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	<title>श्रीसैलम &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/श्रीसैलम/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "श्रीसैलम"</description>
	<pubDate>Sun, 06 Jul 2008 16:41:29 +0000</pubDate>

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<title><![CDATA[श्रीसैलम यात्रा]]></title>
<link>http://saptrang.wordpress.com/?p=217</link>
<pubDate>Thu, 10 Apr 2008 10:37:44 +0000</pubDate>
<dc:creator>Nitin Bagla</dc:creator>
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<description><![CDATA[हैदराबाद आये दो साल पूरे होने को आये प]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>हैदराबाद आये दो साल पूरे होने को आये पर आंध्रप्रदेश की कोई जगह देखने का मौका नही मिला था अब तक, सिवाय विशाखापट्टम के जहां किस्मत से २००६ में एक दोपहर बिताने का मौका मिला था। हैदराबाद को नही गिन रहा हूं यहां। २-३ बार कार्यक्रम बनाने की सोंची...पर सोंचते ही रहे गये। वो कार्यक्रम किसी नई पोस्ट के विचार की तरह अथवा ड्राफ्ट पोस्ट्स की तरह दिल अन्दर ही दबे रह गये, पब्लिश नही हो पाये। सो इस हफ्ते जब सोमवार को तेलगु नववर्ष (उगाधी) होने की वजह से शनि-रवि-सोम, ३ तीन की लगातार छुट्टी हुई और काम का बोझ भी कम था तो फिर सोंचा कि इस बार तो कहीं जाकर आया ही जाये। पहला दिन पूरा होते होते लग रहा था कि ये छुट्टियां भी अन्य छुट्टियों की तरह ना बीत जायें। लेकिन शाम होते होते मित्र रामा की सक्रियता के चलते लगा कि इस बार तो कहीं जाने का कार्यक्रम बन ही जायेगा।</p>
<p>२ दिन अभी भी बाकी थे। रामा ने, जो बेचारा छुट्टी के दिन भी आफिस में काम निपटा रहा था,शाम को फोन किया कि हम कल श्री सैलम चलेंगे,सुबह साढे पांच की <em>डीलक्स</em> बस के टिकट करवा लिये हैं। हम ने कहा अति उत्तम। लेकिन <em>२-४ सेंट्स</em> ..बोले तो अपनी सलाहे भी दे डालीं। यार गाडी किराये पर लेकर चलते हैं...मोटरसाइकिल से भी चल सकते हैं...रास्ता बडा अच्छा है ...गाडी होगी तो मजा आयेगा आदि आदि । रामा ने अपना रामबाण फेंका...तो फिर गाडी का इंतजाम तुम करो। मैने कहा..नही यार बस ही ठीक है..सस्ती,सुन्दर,टिकाऊ और आरामदायक :) ।</p>
<p>सुबह साढे पाँच बजे कोई बस/ट्रेन पकडे बरस बीत गये..पर इस दिन सुबह ४ बजे उठे...सवा पांच बजे बस अड्डे भी पहुँच गये और शुरू हुआ साढे पाँच की <em>डीलक्स </em>बस का इंतजार। ५.४०/ ५.४५ तक जब बस नही आई तो चिन्ता होने लगी कि हम कहीं गलत जगह,गलत बस का इंतजार तो नही कर रहे। पूंछताछ करने पर पता चला कि जिस बस का हम इंतजार कर रहे थे वो रात को आते समय कहीं फंस गई थी और आने वाली नही थी। उसकी सवारियों को दूसरी बस में बिठाया जा रहा था हालांकि इस आशय की कोई घोषणा करने की कोई जहमत नही उठाई जा रही थी। अब जिस बस में बिठाया जा रहा था वो किसी भी एंगल से <em>डीलक्स </em>नही थी। इसमें बैठकर पता चला कि यह बस तो अपने समय पर ही चलेगी। किसी तरह ६.३० बजे बस हिली और अपना सफर शुरू हुआ। एक घंटा लेट हम चलने के पहले ही हो चुके थे और बस को देखते हुए लग रहा था कि ६ घंटे से पहले तो यह किसी हालत में नही पहुँचायेगी। शुरुआत इतनी प्यारी हुई थी। आगे आगे देखना था होना था क्या।</p>
<p>इसके अलावा, चूंकि हडबडी में सारा कार्यक्रम बना था सो ना तो यह पता था कि वहां देखने के लिये क्या क्या है,रुकने की क्या व्यवस्था है, रास्ते में अगर देखने लायक कोई जगह है तो उसके लिये कहां उतरना है ...बोले तो कोई जानकारी नही थी। हालांकि इस तरह कही जाने का अपना अलग मजा है। आप झोला उठाइये और जिधर मन आये चल दीजिये। यह सोंचकर, कि जो होगा वो देखा जायेगा।</p>
