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	<title>साँस &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/साँस/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "साँस"</description>
	<pubDate>Mon, 08 Sep 2008 06:18:21 +0000</pubDate>

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<item>
<title><![CDATA[बारहा पिरोये हैं कई ज़ख़्म ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1051</link>
<pubDate>Wed, 30 Jul 2008 14:21:15 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1051</guid>
<description><![CDATA[बारहा पिरोये हैं कई ज़ख़्म साँस के एक ह]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">बारहा पिरोये हैं कई ज़ख़्म साँस के एक ही धागे में<br />
टुकड़े-टुकड़े बिखरी हुई ज़िन्दगी बहुत नज़दीक़ लगी है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तुम नहीं मेरे साथ तो ज़िन्दगी एक अंधेरी ख़ला है!</span></p>
<p>बारहा: Several times</p>
<hr />
<p>शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[जाने कैसी तन्हाई रहती है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1046</link>
<pubDate>Mon, 28 Jul 2008 16:59:25 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1046</guid>
<description><![CDATA[जाने कैसी तन्हाई रहती है महफ़िले-यार मे]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">जाने कैसी तन्हाई रहती है महफ़िले-यार में<br />
दिल में अब भी साँस लेते हैं वह पुराने नाम</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तुमने मुझे भुलाके उसे याद रखा, तेरी अदा है!</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[अजब-सी टीस लगी है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1028</link>
<pubDate>Thu, 17 Jul 2008 19:36:09 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1028</guid>
<description><![CDATA[अजब-सी टीस लगी है
दस दूनी बीस लगी है,
आँ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">अजब-सी टीस लगी है<br />
दस दूनी बीस लगी है,<br />
आँखों में आँच भरी है<br />
उन्नीस की बीस लगी है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">दिल में दर्द उगते हैं<br />
साँसें ठण्डी-ठण्डी हैं,<br />
मेरा हर ख़ाब टूटा है<br />
ख़ाहिश भीख लगी है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">डालों से फूल गिर गये<br />
ख़ुशबू के मौसम गये,<br />
आइनों ने धोखा दिया<br />
ज़िन्दा तस्वीर लगी है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">रोशनी का दरिया बहे<br />
मुझे कोई अपना कहे,<br />
वह ख़लिश बुझाये तो<br />
ज़िंदगी मरीज़ लगी है</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[सुनो! एक शिकायत है तुमसे]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=982</link>
<pubDate>Wed, 11 Jun 2008 19:14:59 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=982</guid>
<description><![CDATA[सुनो! एक शिकायत है तुमसे
तुम क्यों आती ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">सुनो! एक शिकायत है तुमसे<br />
तुम क्यों आती नहीं ख़ाबों में<br />
ख़ुशबू छूता हूँ जब साँसों में<br />
दिखती हो तुम बंद आँखों में</span></p>
<p><span style="color:#000000;">सुनो! एक शिकायत है तुमसे<br />
तुम क्यों आती नहीं ख़ाबों में</span></p>
<p><span style="color:#000000;">यह दुनिया जन्नत हो जाये<br />
जो मिला करो तुम ख़ाबों में<br />
मखमली लब जब हिलते हैं<br />
खिलता है बसंत शाख़ों में</span></p>
<p><span style="color:#000000;">सुनो! एक शिकायत है तुमसे<br />
तुम क्यों आती नहीं ख़ाबों में </span></p>
<p><span style="color:#000000;">तेरे जिस्म की महक जुदा है<br />
चाहे तुम चाँद बनो बादलों में<br />
रंग तेरे मेरी आँखों की चमक<br />
तुम तितली दिल के बाग़ों में</span></p>
<p><span style="color:#000000;">सुनो! एक शिकायत है तुमसे<br />
तुम क्यों आती नहीं ख़ाबों में</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४ </p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[साँस रफ़्ता-रफ़्ता पिघल रही है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=964</link>
<pubDate>Sun, 13 Apr 2008 09:33:37 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=964</guid>
<description><![CDATA[साँस रफ़्ता-रफ़्ता पिघल रही है
मोहब्बत म]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">साँस रफ़्ता-रफ़्ता पिघल रही है<br />
मोहब्बत मुझे मसल रही है<br />
ख़्यालों की राह-राह जल रही है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">चाँद से मुझको शिकवे बहुत हैं<br />
आप से मेरे शादो-फ़रहत हैं<br />
