हे संविधान जी नमस्कार, इकसठ वर्षों के अनुभव से क्या हो पाये कुछ होशियार? ऐ संविधान जी नमस्कार… संप्रभु-समाजवादी-सेकुलर यह लोकतंत्र-जनगण अपना, क्या पूरा कर पाये अब तक देखा जो गाँधी ने सपना? बलिद… more →
सत्यार्थमित्रwrote 10 months ago: कहीं एक बेटी जिन्दा दफनाई गयी कही एक बेटी अस्त्रोपचार कर बेटा बनाई गयी कही कोई दहेज़ के वास्ते जिन्द … more →
wrote 1 year ago: सृष्टि में सृजन-विसृजन का क्रम चलता रहता है। जिन तथ्यों को हम आज वैज्ञियानिक सत्य मानते हैं, उन की ज … more →
wrote 2 years ago: हे संविधान जी नमस्कार, इकसठ वर्षों के अनुभव से क्या हो पाये कुछ होशियार? ऐ संविधान जी नमस्कार … more →
wrote 2 years ago: प्रोफेसर गंगा प्रसाद विमल ने ‘शुक्रवारी’ में रखी बेबाक राय… शुक्रवारी चर्चा आजकल जबर्दस्त फॉर् … more →
wrote 2 years ago: वर्धा विश्वविद्यालय में हुई धर्मनिरपेक्षता पर चर्चा महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्ववि … more →
wrote 3 years ago: पिछली पोस्ट में मैने जिस सेमिनार के न हो पाने की बात बतायी थी उसके आयोजन की तैयारी में आदरणीय … more →
wrote 3 years ago: किताबों की खुसर-फुसर… भाग-४ “…स्टॉल में रखी किताबें एकदम अकेली हैं। उनका अकेलापन … more →
wrote 3 years ago: हरितालिका तीज का व्रत अभी अभी सम्पन्न हुआ। एक दिन पहले पत्नी के साथ कटरा बाजार में जाकर व्रत … more →
wrote 3 years ago: आज स्वतन्त्रता दिवस है, और आज मेरी पुस्तक प्रेस से छूटकर मेरे घर आ गयी है। हिन्दुस्तानी एकेडे … more →
wrote 3 years ago: सम्बन्धित पिछली कड़िया- किताबों की खुसर-फुसर भाग-१ किताबों की खुसर-फुसर एक क्षेपक किताबों की खुसर-फुस … more →
wrote 3 years ago: “कृपया मेरे सच बोलने पर नाराज न होइए; कोई भी व्यक्ति जो इस नगर-राज्य में घट रही अनेक अन्यायपू … more →
wrote 3 years ago: (इस पोस्ट को पढ़ने से पहले इसका पूर्वार्द्ध जानना आवश्यक है। यदि आप पिछली पोस्ट न पढ़ पाये हों तो यहाँ … more →
wrote 3 years ago: यह दुनिया भी ग़जब निराली है। इसमें रहने वाले लोग अपनी सामाजिक प्रास्थिति में अपने व्यवहार को … more →
wrote 4 years ago: “हिन्दी ब्लॉगिंग की दुनिया” के बारे में जो कार्यशाला इलाहाबाद में हुई उसकी तस्वीरें, विषय-प्र … more →
wrote 4 years ago: ये रही एक माइक्रो-पोस्ट टूटी-फूटी से हुआ, सपना इक साकार। भेंट चढ़ा ब्लॉगरी के पूरा इक परिवार॥ … more →
wrote 4 years ago: हाल ही में ऋषभ देव शर्मा जी की कविता ‘औरतें औरतें नहीं हैं’ ब्लॉगजगत में चर्चा का केन्द्र बनी … more →
wrote 7 years ago: बहुत हो गया अत्याचार, फैल गया भ्रष्टाचार, अब इसे लगाम दो, विराम की ठान लो, तभी क्रांति आएगी, सारे मे … more →