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	<title>सनम &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/सनम/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "सनम"</description>
	<pubDate>Fri, 29 Aug 2008 19:45:06 +0000</pubDate>

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<item>
<title><![CDATA[हमने तुमको तुमसे चुराया]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=999</link>
<pubDate>Thu, 19 Jun 2008 19:55:44 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=999</guid>
<description><![CDATA[हमने तुमको तुमसे चुराया
दिल में अपने त]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">हमने तुमको तुमसे चुराया<br />
दिल में अपने तुमको बसाया<br />
तुम भी दीवाने हो गये हो<br />
दूर जो ख़ुद से हो गये हो<br />
आओ अपनी बाँहों में तुमको छुपा लें सनम<br />
आओ अपनी बाँहों में तुमको छुपा लें सनम</span></p>
<p><span style="color:#000000;">क़रीब आ तेरा दिल धड़का दें<br />
दिल में कोई शोला भड़का दें<br />
तुमको दोनों बाँहों में भरकर<br />
सनम प्यार करना सिखा दें</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तुम यह दिल तो धड़का दो<br />
हमको प्यार तो सिखा दो<br />
पर वादा करके ओ जानम<br />
हमको छोड़ न जाना तुम...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">ज़रा करके तो देखो हमपे भरोसा<br />
मैं नहीं कर सकता तुमसे धोखा<br />
आओ अपनी बाँहों में तुमको छुपा लें सनम<br />
आओ अपनी बाँहों में तुमको छुपा लें सनम</span></p>
<p><span style="color:#000000;">दिल की ख़ाहिश तेरी ज़ुल्फ़ों में<br />
आज हम ख़ुद को उलझा दें<br />
तेरे गले लगके मेरे सनम<br />
आज तुमको अपना बना लें</span></p>
<p><span style="color:#000000;">ज़ुल्फ़ों में उलझ तो जाओगे<br />
मुझको अपना तो बनाओगे<br />
पर क्या हम मिल पायेंगे<br />
प्यार को सच कर पायेंगे...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">दिल से दिल जब मिल जाये<br />
यह प्यार भी सच हो जाये<br />
आओ अपनी बाँहों में तुमको छुपा लें सनम<br />
आओ अपनी बाँहों में तुमको छुपा लें सनम</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४ </p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तुमने हमसे हमको चुराया]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=989</link>
<pubDate>Sun, 15 Jun 2008 19:13:05 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=989</guid>
<description><![CDATA[तुमने हमसे हमको चुराया
दिल में अपने हम]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">तुमने हमसे हमको चुराया<br />
दिल में अपने हमको बसाया<br />
हम कुछ दीवाने हो गये हैं<br />
हाँ, दूर ख़ुद से हो गये हैं<br />
अपनी बाँहों में हमको छुपा लो सनम<br />
अपनी बाँहों में हमको छुपा लो सनम</span></p>
<p><span style="color:#000000;">यह उड़ते बादल घिर जायें<br />
बिजली ज़रा कड़क जाये<br />
तू मेरी बाँहों में आकर के<br />
मेरे सीने से सिमट जाये</span></p>
<p><span style="color:#000000;">यह बादल क्यूँ घिर आयें<br />
और बिजली क्यूँ गिर जाये<br />
हम तेरे ही तो हैं आख़िर<br />
आके ख़ुद ही लिपट जायें</span></p>
<p><span style="color:#000000;">यह सच भी सच कर दो<br />
दिल में है जो कुछ कर दो<br />
अपनी बाँहों में हमको छुपा लो सनम<br />
अपनी बाँहों में हमको छुपा लो सनम</span></p>
<p><span style="color:#000000;">क्यूँ इस तरह मुस्कुराती हो<br />
क्यूँ तुम मुझसे शरमाती हो<br />
क्यूँ एक झलक देकर कहीं<br />
आँखों से ओझल हो जाती हो</span></p>
<p><span style="color:#000000;">हम सामने जो आ जायें<br />
दिल बेक़ाबू न हो जाये<br />
इश्क़ में यह डर है हमको<br />
हमसे भूल न हो जाये...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">दिल को बेक़ाबू हो जाने दो<br />
यह भूल भी हो जाने दो<br />
अपनी बाँहों में हमको छुपा लो सनम<br />
अपनी बाँहों में हमको छुपा लो सनम</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४ </p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[आहिस्ता-आहिस्ता नज़दीकियाँ बढ़ने लगीं]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2008/04/03/aahistaa-aahistaa-nazadiikiyaan-badhhane-lagiin-2/</link>
<pubDate>Wed, 02 Apr 2008 20:43:24 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/2008/04/03/aahistaa-aahistaa-nazadiikiyaan-badhhane-lagiin-2/</guid>
<description><![CDATA[आहिस्ता-आहिस्ता नज़दीकियाँ बढ़ने लगीं]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">आहिस्ता-आहिस्ता नज़दीकियाँ बढ़ने लगीं<br />