ख़ामुशी उसकी मुझे छल रही है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">साँस रफ़्ता-रफ़्ता पिघल रही है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">एजाज़े-चाँदनी बिखरा हुआ है<br />
मुझको तस्व्वुर तेरा हुआ है<br />
तन्हाई हर दम ख़ल रही है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">साँस रफ़्ता-रफ़्ता पिघल रही है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">सितारे अपनी पलकें झपक रहे हैं<br />
तेरा हुस्न बेसुध तक रहें हैं<br />
बुझी-बुझी मेरी नब्ज़ चल रही है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">साँस रफ़्ता-रफ़्ता पिघल रही है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तुमको हर चेहरे में ढूँढ़ते हैं<br />
बार-बार दिल के टुकड़े टूटते हैं<br />
मंज़र यह शाम की ढल रही है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">साँस रफ़्ता-रफ़्ता पिघल रही है</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[जब कभी मैंने साँस ली]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=962</link>
<pubDate>Wed, 09 Apr 2008 10:31:54 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=962</guid>
<description><![CDATA[जब कभी मैंने साँस ली
साथ तेरे नाम की फा]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">जब कभी मैंने साँस ली<br />
साथ तेरे नाम की फाँस ली</span></p>
<p><span style="color:#000000;">पहरों नाराज़ थे ख़ुद से<br />
आज गुज़रे हैं हद से<br />
बेताब हैं तेरे प्यार में<br />
फिर जायें कैसे ज़िद से</span></p>
<p><span style="color:#000000;">जब कभी मैंने साँस ली...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">शहद जैसी शाम घुल गयी<br />
हमको ज़िन्दगी मिल गयी<br />
मोगरे के फूल जब खिले<br />
उनमें तेरी हँसी मिल गयी</span></p>
<p><span style="color:#000000;">जब कभी मैंने साँस ली...</span></p>
<p><span style="color:#000000;">आँखों में तेरे ख़ाबों की रिदा है<br />
धड़कनों की तुझको सदा है<br />
छम-छम छनकेगी ख़ुशी<br />
महकी-महकी तेरे अदा है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">जब कभी मैंने साँस ली...</span></p>
<p>मोगरा: Jasmine Sambac Florapleno, रिदा: coversheet</p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[वज़नी साँसों में पिस रहा है दिन सारा]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=955</link>
<pubDate>Tue, 01 Apr 2008 11:47:27 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=955</guid>
<description><![CDATA[वज़नी साँसों में पिस रहा है दिन सारा
मु]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">वज़नी साँसों में पिस रहा है दिन सारा<br />
मुझे आज भी है इन्तिज़ार तुम्हारा</font></p>
<p><font color="#000000">नम है नफ़स-नफ़स मेरे सीने में<br />
क्यों खर्च नहीं होती साँस जीने में</font></p>
<p><font color="#000000">मेरी बाक़ी ज़िन्दगी का तुम ही सहारा<br />
मुझे आज भी है इन्तिज़ार तुम्हारा</font></p>
<p><font color="#000000">नामे-इश्क़ जायेगा मेरा सब-कुछ<br />
क़िस्मत क्यों नहीं कहती आज कुछ</font></p>
<p><font color="#000000">नाख़ुदा कश्ती को कब मिलेगा सहारा<br />
मुझे आज भी है इन्तिज़ार तुम्हारा</font></p>
<p><font color="#000000">'नज़र' को नयी ज़ीस्त दी तुमने शीना<br />
जीने का तुमने सिखाया मुझको क़रीना</font></p>
<p><font color="#000000">तेरे ही साथ मैंने हर लम्हा गुज़ारा<br />
मुझे आज भी है इन्तिज़ार तुम्हारा</font></p>
<p>वज़नी: heavy; नफ़स: breath; नाख़ुदा: boater, sailer;<br />
ज़ीस्त: life; शीना: shine; क़रीना: style</p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ख़लिश को जगह न दो दिल में]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=943</link>
<pubDate>Tue, 18 Mar 2008 17:23:21 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=943</guid>
<description><![CDATA[ख़लिश को जगह न दो दिल में
नासूर बन जाये]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">ख़लिश को जगह न दो दिल में<br />
नासूर बन जायेगी<br />
मरहम भी न लगा पाओगे<br />
साँस घुट के मर जायेगी<br />
ज़ीस्त अलग है, ज़ीस्त जीना अलग<br />
समझे 'नज़र'!<br />
मजलिस में बैठोगे वाइज़ के साथ<br />
बाँह खुल जायेगी...</font></p>
<p>ज़ीस्त= जीवन, Life</p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तुम न समझोगे]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=909</link>
<pubDate>Thu, 13 Mar 2008 06:10:04 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=909</guid>
<description><![CDATA[बिन तुम्हारे मैं क्या हूँ तुम न समझोगे]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">बिन तुम्हारे मैं क्या हूँ तुम न समझोगे<br />
