि इसको नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. एक ब्‍लॉगर को अपने विचारों की अभिव्‍यक्ति के लिए जेल में बंद किया जाना इस बात का प्रमाण है कि ब्‍लॉग को लोग गंभीरता से लेते हैं. सउदी अरब की सरकार को फरहान के लेखन से कुछ नुकसान होने का अंदेशा था इसीलिए उन्‍हें गिरफ्तार किया गया. हालांकि यह अलग बात है कि इससे फरहान की आवाज को दबाया नहीं जा सका क्‍योंकि उनकी गिरफ्तारी से उन लोगों का ध्‍यान भी फरहान के ब्‍लॉग की ओर चला गया जो उसे नहीं पढ़ रहे थे.</p>
<p>वैचारिक अभिव्‍यक्ति का हनन करने के लिए दमन का रास्‍ता बहुत पहले से अपनाया जाता रहा है. आज भी सरकारें मीडिया को गाहे ब गाहे इस दमनवादी मानसिकता की झलक दिखलाती रहती हैं. पाकिस्‍तान में पिछले दिनों यही किया गया. लेकिन ब्‍लॉगर्स के साथ ऐसा आमतौर पर नहीं होता था. यह नई परंपरा की शुरूआत है और इससे ब्‍लॉगिंग को मजबूती ही मिलेगी.</p>
<p>भारत में भी प्रकारांतर से यह चलता रहता है. हालांकि हमारे यहां ब्‍लॉगर्स को इस तरह जेल नहीं भेजा जाता वरना हर दिन आधे से ज्‍यादा चिट्ठाकार जेल में होते. बहरहाल फरहान की गिरफ्तारी का मामला केवल निंदा करने का विषय नहीं है. इससे प्रमाणित हो गया है कि ब्‍लॉग एक ग्‍लोबल वायस बन चुका है. ब्‍‍लॉगर्स को अपनी इस ताकत का सही दिशा में और सकारात्‍मक इस्‍तेमाल करना चाहिए.</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[आज के समय भगत सिंह ]]></title>
<link>http://samsaamayik.wordpress.com/2007/12/09/%e0%a4%86%e0%a4%9c-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%af-%e0%a4%ad%e0%a4%97%e0%a4%a4-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%b9/</link>
<pubDate>Sun, 09 Dec 2007 18:45:21 +0000</pubDate>
<dc:creator>indianrebel</dc:creator>
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<description><![CDATA[आख़िर आज मैंने भी ब्लॉग की दुनिया से अ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>आख़िर आज मैंने भी ब्लॉग की दुनिया से अपना नाता जोड़ लिया. इसका सारा श्रेय मेरे मित्र अनुपम  को जाता हैं जिसने मुझे हिन्दी में यह ब्लॉग लिखने के लिए प्रेरित किया. अब देखता हूँ की मैं अपने इस प्रयास में कहाँ तक सफल हो पाता हूँ. अब मेरे सामने ये समस्या आई की अपनी प्रथम प्रविषटी के लिए किस विषय को चुनाव करूँ.  काफी मंथन के बाद मैंने निर्णय लिया कि क्यों न मैं सबसे पहले अपने आदर्श "शहीद भगत सिंह"  के बारे में लिखूं .</p>
<p>वैसे भी इस वर्ष हम भगत सिंह का जन्मशती वर्ष मना रहे हैं. लेकिन यह बात देख कर अत्यन्त निराशा हुई कि एक-दो कर्यकर्मो को छोड़ कर क्रांति का यह महानायक आज पूरी तरह विस्मर्त कर दिया गया हैं. वैसे भी सरकारी स्तर पर भारत कि तथाकथित लोकतात्रिंक सरकार का हमेशा भगत सिंह, सुभाष जैसे महानायाको से दूरी बनाये रखने का प्रयास  रहा हैं. यह बात और हैं कि ये  क्रांति के अगुआ हमेशा लोगो के दिलो में जिंदा रहे. वैसे भी स्वंत्रता आन्दोलन में एक मत (कांग्रेस) को ज्यादा महत्व मिला और जो सत्ता में होता हैं उसी का इतिहास ज्यादा गाया बजाया जाता हैं.  आज जरुरत इस बात पर मंथन करने की हैं कि क्या भगत सिंह के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने कि उनके समय में थे. आज भारत को आजाद हुए ६० वर्ष बीत चुके हैं लेकिन मुझे नही लगता कि आम आदमी कि दुश्वारिया कम हुई हैं. पहले अंग्रेज सत्ता में थे अब अपने ही लोग गद्दी पर काबिज होकर जनता का शोषण कर रहे हैं. आज भी पुलिस का वही आतंक हैं. प्रचलित व्यवस्था के विरुद्ध आवाज उठाने वाले को आतंकवादी घोषित करके मौत के घाट उतार दिया जाता हैं. धर्म के उन्माद में भाई भाई का गला काट रहा हैं और राजनितिक पार्टिया