आहिस्ता-आहिस्ता तुमसे राहें जुड़ने लगीं<br />
आहिस्ता-आहिस्ता तुमसे प्यार हो गया<br />
आहिस्ता-आहिस्ता दोनों निगाहें लड़ने लगीं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तुमसे कहना था संग तेरे जीना है मुझको<br />
प्यार को तुम्हारी आँखों से पीना है मुझको<br />
ज़िन्दगी क्या है तुमसे मिलके जाना मैंने<br />
सिवा तुम्हारे दिल के' चैन कहीं न है मुझको</span></p>
<p><span style="color:#000000;">वह पहली नज़र और वह दिलकश समाँ<br />
वह हुस्नो-अदा और वह मौसम ख़ुशनुमा<br />
बदला-बदला है सब कुछ आज भी यहाँ<br />
यह दिल, यह धड़कन, यह नीला आसमाँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तुमने दिल लेकर मेरा क्यों न अपना दिया<br />
हाँ मेरी ज़िन्दगी को इक नया सपना दिया<br />
तेरी चाहत सनम मेरी क़िस्मत बन गयी<br />
जो आशिक़ तुमने मुझको अपना बना दिया</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ गया]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=954</link>
<pubDate>Mon, 31 Mar 2008 11:45:52 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=954</guid>
<description><![CDATA[ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ ग]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ गया<br />
सरे-राह मैं अपनी मंज़िल पा गया<br />
चराग़ों का नूर हो, चश्मे-बद्दूर हो<br />
तुम्हें देखकर दिल अँधेरों से दूर आ गया</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ुशियों के दीप जल उठे, ग़म सारे बुझ गये<br />
पतझड़ उतरा, गुल शाख़-शाख़ खिल गये<br />
इक-इक धड़कन में नाम तुम्हारा है<br />
तुम्हारी मोहब्बत का जादू मुझपे छा गया</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ुशबू-ख़ुशबू मैंने तुमको पाया सनम<br />
मोहब्बत में तेरी ख़ुद को मिटाया सनम<br />
तेरी पहली नज़र से क़त्ल हुआ था मैं<br />
लहू के हर क़तरे में तेरा प्यार समा गया</font></p>
<p><font color="#000000">राज़ दिल के सभी आँखों से बयाँ कर दो<br />
राहे-मुहब्बत मेरी तुम आसाँ कर दो<br />
नहीं कोई अरमाँ तेरी चाहत के सिवा<br />
बस तेरा ही चेहरा दिलो-दिमाग़ पे छा गया</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[यह कैसा लम्हा है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=881</link>
<pubDate>Thu, 06 Mar 2008 10:28:36 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=881</guid>
<description><![CDATA[यह कैसा लम्हा है
यह कैसा एहसास है
तू पल]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">यह कैसा लम्हा है<br />
यह कैसा एहसास है<br />
तू पलकों में क़ैद है<br />
दिल के पास है</font></p>
<p><font color="#000000">क्या देखूँ तेरे सिवा<br />
क्या चाहूँ तेरे सिवा<br />
मेरे दर्दे-दिल की<br />
तू ही तो है दवा</font></p>
<p><font color="#000000">खिलते हुए लम्हे सब<br />
खिल गये हैं अब<br />
मैं तुझको महसूस करूँ<br />
साँस लूँ जब</font></p>
<p><font color="#000000">आज जो देखा तुझे<br />
याद आया मुझे<br />
लोग दीवाना क्यों<br />
कहते है मुझे</font></p>
<p><font color="#000000">जब निगाहों ने छुआ<br />
यह एहसास हुआ<br />
तूने भी मुझको सनम<br />
प्यार है किया</font></p>
<p><font color="#000000">दुनिया बदल गयी है<br />
तू मुझे मिल गयी है<br />
ज़िन्दगी मेरी इक हसीन<br />
शाम हो गयी है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तुमसे कुछ कहना है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=873</link>
<pubDate>Tue, 04 Mar 2008 03:23:03 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=873</guid>
<description><![CDATA[सुनो ज़रा दिल का तुमसे कुछ कहना है
तुम्]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">सुनो ज़रा दिल का तुमसे कुछ कहना है<br />
तुम्हारे जैसी लड़की से प्यार करना है<br />
हाँ कर दो, तुम मुझसे प्यार कर लो<br />
मेरा तो सिर्फ़ तुमसे जीना और मरना है</font></p>
<p><font color="#000000">तुम्हारी क़ातिल अदा पर दिल आ गया<br />
तुमसे पहली मुलाक़ात का नशा छा गया<br />
मुझे तुम्हारी नशेमन आँखों में बसना है<br />
तुमसे सनम अब और दूर नहीं रहना है</font></p>
<p><font color="#000000">सुनो ज़रा दिल का तुमसे कुछ कहना है<br />
तुम्हारे जैसी लड़की से प्यार करना है</font></p>
<p><font color="#000000">तुम्हारे होंठों की मै का हर क़तरा चाहिए<br />
तुम्हारे जिस्म का जलता शरारा चाहिए<br />
ऐ हसीना तुमको अपनी बाँहों में भरना है<br />