आप तन्हाई की सदा हूँ तुम न समझोगे</font></p>
<p><font color="#000000">तुम्हारे ग़मे-इश्क़ में जो चाँद पिरोता रहा<br />
मैं साँस का वो टुकड़ा हूँ तुम न समझोगे</font></p>
<p><font color="#000000">तुम्हारे दिल में जो हर लम्हा बहता है<br />
मैं लहू का वही क़तरा हूँ तुम न समझोगे</font></p>
<p><font color="#000000">तुमने जिसे बेकार समझकर फाड़ दिया<br />
मैं उसी ख़त का टुकड़ा हूँ तुम न समझोगे</font></p>
<p><font color="#000000">जब निगाहे-'नज़र' बेक़रार हो चली है<br />
मैं किस मोड़ पे आ गया हूँ तुम न समझोगे</font></p>
<p><font color="#000000">पुराना एक ख़तो-लिफ़ाफ़ा जलाकार आया<br />
'विनय' अब तुम्हारा हूँ तुम न समझोगे</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[उफ़! यह मोहब्बत]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=894</link>
<pubDate>Mon, 10 Mar 2008 11:54:35 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=894</guid>
<description><![CDATA[&#8220;उफ़! यह मोहब्बत भी क्या चीज़ है
कभी बोझ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">"उफ़! यह मोहब्बत भी क्या चीज़ है<br />
कभी बोझल आँखों से ख़ूँ टपकता है<br />
कभी नब्ज़ बुझती है साँस जलती है"</font></p>
<p><font color="#000000">पास मेरे जो तेरी तस्वीर नहीं<br />
हाथों में मेरी तक़दीर नहीं<br />
जिस तरह जी रहा हूँ जानता हूँ<br />
सीने में साँसों की ज़ंजीर नहीं</font></p>
<p><font color="#000000">मेरी राह से दिल से गुज़रती थी<br />
चाँद जैसे रोज़ सँवरती थी<br />
एक तरफ़ा मैं मरता था तुम पे<br />
क्या तुम भी मुझपे मरती थी</font></p>
<p><font color="#000000">वह बारिश, दिन वह मुबारक़<br />
मेरी आँखों में ठहर गया है<br />
दुआओं से भी न लौटे तुम<br />
दिल पे जैसे क़हर बरपा है</font></p>
<p><font color="#000000">मेरे ज़ख़्मों पे नमक रखा है<br />
ज़बाँ से नहीं जिस्म से चख़ा है<br />
गलता है तन्हाई में धीरे-धीरे<br />
एक उम्र से मेरा सखा है</font></p>
<p><font color="#000000">हम जो बिछुड़े हैं मिलेंगे भी<br />
मुरझाये दो चेहरे खिलेंगे भी<br />
चाँदनी रिदा होगी हम होंगे<br />
सिलसिले ख़ाबों के चलेंगे भी</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २९ मई २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[यह कैसा लम्हा है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=881</link>
<pubDate>Thu, 06 Mar 2008 10:28:36 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=881</guid>
<description><![CDATA[यह कैसा लम्हा है
यह कैसा एहसास है
तू पल]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">यह कैसा लम्हा है<br />
यह कैसा एहसास है<br />
तू पलकों में क़ैद है<br />
दिल के पास है</font></p>
<p><font color="#000000">क्या देखूँ तेरे सिवा<br />
क्या चाहूँ तेरे सिवा<br />
मेरे दर्दे-दिल की<br />
तू ही तो है दवा</font></p>
<p><font color="#000000">खिलते हुए लम्हे सब<br />
खिल गये हैं अब<br />
मैं तुझको महसूस करूँ<br />
साँस लूँ जब</font></p>
<p><font color="#000000">आज जो देखा तुझे<br />
याद आया मुझे<br />
लोग दीवाना क्यों<br />
कहते है मुझे</font></p>
<p><font color="#000000">जब निगाहों ने छुआ<br />
यह एहसास हुआ<br />
तूने भी मुझको सनम<br />
प्यार है किया</font></p>
<p><font color="#000000">दुनिया बदल गयी है<br />
तू मुझे मिल गयी है<br />
ज़िन्दगी मेरी इक हसीन<br />
शाम हो गयी है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[कुछ ऐसा ही होता है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2008/03/06/kuchh-aisaa-hii-hota-hai/</link>
<pubDate>Thu, 06 Mar 2008 09:51:56 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/2008/03/06/kuchh-aisaa-hii-hota-hai/</guid>
<description><![CDATA[ज़ोर से दिल धड़कता है (हाँ धड़कता है)
तूफ़]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">ज़ोर से दिल धड़कता है (हाँ धड़कता है)<br />
तूफ़ान साँसों में चलता है (हाँ चलता है)<br />
आँखें ठहर जाती हैं<br />
तस्वीरें गुज़र जाती हैं<br />
जब प्यार किसी से होता है<br />
कुछ ऐसा ही होता है...</font></p>
<p><font color="#000000">दिल इक़रार करता है (हाँ डरता है)<br />
पर इज़हार से डरता है (हाँ करता है)<br />
बेचैन हो जाता है<br />
सब कुछ बदल जाता है<br />
जब प्यार किसी से होता है<br />
कुछ ऐसा ही होता है...</font></p>
<p><font color="#000000">अफ़सोस करता है (हाँ करता है)<br />
तस्व्वुर को तरसता है (हाँ तरसता है)<br />
वो सपनों में रोज़ मिलता है<br />
जिस पर दिल फिसलता है<br />
जब प्यार किसी से होता है<br />
कुछ ऐसा ही होता है...</font></p>
<p><font color="#000000">दीदार को दीवाना होता है (हाँ होता है)<br />