अंग्रेजो कि "फूट डालो राज करो " कि नीति का अनुसरण करते हुए अपना उल्लू सीधा कर रही हैं. कुछ भी तो नही बदला हैं. किसान मजदूर अब भी बेहाल हैं. अब साहूकार की जगह बैंक उन्हें कर्ज के मकड़जाल में फंसाकर उन्हें मौत को गले लगाने को विवश कर रहे हैं. सच तो यह हैं कि कुछ भी नही बदला हैं केवल ब्रिटिश राज के द्वारा सत्ता का हस्तांतरण कुछ प्रभावशाली लोगो के हाथ में हुआ हैं जो आगे भी उन्ही के मॉडल का अनुसरण करके उनके हितों कि पूर्ति कर  सके. भगत सिंह व्यवस्था में ऐसा बदलाव चाहते थे जहाँ आम आदमी की आवाज़ सुनी जा सके.  आज देश में पनपती सांप्रदायिक ताकतों की वजह से भगत सिंह बहुत प्रासंगिक हो गए हैं. आज अगर भगत सिंह होते तो सबसे पहले इन सांप्रदायिक और जातिवादी व्यवस्था को बढ़ावा देने वाले लोगों का विरोध करते. भगत सिंह ने एक लेख "मैं नास्तिक क्यों हूँ " को लिख कर धर्म और ईश्वर के बारे में अपना मत प्रगट किया. उन्होने लिखा हैं कि निरा विश्वास और अंधविश्वास ख़तरनाक होता  है. यह मस्तिष्क को मूढ़ और मनुष्य को प्रतिक्रियावादी बना देता है. जो मनुष्य यथार्थवादी होने का दावा करता है उसे समस्त प्राचीन विश्वासों को चुनौती देनी होगी. यदि वे तर्क का प्रहार न सह सके तो टुकड़े-टुकड़े होकर गिर पड़ेंगे. तब उस व्यक्ति का पहला काम होगा, तमाम पुराने विश्वासों को धराशायी करके नए दर्शन की स्थापना के लिए जगह साफ करना. इसके बाद सही कार्य शुरू होगा, जिसमें पुनर्निर्माण के लिए पुराने विश्वासों की कुछ बातों का प्रयोग किया जा सकता है.</p>
<p>आज भारत वर्ष में पूंजीवादी शक्तिया हावी हैं. इसकी वजह से अमीरी-गरीबी के बीच की खाई चौडी होती जा रही हैं. आम आदमी सरकार की तथाकथित उदारीकरण नीतियों के कारण आज विभ्रम की स्थिति में हैं. देश के होनहार युवक बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए टेक्नो कुली बन कर रह  गए हैं. किसान मजदूर की स्थिति अब पहले से भी बदतर हो गई हैं. अब वह इस चकाचोंध में ख़ुद को ठगा हुआ महसूस करता हैं. वैसे भी उदारीकरण नीतियों के कारण जिन तकनीकी दक्ष पेशेवर लोगो के पास धन आया हैं वह भी घूम फिरकर इन्  बहुराष्ट्रीय कंपनियों की जेब में जा रहा हैं क्योंकि ये कंपनिया मासिक किस्तों में भुगतान आदि का मकड़जाल बुनकर आज के  इस  नव्धनादय वर्ग  को अपने उत्पाद खरीदने के लिए विवश कर देती हैं. भगत सिंह पहले ऐसे भारतीय क्रांतिकारी थे जिन्होंने तर्क दिया था कि साम्राज्यवाद, उपनिवेशवाद एक पूरी व्यवस्था है. इनकी यह सोच बनने का सबसे बड़ा कारण रूस की क्रांति और समाजवादी विचार धारा थी . उन्होंने साम्राज्यवाद और उपनिवेशवाद को ख़त्म करने की बात कही थी. मार्क्सवाद पर आधारित लेख- लेटर टू यंग पॉलिटिकल वर्कर्स में उन्होंने युवाओं को संबोधित किया था. उन्होंने आधुनिक-वैज्ञानिक समाजवाद की बात की थी.</p>
<p>शहीद भगत सिंह ने कहा था कि हम नौजवान हैं और अपनी जबावदेही जानते हैं. लेकिन जब हमारे देश को आज भगत सिंह की इतनी जरूरत है तो हम क्यों न भगत सिह के सपनों को साकार करने की ईमानदार कोशिश करें. हम सभी भारतवासी बखूबी जानते है कि हमारे नेता सिर्फ़ कहने में यकीन करते हैं करने मे नहीं. भगत सिंह जैसा कोई नहीं बन सकता. लेकिन हम नौजवान पीढ़ी उनको अपना गुरु मानकर भारत की दिशा बदल सकते हैं. आज भगत  सिंह के विचारों की प्रासंगिकता पहले से भी ज़्यादा है.</p>
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<title><![CDATA[हार्दिक स्वागत है आपका]]></title>
<link>http://samsaamayik.wordpress.com/2007/12/09/%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a4%a4-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%86%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a4%be/</link>