मुझे ज़माने से अब और नहीं डरना है</font></p>
<p><font color="#000000">हाँ कर दो, तुम मुझसे प्यार कर लो<br />
मेरा तो सिर्फ़ तुमसे जीना और मरना है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'<br />
लेखन वर्ष: ०५ जून २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मेरे दिल की पगडंडियों से गुज़र जा]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=857</link>
<pubDate>Wed, 27 Feb 2008 18:18:55 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=857</guid>
<description><![CDATA[मेरे दिल की पगडंडियों से गुज़र जा एक दफ़]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">मेरे दिल की पगडंडियों से गुज़र जा एक दफ़ा फिर<br />
मेरे जिस्मो-जाँ को जीवन दे जा ओ बेवफ़ा फिर</font></p>
<p><font color="#000000">इन राहों पर हल्के गुलाबी फूल खिलने लगे हैं<br />
बेज़ुबाँ दिल में मोहब्बत के अरमान जगने लगे हैं<br />
आ निगाहों में आ जा, कर दे धड़कनें रवाँ फिर<br />
मेरे दिल की पगडंडियों से गुज़र जा एक दफ़ा फिर</font></p>
<p><font color="#000000">उदासियाँ, तन्हाइयाँ, मुझसे शिकवे करने लगी हैं<br />
आँखों में, रोज़ ख़ाबों में, तेरी तस्वीरें बनने लगी हैं<br />
आ मेरे सनम कर दे धुँधली-धुँधली यादें जवाँ फिर<br />
मेरे दिल की पगडंडियों से गुज़र जा एक दफ़ा फिर</font></p>
<p><font color="#000000">यह प्यार मुझको दुनिया से गुमराह करने लगा है<br />
तेरा दीवाना हर चेहरे में तेरा चेहरा पढ़ने लगा है<br />
बता तू, मुझसे मिलेगी, कैसे, कब और कहाँ फिर<br />
मेरे दिल की पगडंडियों से गुज़र जा एक दफ़ा फिर</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: ०४ मई २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[वह मौसम इक बार ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=851</link>
<pubDate>Tue, 26 Feb 2008 17:24:01 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=851</guid>
<description><![CDATA[वह मौसम इक बार फिर सजा दे
प्यार करने की ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">वह मौसम इक बार फिर सजा दे<br />
प्यार करने की मुझको सज़ा दे<br />
दीवानों की तरह तुझको देखे जाऊँ<br />
हाथों की लकीरों में वह क़ज़ा दे</font></p>
<p><font color="#000000">अरमान पिघलकर ख़त्म न हो जायें<br />
दिल में साँसें दफ़्न न हो जायें<br />
अपने सीने से लगा ले मुझे<br />
दिल में अपने मुझको जगह दे</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी राहों पर निगाह है मेरी<br />
मेरे दिल में सिर्फ़ चाह है तेरी<br />
मेरे जीवन को अपनी चाहतों में डुबा दे<br />
मेरे सनम जीने की मुझको वजह दे</font></p>
<p><font color="#000000">वह मौसम इक बार फिर सजा दे<br />
प्यार करने की मुझको सज़ा दे...</font></p>
<p><font color="#000000">सूनी-सूनी आँखें रूख़ी-रूख़ी आँखें<br />
ख़ाली-ख़ाली है सीना ख़ुश्क़ हैं साँसें<br />
जुदा रहके जुदाई में जीना मुमकिन नहीं<br />
मेरे प्यार को अपने प्यार की फ़िज़ा दे</font></p>
<p><font color="#000000">दीवानों की तरह तुझको देखे जाऊँ<br />
हाथों की लकीरों में वह क़ज़ा दे...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: ३० अप्रैल २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[जो दिल से जाता नहीं है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=813</link>
<pubDate>Mon, 18 Feb 2008 19:42:20 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=813</guid>
<description><![CDATA[जो दिल से जाता नहीं है
तू वह गीत है
जो द]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">जो दिल से जाता नहीं है<br />
तू वह गीत है<br />
जो दिल में आकर बसा था<br />
तू वह मीत है</font></p>
<p><font color="#000000">साँसों की सरगम बस तुम ही तुम<br />
लफ़्ज़ों में जब हम बस तुम ही तुम</font></p>
<p><font color="#000000">कहना कितना मुश्किल था<br />
यह समझा न सके<br />
अपने दिल की बात हम<br />
तुम्हें बता न सके</font></p>
<p><font color="#000000">जो दिल से जाता नहीं है<br />
तू वह गीत है<br />
जो दिल में आकर बसा था<br />
तू वह मीत है</font></p>
<p><font color="#000000">प्यार क्या है सनम हमें कब पता था<br />
हमें जब तुम मिले तब पता चला था</font></p>
<p><font color="#000000">अकेले रहना मुमकिन नहीं<br />
यह कह न सके<br />
अपने दिल के जज़्बात हम<br />
तुम्हें जता न सके</font></p>
<p><font color="#000000">जो दिल से जाता नहीं है<br />
तू वह गीत है<br />
जो दिल में आकर बसा था<br />
तू वह मीत है</font></p>
<p><font color="#000000">अब तो ऐसा लगता है मुझको<br />