इश्क़ आशिक़ाना होता है (हाँ होता है)<br />
शमअ का परवाना होता है<br />
तीरे-नज़र का निशाना होता है<br />
जब प्यार किसी से होता है<br />
कुछ ऐसा ही होता है...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[आँखों से सुना आँखों ने कहा]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=877</link>
<pubDate>Wed, 05 Mar 2008 10:13:00 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=877</guid>
<description><![CDATA[आँखों से सुना आँखों ने कहा
आँखों ने सु]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">आँखों से सुना आँखों ने कहा<br />
आँखों ने सुना आँखों से कहा</font></p>
<p><font color="#000000">सिलसिला प्यार का चल पड़ा<br />
पत्थर दिल पिघल पड़ा<br />
क्या? कुछ चाहिए प्यार को<br />
बस प्यार चाहिए प्यार को</font></p>
<p><font color="#000000">सितमगर का नाज़ उठाना पड़ा<br />
हौसला उसको दिखाना पड़ा<br />
वक़्त कहाँ इन्तिज़ार को<br />
इम्तिहाँ है मेरे प्यार को</font></p>
<p><font color="#000000">वह शब ख़्यालों में रहा<br />
आँखों ने सुना आँखों ने कहा</font></p>
<p><font color="#000000">जल गया साँस का हर टुकड़ा<br />
रह गया फाँस का टुकड़ा<br />
प्यार को वह झलक चाहिए<br />
रहने को फ़लक़ चाहिए</font></p>
<p><font color="#000000">बाँहों में आये चाँद का टुकड़ा<br />
देखता रहूँ उसका मुखड़ा<br />
जिस्म में वह महक चाहिए<br />
प्यार में वह दहक चाहिए</font></p>
<p><font color="#000000">मेरा दिल आइने में रहा<br />
आँखों से सुना आँखों ने कहा</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[साहिबा ज़ुलेख़ा सोफ़िया ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=871</link>
<pubDate>Tue, 04 Mar 2008 02:24:18 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=871</guid>
<description><![CDATA[साहिबा ज़ुलेख़ा सोफ़िया आँखों में तू
ख़]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">साहिबा ज़ुलेख़ा सोफ़िया आँखों में तू<br />
ख़ाबों में ख़्यालों में मेरी साँसों में तू</font></p>
<p><font color="#000000">जानाँ मैं तेरे हुस्न का ख़्वार हूँ<br />
तेरी इक झलक को बेक़रार हूँ<br />
तेरे लिए दर-ब-दर भटकता रहा<br />
रात-दिन तेरा नाम रटता रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मेरे दिल के अँधेरों में उजालों में तू<br />
ख़ाबों में ख़्यालों में मेरी साँसों में तू</font></p>
<p><font color="#000000">यूँ ही दूर से देखूँ कब तलक तुझे<br />
अपनी आँखों में बाँहों में छुपा ले मुझे<br />
तेरे प्यार को ज़रा प्यार करने दे<br />
इक़रार करके इज़हार करने दे</font></p>
<p><font color="#000000">ज़हन के तस्व्वुर में सवालों में तू<br />
ख़ाबों में ख़्यालों में मेरी साँसों में तू</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'<br />
लेखन वर्ष: १२ मई २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[पहली नज़र का पहला प्यार]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=859</link>
<pubDate>Thu, 28 Feb 2008 12:07:10 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=859</guid>
<description><![CDATA[पहली नज़र का पहला प्यार कर गया दीवाना
म]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">पहली नज़र का पहला प्यार कर गया दीवाना<br />
मेरा दिल यह बेचारा हो गया आशिक़ाना<br />
आँखों में बेताबी है, चैन कहाँ है<br />
डरता हूँ कहीं कोई बन जाये ना अफ़साना</font></p>
<p><font color="#000000">फूल हँसें हैं सारे, दिल धड़का है<br />
ठण्डी साँसों में जैसे शोला भड़का है<br />
उसका चेहरा चाँद है, नूर है<br />
लड़की नहीं वह इक हूर है<br />
थाम के दिल मैं राहों में खड़ा हूँ कि<br />
हो जाऊँ उसके तीरे-नज़र का निशाना</font></p>
<p><font color="#000000">पहली नज़र का पहला प्यार कर गया दीवाना<br />
अब मैं दिल में उसके बनाऊँगा आशियाना<br />
वह मेरी अब इक मंज़िल है<br />
उसकी बाँहो के सिवा कहाँ कोई मेरा ठिकाना</font></p>
<p><font color="#000000">उसको देखकर जी नहीं भरता है<br />
कैसे जताये उसे उस पर मरता है<br />
भोली-भाली वह सबसे जुदा है<br />
सबसे निराली उसकी अदा है<br />
आये वह कभी जो मेरी दुनिया में तो<br />
छोड़ दूँ उसके लिए मैं यह सारा ज़माना</font></p>
<p><font color="#000000">पहली नज़र का पहला प्यार कर गया दीवाना<br />
मेरा दिल यह बेचारा हो गया आशिक़ाना</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: ०८ मई २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[कुछ तो बोलो!]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=845</link>
<pubDate>Tue, 26 Feb 2008 12:09:12 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=845</guid>
<description><![CDATA[क्यों लोग यहाँ जमा हैं?