<p>अब थोडा <a href="http://srisailam.co.in/" target="_blank">श्रीसैलम </a>के बारे में। हिन्दुस्तान में बारह <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Jyothirlingam" target="_blank">ज्योतिर्लिंग </a>हैं जिनमे से एक श्रीसैलम में है। शिवजी के स्वरूप को यहाँ श्री मल्लिकार्जुन स्वामी कहा जाता है।  साथ ही यहां <a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Shakti_Peethas" target="_blank">शक्तिपीठ </a>भी है जहाँ देवी भ्रमरंभा (Bhramaramba) की उपासना की जाती है। इस लिहाज से यह भारत का एक मात्र तीर्थ स्थल है जहाँ ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ एक ही स्थान पर है। काफी दूर दूर  से श्रृद्धालू यहां आते हैं जिनमें आंध्रप्रदेश, कर्नाटक और माहाराष्ट्र से आने वाले श्रृद्धालू प्रमुख हैं। यह स्थान करनूल जिले के नल्लामल्ला जंगलों के मध्य श्रीसैलम पहाडी पर बसा है। पास में कृष्णा नदी है जो जंगलों और पहाडों के बीच से होकर निकलती है और जिस पर श्रीसैलम के पास में ही एक बांध बनाया गया है। श्री सैलम हैदराबाद से सडक मार्ग से करीब २३२ किलोमीटर दूर है। करीब १२५ किलोमीटर का  रास्ता  साधारण है लेकिन एक बार आप पहाडी और जंगल का रास्ता शुरू होने के बाद रास्ता देखते ही बनता है। करीब ८०-१०० किलोमीटर का यह रास्ता अत्यंत सुन्दर है। बीच में सडक से थोडा अन्दर जाकर देखने के लिये कुछ जगहे हैं, मसल एक झरना और जंगल के बीच ट्रेकिंग का रास्ता लेकिन खुद का वाहन ना होने की वजह से इन सब जगहों पर रुकना और देखना संभव न हो सका। जाने का समय भी शायद बरसात और उसकी बाद का बेहतर होगा जब जंगल पूरे शबाब पर होता होगा। करीब ५० किलोमीटर पहले से बांध क्षेत्र शुरू हो जाता है और नजारों की नजाकत बढती जाती है। पहाडी के बीच से नदी निकल रही है और यहीं बांध बनाया हुआ है। बस पहाडी के एक तरफ से ढलान से नीचे उतरना शुरू होती है और जगह जगह पर मोड आते हैं जहां बांध आपसे आंख मिचौली करता रहता है। बस में होने के कारण सिर्फ खिडकी में से ही नजारे देख सके और फोटो लिये गये..अन्यथा थोडा समय बिताने के लिये अच्छी जगह है। पहाडी के एक तरफसे उतर कर एक छोटे (बांध की तुलना में छोटे) पुल को पार करके फिर पूरी घांटी चढनी होती है। इसके बाद श्रीसैलम ज्यादा दूर नही रह जाता।</p>
<p>खैर,हम किसी तरह १२:३० बजे के आसपास श्री सैलम पहुँचे। यहां पहुँच कर भीड का जो नजारा देखा, भगवान के दर्शन करने के लिये जो मशक्कत की और आसपास क्या क्या देखा...वो अगली पोस्ट में। आप तब तक रस्ते के फोटू सस्ते में देखिये।</p>
<p><a href="http://saptrang.files.wordpress.com/2008/04/krishna.jpg"><img class="alignnone size-medium wp-image-218" style="border:2px solid black;" src="http://saptrang.wordpress.com/files/2008/04/krishna.jpg?w=500" alt="कृष्णा नदी- पहाडी के ऊपर से। तस्वीर में लम्बी घुमावदार सडक देख सकते हैं। " width="414" height="310" /></a></p>
<p>नदी पर करने के बाद, पहाडी के ऊपर से कृष्णा नदी। सामने की तरफ लम्बी घुमावदार सडक देख सकते हैं।</p>
<p><a href="http://saptrang.files.wordpress.com/2008/04/krishna-bridge.jpg"><img class="alignnone size-medium wp-image-219" style="border:2px solid black;" src="http://saptrang.wordpress.com/files/2008/04/krishna-bridge.jpg?w=500" alt="बांध- कृष्णा पर बने पुल के ऊपर से" width="415" height="310" /></a></p>
<p>कृष्णा पर बने पुल से बांध का दृश्य। नदी के पेटे में लोग तो दिख ही रहे हैं बडी संख्या में चौपहिया वाहन भी खडे थे (फोटो में नही दिख रहे।)</p>
<p><em><br />
</em><strong>चलते चलते-</strong><em> *श्रीसैलम को अंग्रेजी में Sri Sailam लिखा जाता है। हिन्दी में नाम लिखा हुआ मैने केवल एक जगह देखा जहां श्रीशैलम लिखा हुआ था। लेकिन उच्चरण जो मैने आजतक लोगों से सुने हैं वो या तो स्रीसैलम सुना है या श्रीसैलम। मैं निश्चय नही कर पाया कि सही क्या है। अपन फिलहाल श्रीसैलम से काम चला रहे हैं।</em></p>
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