जैसे फूलों में ख़ुशबू नहीं है<br />
तुम जो नहीं यहाँ पर सनम<br />
जैसे यहाँ पर कुछ भी नहीं है</font></p>
<p><font color="#000000">बेचैन करती हैं यादें दिन-रात<br />
बुझती नहीं हैं साँसें<br />
हर लम्हा सोचता हूँ क्या मैं<br />
करूँ तो क्या करूँ</font></p>
<p><font color="#000000">जो दिल से जाता नहीं है<br />
तू वह गीत है<br />
जो दिल में आकर बसा था<br />
तू वह मीत है</font></p>
<p><font color="#000000">कुछ और अब बाक़ी नहीं<br />
बस मैं हूँ मेरा ख़ाब है<br />
ख़ामोश रहती हैं यह रातें<br />
बस मैं हूँ मेरा साथ है</font></p>
<p><font color="#000000">ज़िन्दगी मेरी तुम बदलकर चले गये<br />
तन्हा कर गये हमें तन्हा कर गये</font></p>
<p><font color="#000000">जो दिल से जाता नहीं है<br />
तू वह गीत है<br />
जो दिल में आकर बसा था<br />
तू वह मीत है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तेरी चुप निगाहें]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=806</link>
<pubDate>Mon, 18 Feb 2008 16:03:34 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=806</guid>
<description><![CDATA[तेरी चुप निगाहें व शर्मायी नज़रें
तेरे ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">तेरी चुप निगाहें व शर्मायी नज़रें<br />
तेरे प्यार का तोहफ़ा हैं, मेरे लिए<br />
एक बार तो कुछ कह दे सनम<br />
तू एक बार तो हाँ कर दे मुझसे<br />
ज़िन्दगी एक झमेला है मेरे लिए</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी मुस्कुराहटें तेरी सादी अदाएँ<br />
तेरे प्यार का तोहफ़ा हैं मेरे लिए<br />
परियों से भी कहीं ज़्यादा हसीं<br />
खिलती कलियों-सी तू माहजबीं<br />
ख़ुदा ने तुझे बनाया है मेरे लिए</font></p>
<p><font color="#000000">तेरे सारे शिकवे वह सभी यादें<br />
तेरे प्यार का तोहफ़ा हैं मेरे लिए<br />
मुझे तेरा इन्तिज़ार था बरसों से<br />
हम एक-दूजे के बने जनमों से<br />
तुमने जनम लिया है मेरे लिए</font></p>
<p><font color="#000000">आँखों में माहताब-सा चमकता है<br />
तेरा चेहरा, तेरा चेहरा, तेरा चेहरा<br />
मैं सहराँ-सहराँ भटकता हूँ तेरे लिए<br />
तू एक बार तो हाँ कर दे मुझसे<br />
ज़िन्दगी एक झमेला है मेरे लिए</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[रोते हैं सब से छिपकर ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=786</link>
<pubDate>Sat, 16 Feb 2008 05:15:13 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=786</guid>
<description><![CDATA[जब-जब सनम तेरी यादें आती हैं
कैसे कहें ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">जब-जब सनम तेरी यादें आती हैं<br />
कैसे कहें कितना तन्हा कर जाती हैं<br />
रोते हैं सब से छिपकर अँधेरों में<br />
ख़ुद से इतना रुसवा कर जाती हैं </font></p>
<p><font color="#000000">अँधेरी राहों-सा दिल सूना हो जाता है<br />
जब आँखों में तेरा सपना टूट जाता है<br />
ख़्यालों की राहों पर मुलाक़ातें होती हैं<br />
मिलते हैं जब पुरानी बातें होती हैं </font></p>
<p><font color="#000000">ख़्याल अरमानों की डोली सजाते हैं<br />
उठता है दिल में धड़कनों का तूफ़ान<br />
ख़ुशबू तेरी बहती है इन फ़िज़ाओं में<br />
ढूँढ़ता हूँ राहों में तेरे पैरों के निशान </font></p>
<p><font color="#000000">जब-जब सनम तेरी यादें आती हैं<br />
कैसे कहें कितना तन्हा कर जाती हैं<br />
रोते हैं सब से छिपकर अँधेरों में<br />
ख़ुद से इतना रुसवा कर जाती हैं </font></p>
<p><font color="#000000">हर आहट तेरा नामो-निशाँ देती है<br />
तू आज भी सखी मुझमें रहती है<br />
सितारों इन नज़ारों में तू दिखती है<br />
अँधेरों से उजालों से तू बनती है</font></p>
<p><font color="#000000">जब-जब सनम तेरी यादें आती हैं<br />
कैसे कहें कितना तन्हा कर जाती हैं<br />
रोते हैं सब से छिपकर अँधेरों में<br />
ख़ुद से इतना रुसवा कर जाती हैं</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[है दिल मेरा दीवाना तेरा]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=778</link>
<pubDate>Fri, 15 Feb 2008 06:26:33 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=778</guid>
<description><![CDATA[है दिल मेरा दीवाना तेरा
तू शमअ मेरी मै]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">है दिल मेरा दीवाना तेरा<br />
तू शमअ मेरी मैं परवाना तेरा<br />
झूमती हवाएँ नशीली फ़िज़ाएँ<br />
हाँ यह झूमती हवाएँ<br />
और यह नशीली फ़िज़ाएँ<br />
गीत गाकर यह कहती हैं<br />
है दिल मेरा दीवाना तेरा</font></p>