क्यों वह उदास ब]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">क्यों लोग यहाँ जमा हैं?<br />
क्यों वह उदास बैठा है?</font></p>
<p><font color="#000000">कुछ तो बोलो! मेरी साँसें उखड़ रही हैं</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[इस पुराने शहर में]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=829</link>
<pubDate>Mon, 25 Feb 2008 16:26:16 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=829</guid>
<description><![CDATA[इस पुराने शहर में
कुछ पुरानी इमारतें ह]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">इस पुराने शहर में<br />
कुछ पुरानी इमारतें हैं<br />
कुछ खण्डहर हैं<br />
कुछ अजनबी रास्ते हैं</font></p>
<p><font color="#000000">दूर से पत्थर दिखता होगा<br />
बेजान दिल मेरा लगता होगा<br />
छूकर देखो,<br />
दीवारें आज भी साँस लेती हैं<br />
न कहती हैं न सुनती हैं<br />
टूटती-गिरती हैं...</font></p>
<p><font color="#000000">जब भी गुज़रता हूँ<br />
साये मुझको पुकारते हैं<br />
इस पुराने शहर में<br />
कुछ पुरानी इमारतें हैं<br />
कुछ खण्डहर हैं<br />
कुछ अजनबी रास्ते हैं</font></p>
<p><font color="#000000">कितने ख़ाबों के बादल बरसे<br />
कितनी ख़ुशबू की बेले महकीं<br />
हर बार,<br />
नशेमन जलकर खाक हुआ<br />
चिन्गारियाँ,<br />
दिलों में जब-जब दहकीं...</font></p>
<p><font color="#000000">जो भीगकर मिटती हैं<br />
कुछ ऐसी भी इबारतें हैं<br />
इस पुराने शहर में<br />
कुछ पुरानी इमारतें हैं<br />
कुछ खण्डहर हैं<br />
कुछ अजनबी रास्ते हैं</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९ अप्रैल २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मेरी मोहब्बत है तू कहाँ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=828</link>
<pubDate>Mon, 25 Feb 2008 16:25:52 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=828</guid>
<description><![CDATA[मेरी मोहब्बत, है तू कहाँ, तू कहाँ है
जिस]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">मेरी मोहब्बत, है तू कहाँ, तू कहाँ है<br />
जिस्म यहाँ, जान कहाँ, जान कहाँ है</font></p>
<p><font color="#000000">तड़प-तड़प कर साँसें जिस्म में पलती हैं<br />
दिन-रात दिल की आहों में जलती हैं<br />
यह मेरा नसीब है या वक़्त का क़तरा<br />
थाम लिया है किसने अब तक न गुज़रा</font></p>
<p><font color="#000000">मुझको आवाज़ दे है तू कहाँ, तू कहाँ है<br />
मेरे हमदम, मेरे हमनवाँ, तू कहाँ है...</font></p>
<p><font color="#000000">नीली शाम यह सूरज जब पिघलता है<br />
गुलाबी चाँद दो बोझल आँखों में गलता है<br />
पतझड़ को शाखों पर किसने सजाया है<br />
टूटे हुए आइने में अक्स अपना दिखाया है</font></p>
<p><font color="#000000">आ तू कभी मेरी बाँहों में आ, तू कहाँ है<br />
मेरे हमसफ़र, मेरे हमनवाँ, तू कहाँ है...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९ अप्रैल २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[यह लम्हा गुज़र जाने दो]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=825</link>
<pubDate>Mon, 25 Feb 2008 15:53:05 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=825</guid>
<description><![CDATA[जाने दो जाने दो यह लम्हा गुज़र जाने दो
न ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">जाने दो जाने दो यह लम्हा गुज़र जाने दो<br />
न रोको इसे न सँभालो, बह जाने दो...</font></p>
<p><font color="#000000">वक़्त के क़तरे बहते रहते हैं<br />
हम भी तेरे नशेमन में रहते हैं<br />
आवाज़ देना हमें हम लौट आयेंगे<br />
जायें भी तो और कहाँ जायेंगे</font></p>
<p><font color="#000000">जाने दो जाने दो यह लम्हा गुज़र जाने दो<br />
