Blogs about: सृजन के प्रिय क्षण
चमचे का कमाल (एक हास्य-व्यंग्य कविता)
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ramadwivedi wrote 1 year ago: आजकल हर जगह चमचे आ गये ह … more »
सभ्यता बंदी है
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ramadwivedi wrote 1 year ago: कहने को इक्कीसवीं सद … more »
एक और परीक्षा
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ramadwivedi wrote 1 year ago: तुम जा रहे हो … more »
बेशुमार तन्हाईयां
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ramadwivedi wrote 1 year ago: ये बेशुमार तन्हाईयां, … more »
कुछ पल ठहर
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ramadwivedi wrote 1 year ago: यॊवन की ऎसी आई लहर, मन तेरा जाए मचल-मचल। … more »
उम्मीद का दिया जल रहा है
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ramadwivedi wrote 1 year ago: बुझता दिया सुकूं का इंसान ही के कारण, ब … more »
हरियाली हर ले जाते हो
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ramadwivedi wrote 1 year ago: तुझमें मुझमें बस इक अन्तर, तुम नर हो अर … more »
जीवन मूल्यों में विप्लव हो
ramadwivedi wrote 1 year ago: इतना भी संत्रास न दो, कोमलता जग से मिट … more »
कब दर्द का संवेग उठा
ramadwivedi wrote 1 year ago: कब दर्द का संवेग उठा? कब शब्दों का जाल … more »
आधुनिक नारी के नाम
ramadwivedi wrote 1 year ago: नारी तू जगजननी है,जगदात्री है, तू … more »
सत्य अपना अपना
ramadwivedi wrote 1 year ago: सत्य, सत्य है झूठ भी अपने आप में सत्य ह … more »
परिभाषाएं अलग-अलग
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ramadwivedi wrote 1 year ago: हर एक के सुख की परिभाषाएं अलग होती हैं … more »
संवेदनाएं चुक गईं
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ramadwivedi wrote 1 year ago: संवेदनाएं चुक गईं, अब और सह सकते नही … more »
तलाश
ramadwivedi wrote 1 year ago: वर्षों से तलाश थी जिसकी, आज मैंने उसकी … more »
करती है पानी -पानी
ramadwivedi wrote 1 year ago: मर्यादाएं न टूटें, इतना भी त्रास न दो। … more »
kuch apne baare me
ramadwivedi wrote 1 year ago: कुछ अपने बारे में……… मैं डा रमा … more »