<p><font color="#000000">सच्ची है मोहब्बत मेरी<br />
तुम मुझे आज़माकर देख लो<br />
मंज़ूर हो अगर तुमको<br />
मेरे सनम हाँ बोल दो<br />
है दिल मेरा दीवाना तेरा<br />
तू शमअ मेरी मैं परवाना तेरा</font></p>
<p><font color="#000000">मौसम प्यार का आया है<br />
यह जादू तूने चलाया है<br />
मौसम प्यार का आया है<br />
यह जादू तूने चलाया है<br />
दिल के आसमाँ पर चाँद-सा<br />
चेहरा तेरा नज़र आया है</font></p>
<p><font color="#000000">है दिल मेरा दीवाना तेरा<br />
तू शमअ मेरी मैं परवाना तेरा<br />
झूमती हवाएँ नशीली फ़िज़ाएँ<br />
हाँ यह झूमती हवाएँ<br />
और यह नशीली फ़िज़ाएँ<br />
गीत गाकर यह कहती हैं<br />
है दिल मेरा दीवाना तेरा</font></p>
<p><font color="#000000">सच्ची है मोहब्बत मेरी<br />
तुम मुझे आज़माकर देख लो<br />
मंज़ूर हो अगर तुमको<br />
मेरे सनम हाँ बोल दो<br />
है दिल मेरा दीवाना तेरा<br />
तू शमअ मेरी मैं परवाना तेरा</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[कुछ-कुछ होता है सनम ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=754</link>
<pubDate>Tue, 12 Feb 2008 12:27:02 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=754</guid>
<description><![CDATA[कुछ-कुछ होता है सनम
जब-जब तुमसे मिलते ह]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">कुछ-कुछ होता है सनम<br />
जब-जब तुमसे मिलते हैं<br />
कैसे कहें हम सनम<br />
तुमसे मोहब्बत करते हैं...</font></p>
<p><font color="#000000">दिल डरता है लब सीं रखते हैं<br />
ख़ामोशी से आँखों को पढ़ते हैं<br />
हर आहट पर दिल धड़कता है<br />
यह तुमसे अकीदत करता है</font></p>
<p><font color="#000000">कुछ-कुछ होता है सनम<br />
जब-जब तुमसे मिलते हैं<br />
कैसे कहें हम सनम<br />
तुमसे मोहब्बत करते हैं...</font></p>
<p><font color="#000000">मेरे दिल में हज़ारों अरमान<br />
सुबह-शाम जलते-बुझते हैं<br />
कोई तूफ़ान दिल में उठता है<br />
तेरी जोत पर दिल जलता है</font></p>
<p><font color="#000000">कुछ-कुछ होता है सनम<br />
जब-जब तुमसे मिलते हैं<br />
कैसे कहें हम सनम<br />
तुमसे मोहब्बत करते हैं...</font></p>
<p><font color="#000000">तेरे ख़ाब दिल में रखते हैं<br />
मिलो तुम रब से दुआ करते हैं<br />
दिल यह ज़ुबाँ समझता है<br />
कहते नहीं तुम दिल सुनता है</font></p>
<p><font color="#000000">कुछ-कुछ होता है सनम<br />
जब-जब तुमसे मिलते हैं<br />
कैसे कहें हम सनम<br />
तुमसे मोहब्बत करते हैं...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[हम सनम जब भी तुमसे मिलते हैं]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=739</link>
<pubDate>Sun, 10 Feb 2008 03:56:31 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=739</guid>
<description><![CDATA[हम सनम जब भी तुमसे मिलते हैं
तेरे दिल क]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">हम सनम जब भी तुमसे मिलते हैं<br />
तेरे दिल की धड़कनों को सुनते हैं<br />
लेकिन कुछ समझ में नहीं आता है<br />
तुमको देखकर जाने क्या हो जाता है<br />
दिल धड़कता है, वक़्त थम जाता है</font></p>
<p><font color="#000000">तेरा हाथ जब मेरे हाथों में होता है<br />
दिल कुछ कहने को बेताब होता है<br />
लेकिन कुछ समझ में नहीं आता है<br />
कभी सोचता हूँ कह दूँ आइ लव यू<br />
फिर सोचता हूँ जवाब क्या देगी तू</font></p>
<p><font color="#000000">हम सनम जब भी तुमसे मिलते हैं<br />
तेरे दिल की धड़कनों को सुनते हैं<br />
लेकिन कुछ समझ में नहीं आता है<br />
तुमको देखकर जाने क्या हो जाता है<br />
दिल धड़कता है, वक़्त थम जाता है</font></p>
<p><font color="#000000">रोज़ रात जब चाँद निकलता है<br />
कहता है दिल उनसे मोहब्बत करता है<br />
हाँ, केवल तुमसे प्यार करता है<br />
मेरे दिल की दीवारों पर तेरा नाम है<br />
तुमसे ही रंग पाती मेरी हर शाम है</font></p>
<p><font color="#000000">हम सनम जब भी तुमसे मिलते हैं<br />
तेरे दिल की धड़कनों को सुनते हैं...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तुमको न पाया तो खोया भी कुछ नहीं]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/12/28/%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%a4%e0%a5%8b-%e0%a4%96%e0%a5%8b%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%9b/</link>
<pubDate>Fri, 28 Dec 2007 15:39:13 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/12/28/%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%a4%e0%a5%8b-%e0%a4%96%e0%a5%8b%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%9b/</guid>