न रोको इसे न सँभालो, बह जाने दो...</font></p>
<p><font color="#000000">तुमने मुझे अजनबी कह दिया है<br />
इक शीशे के मर्तबाँ में बंद कर दिया है<br />
अब हम साँस कैसे ले पायेंगे<br />
तेरे नाम के साथ दफ़्न हो जायेंगे</font></p>
<p><font color="#000000">जाने दो जाने दो यह लम्हा गुज़र जाने दो...</font></p>
<p><font color="#333399">मर्तबाँ का अर्थ jampot या jar होता है।</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १७ अप्रैल २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[जो दिल से जाता नहीं है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=813</link>
<pubDate>Mon, 18 Feb 2008 19:42:20 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=813</guid>
<description><![CDATA[जो दिल से जाता नहीं है
तू वह गीत है
जो द]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">जो दिल से जाता नहीं है<br />
तू वह गीत है<br />
जो दिल में आकर बसा था<br />
तू वह मीत है</font></p>
<p><font color="#000000">साँसों की सरगम बस तुम ही तुम<br />
लफ़्ज़ों में जब हम बस तुम ही तुम</font></p>
<p><font color="#000000">कहना कितना मुश्किल था<br />
यह समझा न सके<br />
अपने दिल की बात हम<br />
तुम्हें बता न सके</font></p>
<p><font color="#000000">जो दिल से जाता नहीं है<br />
तू वह गीत है<br />
जो दिल में आकर बसा था<br />
तू वह मीत है</font></p>
<p><font color="#000000">प्यार क्या है सनम हमें कब पता था<br />
हमें जब तुम मिले तब पता चला था</font></p>
<p><font color="#000000">अकेले रहना मुमकिन नहीं<br />
यह कह न सके<br />
अपने दिल के जज़्बात हम<br />
तुम्हें जता न सके</font></p>
<p><font color="#000000">जो दिल से जाता नहीं है<br />
तू वह गीत है<br />
जो दिल में आकर बसा था<br />
तू वह मीत है</font></p>
<p><font color="#000000">अब तो ऐसा लगता है मुझको<br />
जैसे फूलों में ख़ुशबू नहीं है<br />
तुम जो नहीं यहाँ पर सनम<br />
जैसे यहाँ पर कुछ भी नहीं है</font></p>
<p><font color="#000000">बेचैन करती हैं यादें दिन-रात<br />
बुझती नहीं हैं साँसें<br />
हर लम्हा सोचता हूँ क्या मैं<br />
करूँ तो क्या करूँ</font></p>
<p><font color="#000000">जो दिल से जाता नहीं है<br />
तू वह गीत है<br />
जो दिल में आकर बसा था<br />
तू वह मीत है</font></p>
<p><font color="#000000">कुछ और अब बाक़ी नहीं<br />
बस मैं हूँ मेरा ख़ाब है<br />
ख़ामोश रहती हैं यह रातें<br />
बस मैं हूँ मेरा साथ है</font></p>
<p><font color="#000000">ज़िन्दगी मेरी तुम बदलकर चले गये<br />
तन्हा कर गये हमें तन्हा कर गये</font></p>
<p><font color="#000000">जो दिल से जाता नहीं है<br />
तू वह गीत है<br />
जो दिल में आकर बसा था<br />
तू वह मीत है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तुम मेरे हो]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=809</link>
<pubDate>Mon, 18 Feb 2008 18:10:21 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=809</guid>
<description><![CDATA[तुम मेरे हो तुम मेरे हो तुम मेरे हो
दिल ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">तुम मेरे हो तुम मेरे हो तुम मेरे हो<br />
दिल की सदा साँसों के सिलसिले<br />
कहते हैं तुम मेरे हो तुम मेरे हो<br />
यह तूफ़ान यह ऊँचा-ऊँचा आसमान<br />
कहता है तुम मेरे हो तुम मेरे हो<br />
तुम मेरे हो तुम मेरे हो तुम मेरे हो</font></p>
<p><font color="#000000">जलती है नस-नस में तेरी मोहब्बत<br />
आते नहीं आँखों में अश्क क्योंकि<br />
तुम मेरे हो तुम मेरे हो तुम मेरे हो<br />
दिल को लगी तेरी लगन, तरसते हैं<br />
तेरे लिए मेरे यह दो नयन क्योंकि<br />