<pubDate>Sun, 09 Dec 2007 08:04:19 +0000</pubDate>
<dc:creator>indianrebel</dc:creator>
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<description><![CDATA[प्रिय पाठकगण,
Blog संसार में यह मेरा पहला ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>प्रिय पाठकगण,</p>
<p>Blog संसार में यह मेरा पहला प्रयास है. मेरी कोशिश रहेगी कि मैं यहाँ पर वह विचार प्रस्तुत करूं जो अपने चारों तरफ़ के समाज को देखकर अनायास ही मेरे मॅन को सुख देते हैं या व्यथित करते हैं. आपका सहयोग, सुझाव एवं आलोचनाएं सदा ही सादर आमंत्रित हैं.</p>
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<title><![CDATA[ढेरों कैम्प, ढेरों रूहें और बर्बरीक]]></title>
<link>http://halchal.wordpress.com/2007/06/18/%e0%a4%a2%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%aa-%e0%a4%a2%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%b0%e0%a5%82%e0%a4%b9%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%94/</link>
<pubDate>Mon, 18 Jun 2007 01:35:00 +0000</pubDate>
<dc:creator>halchal</dc:creator>
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<description><![CDATA[बर्बरीक फिर मौजूद था. वह नहीं, केवल उसक]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="font-family:Mangal;">बर्बरीक फिर मौजूद था. वह नहीं, केवल उसका सिर. सिर एक पहाड़ी पर बैठा सामने के मैदान पर चौकस नजर रखे था. </span><span></span>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:Mangal;">ढेरों रूहों के शरणार्थी कैम्प, ढेरों रूहें/प्रेत/पिशाच, यातना/शोक/नैराश्य/वैराग्य/क्षोभ, मानवता के दमन और इंसानियत की ऊंचाइयों की पराकाष्ठा </span><span>–</span><span style="font-family:Mangal;"> सब का </span><span style="font-family:Mangal;">स्थान और समय के विस्तार में </span><span style="font-family:Mangal;">बहुत बड़ा कैनवास सामने था. </span><span style="font-family:Mangal;"> </span><span style="font-family:Mangal;">हर धर्म-जाति-वर्ग; आदिमानव से लेकर आज तक के आतंकवादी और निरीह मानवों की रूहों का प्रतिनिधित्व था उस मैदान में. </span><span style="font-family:Mangal;">बर्बरीक सब देख रहा था </span><span>–</span><span style="font-family:Mangal;"> जैसे उसने महाभारत को देखा था.</span><span style="font-family:Mangal;"> </span><span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:Mangal;">बर्बरीक साक्षी था. बर्बरीक दृष्टा था </span><span>–</span><span style="font-family:Mangal;"> समय और स्थान के अनंत से अनंत तक के विस्तार का. वह सत्य बता सकता था कि क्या हुआ और क्या हो रहा है. पर सब अपने में मशगूल थे. मायें बच्चों से मिल रही थीं. आतंकी रूहें अट्टहास करती घूम रही थीं. काइंया नेताओं के प्रेत शकुनि</span><span style="font-family:Mangal;"> की तरह चालें सोच रहे थे. पर वहां किसी की कुटिलता से किसी और को फर्क नहीं पड़ रहा था </span><span>–</span><span style="font-family:Mangal;"> वे सब रूहें जो थीं.</span></p>
<blockquote><p class="MsoNormal"><span style="font-weight:bold;">Barbareek is a mythological character in Mahabharata.</span> He was the son of Ghatotkacha and grandson of Bhima. He wanted to participate in Mahabharata from the weaker side. <a href="http://bp3.blogger.com/_gonR097kmxE/RnUtK6R5QuI/AAAAAAAAAiY/mITSbr6Voxk/s1600-h/shyamji2.jpg"><img style="float:right;cursor:pointer;margin:0 0 10px 10px;" src="http://bp3.blogger.com/_gonR097kmxE/RnUtK6R5QuI/AAAAAAAAAiY/mITSbr6Voxk/s320/shyamji2.jpg" alt="" border="0" /></a>Lord Krishna sensing that he was too powerful, removed him from the fight tactfully. He asked Barbareek  his head in charity. Barbareek complied. </p>