<description><![CDATA[तुमको न पाया तो खोया भी कुछ नहीं
पत्थर ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">तुमको न पाया तो खोया भी कुछ नहीं<br />
पत्थर है दिल मेरा नहीं सच नहीं</font></p>
<p><font color="#000000">मुझको यक़ीं ख़ुद पे नहीं है सनम<br />
दूर रहके तू मुझसे नहीं ख़ुश नहीं</font></p>
<p><font color="#000000">खोया होता जब मैंने तुझे पाया होता<br />
खोने-पाने पर किसी का कोई वश नहीं</font></p>
<p><font color="#000000">जो इश्क़ बचा हो आइनें में ज़रा भी<br />
हम साथ होंगे दिन वह भी दूर नहीं</font></p>
<p><font color="#000000">ख़फ़ा रहे तू मेरी किसी बात से अब<br />
इस बात में रत्ती भर भी सच नहीं</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[दिल में तेरे लिए सच्ची अक़ीदत है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/20/%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%9c%e0%a5%8b-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b9%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%a4%e0%a5%8b-%e0%a4%97%e0%a5%81/</link>
<pubDate>Thu, 20 Sep 2007 06:37:12 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[है जो किसी से तुम्हें तो गुल से निस्बत ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">है जो किसी से तुम्हें तो गुल से निस्बत है<br />
तुम मुझको मिले हो ये मेरी क़िस्मत है</font></p>
<p><font color="#000000">तेरे तब्बसुम से ही है ये रंगे-बहार<br />
लगता है अब जैसे सारी फ़िज़ा जन्नत है</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी आँखों की गुलाबी डोरियाँ जैसे नश्शा-ए-मै<br />
तिश्ना-लब हूँ मुझे पीने की हसरत है</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी ज़ुल्फ़ों से गुज़रते देखी है मैंने सबा<br />
हाए ये सबा भी कितनी खु़श-क़िस्मत है</font></p>
<p><font color="#000000">तेरे अबरू मानिन्दे-कमान उठते हैं<br />
मुझको तेरे आगोश में मरने की चाहत है</font></p>
<p><font color="#000000">तेरे लब हैं की पंखुड़ियाँ गुलाब की हैं<br />
इक बोसा पाने को शबो-रोज़ की मिन्नत है</font></p>
<p><font color="#000000">सुना है जन्नत की हूरों के बारे में बहुत<br />
मगर उनमें कहाँ ये कशिशे-क़ामत है</font></p>
<p><font color="#000000">देखा है तुमने कभी चाँद को सरे-शाम<br />
एक वही है जो तेरी तरह खू़बसूरत है</font></p>
<p><font color="#000000">हो तुम ही मानिन्दे-खु़दा मेरे लिए<br />
दिल में तेरे लिए सच्ची अक़ीदत है</font></p>
<p><font color="#000000">तुम क़रीब होते हो दर्द मिट जाते हैं<br />
तुमसे ही मुझको होती नसीब फ़रहत है</font></p>
<p><font color="#000000">तुम्हें देखा तो मैंने अपनी ज़िन्दगी देखी<br />
तुमको चाहना ही खु़दा की इबादत है</font></p>
<p><font color="#000000">मेरा दिल जितना चाहता है तुमको सनम<br />
तुम्हें भी मुझसे उतनी ही मोहब्बत है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'<br />
लेखन वर्ष: २६/०७/२००४ <a href="http://vinayprajapati.iblog.com/post/222399/416165"></a></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[अब 'विनय' तेरे ग़म से ग़ाफ़िल नहीं रहा]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/19/%e0%a4%85%e0%a4%ac-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a4%af-%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a5%9a%e0%a4%ae-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a5%9a%e0%a4%be%e0%a5%9e%e0%a4%bf%e0%a4%b2-%e0%a4%a8%e0%a4%b9/</link>
<pubDate>Wed, 19 Sep 2007 19:45:51 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[अब ‘विनय’ तेरे ग़म से ग़ाफ़िल नहीं रहा
दे]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">अब ‘विनय’ तेरे ग़म से ग़ाफ़िल नहीं रहा<br />
देख तो वो मग़रूर वो संगदिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">हमें कोई शिबासी दे हमने तेरा राज़ न खोला<br />
पर जानाँ ये जान लो मैं बातिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी कही सुनी सब मुझे वक़्त ने भुला दी<br />
ये ग़ैर तेरी दुश्मनी के क़ाबिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">हमें जब नाज़ थे तो ये दर्द किसलिए हैं<br />
तेरे बाद कोई चेहरा मुस्तक़िल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">तुम हमसे पूछो वह शामे-माज़ी की तन्हाई<br />
कभी कोई इतना दिल में दाख़िल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">तुमने ख़ुद मुझे अपना दोस्त बनाया होता<br />