तुम मेरे हो तुम मेरे हो तुम मेरे हो</font></p>
<p><font color="#000000">जाओ चाहे जहाँ भी तुम अलग नहीं<br />
यह तुम्हारा दीवाना तुम्हें ढूँढ़ लेगा<br />
तुम मेरे हो तुम मेरे हो तुम मेरे हो<br />
तेरी लकीरों से मेरी लकीरें जुड़ी हैं<br />
तेरा शैदाई दिल में इश्क़ जगा देगा<br />
तुम मेरे हो तुम मेरे हो तुम मेरे हो</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[हल्के-हल्के आँसू टूटे हैं]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=802</link>
<pubDate>Mon, 18 Feb 2008 13:01:32 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=802</guid>
<description><![CDATA[हल्के-हल्के आँसू टूटे हैं मेरी आँखों स]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">हल्के-हल्के आँसू टूटे हैं मेरी आँखों से<br />
अब बात नहीं बनती है तेरी यादों से<br />
इतनी दूरी क्यों है, यह मजबूरी क्यों है<br />
इसका जवाब दो तुम इसका जवाब दो<br />
यह जुदाई क्यों है यह रुसवाई क्यों है<br />
इसका जवाब दो मुझे इसका जवाब दो</font></p>
<p><font color="#000000">यह दिल मेरा तेरी मोहब्बत चाहता है<br />
वह दिल तेरा मेरी मोहब्बत चाहता है<br />
इस मुश्किल से थोड़ी राहत चाहता है</font></p>
<p><font color="#000000">हल्के-हल्के आँसू टूटे हैं मेरी आँखों से<br />
अब बात नहीं बनती है तेरी यादों से</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ाहिश है तू मेरी, जन्नत है तू मेरी<br />
इस दुनिया में सबसे सुन्दर है तू ही<br />
नीले आकाश में जैसे उड़ता बादल है<br />
नील आँखों में जैसे सजता काजल है<br />
कुछ यूँ मेरे दिल के अन्दर है तू ही<br />
मेरी सजनी तू नील समन्दर है तू ही</font></p>
<p><font color="#000000">हल्के-हल्के आँसू टूटे हैं मेरी आँखों से<br />
अब बात नहीं बनती है तेरी यादों से</font></p>
<p><font color="#000000">तुम मेरे जीवन में फिर आ जाओ<br />
तुम मुझे एक बार अपना कह जाओ<br />
फिर जो बोलोगे तुम हम कर जायेंगे<br />
फिर तुम बोलोगे तो हम मर जायेंगे<br />
पर ऐसी ज़िन्दगी हम न जी पायेंगे<br />
तन्हा साँसें ले‍गें हम तन्हा मर जायेंगे</font></p>
<p><font color="#000000">हल्के-हल्के आँसू टूटे हैं मेरी आँखों से<br />
अब बात नहीं बनती है तेरी यादों से<br />
इतनी दूरी क्यों है, यह मजबूरी क्यों है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[याद आती हैं फिर वह तारीख़ें ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=796</link>
<pubDate>Sun, 17 Feb 2008 13:33:25 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=796</guid>
<description><![CDATA[याद आती हैं फिर वह तारीख़ें
मेरा करना ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">याद आती हैं फिर वह तारीख़ें<br />
मेरा करना तुम्हारी तारीफ़ें<br />
लिखना पुराने ख़तों को दोबारा<br />
पूछना क्या नाम है तुम्हारा</font></p>
<p><font color="#000000">कुछ न मिले ऐसी शाम के तले<br />
इतना मान ले इतना जान ले</font></p>
<p><font color="#000000">वह साँसों का साँसों तक जाना<br />
क़रीब आकर फिर मुड़ जाना<br />
लिखना पुराने ख़तों को दोबारा<br />
पूछना क्या नाम है तुम्हारा</font></p>
<p><font color="#000000">तेरा मुझे देखकर शरमाना<br />
यारों से दिल की बात छिपाना<br />
है प्यार तो क्यों न कह दो<br />
एक प्रेम-पत्र ही लिखकर दे दो</font></p>
<p><font color="#000000">कुछ न मिले ऐसी शाम के तले<br />
इतना मान ले इतना जान ले</font></p>
<p><font color="#000000">याद आती हैं फिर वह तारीख़ें<br />
मेरा करना तुम्हारी तारीफ़ें<br />
लिखना पुराने ख़तों को दोबारा<br />
पूछना क्या नाम है तुम्हारा</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मेरी राहों की रेत पर]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=742</link>