<p class="MsoNormal">Krishna was pleased with the sacrifice and blessed him so that he could watch the whole battle from the hillock, where his head was placed.</p>
<p class="MsoNormal">The Talking Head (Barbareek) is a symbol for a less confined, more global perspective. All of us see the world, wars and annihilation limited by our prejudices, our experiences and expectations.  And when Barbareek voices his opinions, we see it quite differently. <span style="font-weight:bold;">When he speaks, we realize the Pandavas and Kauravas are tiny elements of a God’s greater canvas. The Mahabharata is not just about one kingdom, it is about cosmic order…</span></p>
</blockquote>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:Mangal;"></span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:Mangal;">अच्छी और बुरी रूहें अलग अलग मशगूल थीं पर एक जगह उनमें वार्तालाप हो ही गया. बोस्निया की एक मां और चेचेन्या के एक आतंकी में दुआ-सलाम हो गयी. दोनो में एक सूत्र तो मिला कि दोने एक ही इलाके के थे. दोनो में बात चली कि कौन जीता इस हत्या और बर्बरता के खेल में. पास ही एक भारतीय भी खड़ा था. महाभारत काल का प्रेत. उसे अभी तक मुक्ति न मिल पायी थी. दोनो को सुन कर बोला </span><span>–</span><span style="font-family:Mangal;"> </span><span style="font-weight:bold;">“</span><span style="font-weight:bold;font-family:Mangal;">कौन जीता? यह तो बर्बरीक ही बता सकता है.</span><span style="font-weight:bold;"> </span><span style="font-weight:bold;font-family:Mangal;">वह तो मेरे जमाने से दृष्टा रहा है सभी युद्धों, आतंकों, हत्याओं और त्रासदियों का. उसी से पूछो.</span><span><span style="font-weight:bold;">”</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:Mangal;">बोस्निया की मां और चेचेन्या का आतंकी बर्बरीक के पास गये. सवाल किया. दोनो को देख बर्बरीक का सिर हंसा </span><span>–</span><span style="font-family:Mangal;"> वैसे ही जैसे महाभारत काल में हंसा था. फिर बोला </span><span>–</span><span style="font-family:Mangal;"> </span><span style="font-weight:bold;">“</span><span style="font-weight:bold;font-family:Mangal;">एक ही छाया थी, हर जगह. इस ओर भी; उस ओर भी. जो मार रही थी और मर रही थी. वही तलवार बन रही थी और वही ढ़ाल भी बना रही थी. वही बच्चे को दूध पिलाने को आतुर थी और वही कोख फाड़ कर अजन्मे के दो टुकड़े भी कर रही थी.</span><span style="font-weight:bold;">”</span><span style="font-family:Mangal;"></span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:Mangal;">फिर कुछ रुक कर बर्बरीक ने कहा </span><span>–</span><span style="font-weight:bold;font-family:Mangal;"> </span><span style="font-weight:bold;">“</span><span style="font-weight:bold;font-family:Mangal;">जीतने और हारने का कोई मतलब ही नहीं है. वही एक छाया है जो हार भी रही है, जीत भी रही है और हार-जीत के परे भी है.</span><span style="font-weight:bold;">”</span></p>
<p class="MsoNormal">बर्बरीक ने दोनो को इस प्रकार देखा मानो कह रहा हो यह समझने के लिये उसकी तरह लम्बे समय तक देखते रहना पड़ता है.<br /><span style="font-family:Mangal;"> </span><span></span></p>
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