तुम्हें तो कोई काम कभी मुश्किल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">हमसे एक-एक कर सब हाथ छूटते गये<br />
मेरे कूचे में वो माहे-कामिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">सद्-हैफ़ो-अफ़सोस से कलेजा भर आया<br />
हाए मुझे सिवा ग़म कुछ हासिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">हमें कोई देता ताक़ते-नज़्ज़ाराए-हुस्न<br />
सुना  है मेरी राह में कोई हाइल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">साँसों का धुँआ दिल को दर्द देता है बहुत<br />
ज़िन्दगी में बाइसे-मसाइल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">वो गुफ़्त-गू वो मशविरे वो बयान अपने<br />
ख़ुदा के ज़ख़्म देखे तो मैं बिस्मिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">गर्दिशे-अय्याम की रवानी देखकर<br />
मेरा दिले-सौदा मुज़महिल</font><font color="#c0c0c0">1</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">अब इस चमन में फिरती है खुश्क सबा<br />
मस्जूदा कोई जल्वाए-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">किसके दिन उम्रभर एक से रहते हैं<br />
मुझमें तो वो हुस्ने-अमल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मेरी काविश</font><font color="#c0c0c0">2</font> का किसी राह तो हासिल होगा<br />
हैफ़ मेरे ग़म की कोई मंज़िल नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">मैं अहदे-ज़ीस्त करके किससे तोड़ूँ<br />
मुझे तफ़रकाए-नाक़िसो-कामिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मुझे तुम छोड़कर गये लेकिन क्या बताऊँ<br />
एक अरसा बर्क़े-सोज़े-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">तुमको जाना है तो जाओ कब हमने रोका है<br />
किसी के जाने का ग़म हमें बिल्कुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">इस दरया को ख़्वाहिश है समंदर की<br />
और सहाब का बरसना मुसलसल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">सू-ए-शिर्क सजदे-मस्जूद किये मैंने<br />
क्योंकि मैं तेरे कूचे का माइल</font><font color="#c0c0c0">3</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">अब किससे करूँगा उसकी जफ़ा का शिकवा<br />
आज से कोई दराज़ दस्तिए-क़ातिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">इस ज़र्फ़ कोई आये तो देखे हाल बीमार का<br />
वो पुरसिशे-जराहते-दिल</font><font color="#c0c0c0">4</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">अच्छा हुआ तुमने रोज़े-आख़िर न बोला<br />
रोज़े-विदा से कोई उक़्दाए-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">दु:ख गिनते-गिनते उम्र कट जायेगी<br />
किसी की इनायत किसी का तग़ाफ़ुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">फ़िज़ा क्यों इतनी ख़ामोश है गुलशन में<br />
क्या आशियाँ में नालाए-बुलबुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">था तब मिला नहीं, खोकर मिलता है कौन<br />
दिल मुझे ख़्याले-यारे-वस्ल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मैं जिसको दोस्त कह नहीं सकता अब<br />
मुझे उसके लिए जज़्बाए-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">किसको खरोंचे हो अपने नाख़ून से तुम<br />
इस सीने में कोई जराहते-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">उर्दी-ओ-दै का अब मैं क्या ख़्याल रखूँ<br />
ये कैसी जलन, मुझे तपिशे-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">अपनी यकताई पर बेहद नाज़ था हमको<br />
आज भी है लेकिन वो मुतक़ाबिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">अब भी खिलती है शुआहाए-ख़ुर-फ़ज़िर <br />
मगर फ़िज़ा में शाहिद-ए-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">बहुत ढूँढ़ा हमने उसके जैसा, न पाया एक<br />
वो नमकपाशे-ख़राशे-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">अब ख़ुल्द में रहें या दोज़ख में रहें हम<br />
ऐ सनम मेरा तो आबो-गिल</font><font color="#c0c0c0">5</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">उस फ़ितनाख़ेज़ का नहीं अब डर मुझको<br />
कि मेरे दिल में स’इ-ए-बेहासिल</font><font color="#c0c0c0">6</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">आँखों से निक़ाब उठाओ कि वहम खुल जाये<br />
कि तुझमें वो तर्ज़े-तग़ाफ़ुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">कहने को तो ज़ामिन नहीं मुझसा ज़माने में<br />
पर जाने क्यों मुझे तहम्मुल</font><font color="#c0c0c0">7</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">वो जिसकी चाप से धड़कनें रुक जायें थीं<br />