<pubDate>Mon, 11 Feb 2008 11:10:06 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=742</guid>
<description><![CDATA[मेरी राहों की रेत पर उसके पैरों का निश]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">मेरी राहों की रेत पर उसके पैरों का निशाँ नहीं है<br />
वह गुज़रा नहीं इधर से पर मोहब्बत कम नहीं है</font></p>
<p><font color="#000000">आज़माना है तो आज़मा ले हम भी तेरे बेताबी हैं<br />
जलाकर सब राख कर दें हम वह आतिशबाजी हैं</font></p>
<p><font color="#000000">एक दिन तुम्हें अपना बना लेंगे, अपना बना लेंगे<br />
अपनी साँसों में बसा लेंगे, साँसों में बसा लेंगे<br />
अपनी मुहब्बत की शमा तुम्हारे दिल में जला देंगे<br />
तुम हो हमारी सिर्फ़ हमारी यह सबको जता देंगे...</font></p>
<p><font color="#000000">मेरी राहों की रेत पर उसके पैरों का निशाँ नहीं हैं<br />
वह गुज़रा नहीं इधर से पर मोहब्बत कम नहीं है</font></p>
<p><font color="#000000">तुमसे दिल लगाया है तुमसे ही दिल जलाया है<br />
तुम पर दिल आया है तुमसे ख़ाब सजाया है<br />
मन में जो आग जल रही है उसे बुझने न देंगे<br />
दूसरा कोई तुम्हें छू सके वह दिन आने न देंगे</font></p>
<p><font color="#000000">आज़माना है तो आज़मा ले हम भी तेरे बेताबी हैं<br />
जलाकर सब राख कर दें हम वह आतिशबाजी हैं</font></p>
<p><font color="#000000">एक दिन तुम्हें अपना बना लेंगे, अपना बना लेंगे<br />
अपनी साँसों में बसा लेंगे, साँसों में बसा लेंगे<br />
तुम्हारे साथ ख़ुद को जला देंगे, ख़ुद को जला देंगे<br />
अपनी साँसों में बसा लेंगे, साँसों में बसा लेंगे</font></p>
<p><font color="#000000">मेरी राहों की रेत पर उसके पैरों का निशाँ नहीं हैं<br />
वह गुज़रा नहीं इधर से पर मोहब्बत कम नहीं है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[दिल में दुआ दिल में पिया]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=722</link>
<pubDate>Thu, 07 Feb 2008 15:30:46 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=722</guid>
<description><![CDATA[दिल में दुआ दिल में पिया
दिल ने चाहा दि]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">दिल में दुआ दिल में पिया<br />
दिल ने चाहा दिल ने किया</font></p>
<p><font color="#000000">इश्क़ पर किसका ज़ोर है<br />
बहती हवाओं में शोर है<br />
दिल में दरकती हैं आहें<br />
उनके बिना सूनी हैं बाँहें<br />
चले आओ, चले आओ<br />
ठहर गयीं हैं सब राहें</font></p>
<p><font color="#000000">दिल में दुआ दिल में पिया<br />
दिल ने चाहा दिल ने किया</font></p>
<p><font color="#000000">दिल की कहानियाँ पुरानी हैं<br />
फिर भी उनको सुनानी हैं<br />
दिल में दर्द जलते-बुझते हैं<br />
यह किस्से कहते न बनते हैं<br />
साँसों में फिर उठा धुँआ<br />
कुछ अरमान सुलगते हैं</font></p>
<p><font color="#000000">दिल में दुआ दिल में पिया<br />
दिल ने चाहा दिल ने किया</font></p>
<p><font color="#000000">उगती बेलें तो दीवानी है<br />
जाने कहाँ-कहाँ उगती है<br />
समन्दर किनारों की<br />
चट्टानों-सी यह दुनिया है<br />
फिर भी यहाँ पर जाने<br />
कितनों ने इश्क़ किया है</font></p>
<p><font color="#000000">दिल में दुआ दिल में पिया<br />
दिल ने चाहा दिल ने किया</font></p>
<p><font color="#000000">आग में जलता सूरज रोज़<br />
तपिश देने निकलता है<br />
लेकिन फिर भी यहाँ<br />
चाँद का ही ज़ोर चलता है<br />
इश्क़ में जो मुक़ाम बनते हैं<br />
यहाँ कितनों को मिलते हैं?</font></p>
<p><font color="#000000">दिल में दुआ दिल में किया<br />
दिल ने चाहा दिल ने किया</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>

</channel>
</rss>