ज़िन्दगी में वो हौले-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">ऐ लोगों मैं ख़ुद को किस ज़ात का बताऊँ<br />
सुना है तुममें ज़रा भी दीनो-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">दायम अपने बग़ल में पाओगे तुम हमको<br />
चाहो तो कह लो मैं तुझमें मुश्तमिल</font><font color="#c0c0c0">8</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">क्यों है मुझको तेरे रूठ कर जाने का ग़म<br />
जबकि जानते हो मैं कभी तेरा काइल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">कहता तो हूँ बात दिल की मगर क्या करूँ<br />
मेरा कोई भी ख़्याल मानिन्दे-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">उसकी ख़ामोश आँखों में अयाँ थीं बातें दिल की<br />
वो चाहकर भी कभी सू-ए-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">किया जो मैंने तुम्हें अपना समझकर किया<br />
ये दिल तेरी जफ़ा से मुनफ़’इल</font><font color="#c0c0c0">9</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">मैंने देखा था उसे जाते ख़ुल्द की ओर<br />
वो हलाके-फ़रेब-वफ़ा-ए-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">जो कभी साहिल पर था कभी समंदर में<br />
उसको दाग़े-हसरते-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">जिसपे लिखा करते थे तुम अपना नाम<br />
शख़्स वो आज गर्दे-साहिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">आज फ़ारिग</font><font color="#c0c0c0">10</font> हूँ कि तुम हो मेरे ग़मख़्वार<br />
मैं हरीफ़े-मतलबे-मुश्किल<font color="#c0c0c0">11</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">था तो थोड़ा बहुत मैं ये मानता हूँ लेकिन<br />
आज उतना भी तो सोज़िशे-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मैं दर्द को दिल से जुदा कर सकता हूँ<br />
पर फ़ुसूने-ख़्वाहिशे-सैक़ल</font><font color="#c0c0c0">12</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">अब मैं किस मुँह से जाऊँ बज़्म में उसकी<br />
ये दिल दरख़ुर-ए-महफ़िल</font><font color="#c0c0c0">13</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">देखिए शाइबाए-ख़ूबिए-तक़दीर</font><font color="#c0c0c0">14</font> उसमें<br />
वो दिन गया कि रोज़े-अजल नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">इश्क़ फिरता था उस रोज़ गलियों-गलियों<br />
आज किसी में इतना भी ख़लल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">बढ़के आया तो लगा तेरा तीर इस दिल में<br />
चारासाज़ न हुआ पर जाँगुसिल</font><font color="#c0c0c0">15</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">किसपे लिखके भेजूँ मैं तुझे पयाम अपना<br />
पास औराक़े-लख़्ते-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">आस्माँ के पार जाने की तमन्ना थी उसको<br />
पर आइना-ए-बेमेहरि-ए-क़ातिल</font><font color="#c0c0c0">16</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">मेरे मुँह से न सुनो वज्हे-सुखन ईसा<br />
ख़ुद गुलों में रंगे-अदा-ए-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मगर टूटा है किसी का नाज़ुक दिल मुझसे<br />
ये डर कि मैं क़ाबिले-सुम्बुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">अब कोई रहनुमा नहीं रहे-इश्क़ में<br />
तुम ख़ुश रहो तेरी राह में साइल</font><font color="#c0c0c0">17</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#999999">१. </font><font color="#000000">निष्तेज</font> २. <font color="#000000">कोशिश, द्वेष</font> ३. <font color="#000000">अनुरक्त, आसक्त</font> ४. <font color="#000000">दिल के ज़ख़्म का हाल पूछने वाला<br />
</font>५. <font color="#000000">शरीर और आकार</font> ६. <font color="#000000">निष्फल प्रयत्न</font> ७. <font color="#000000">दिल की घबराहट, सहनशक्ति</font> ८.<font color="#000000"> शामिल</font><br />
९. <font color="#000000">लज्जित</font> १०. <font color="#000000">निश्चिंत</font> ११. <font color="#000000">कठिन काम कर लेने वाला</font> १२. <font color="#000000">परिष्कृति की अभिलाषा का जादू</font><br />
१३. <font color="#000000">महफ़िल के योग्य</font> १४. <font color="#000000">सौभाग्य की झलक</font> १५. <font color="#000000">जानलेवा, दुखदायी</font><br />
१६. <font color="#000000">माशूक़ की बेरहमी का सुबूत</font> १७. <font color="#000000">उम्मीदवार, प्रश्नकर्ता</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'<br />
लेखन वर्ष: २००५</p>
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