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	<title>हमनशीं &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/हमनशीं/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "हमनशीं"</description>
	<pubDate>Sun, 12 Oct 2008 22:56:13 +0000</pubDate>

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	<language>en</language>

<item>
<title><![CDATA[वह कब आयेगी]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=969</link>
<pubDate>Sat, 26 Apr 2008 10:43:40 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/04/26/wah-kab-aayegii/</guid>
<description><![CDATA[वह कब आयेगी जो मुझे चाहेगी
जिसका इ‍ंति]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">वह कब आयेगी जो मुझे चाहेगी<br />
जिसका इ‍ंतिज़ार करता हूँ यारा<br />
जिसके लिए फिरता हूँ मारा-मारा<br />
वह कब आयेगी जो मुझे चाहेगी<br />
वह कब आयेगी जो मुझे चाहेगी</span></p>
<p><span style="color:#000000;">हमने राहों में लाखों हसीं देखे हैं<br />
उनकी बाँहों में हमनशीं देखे हैं<br />
मेरी कब कोई हमनशीं होगी<br />
हाँ, मेरी कब कोई हमनशीं होगी<br />
वह जो मेरी जान जाँनशीं होगी</span></p>
<p><span style="color:#000000;">वह कब आयेगी जो मुझे चाहेगी<br />
अपना बनाके मुझे इश्क़ सिखायेगी<br />
वह कब आयेगी जो मुझे चाहेगी</span></p>
<p><span style="color:#000000;">सोचो बीस बरस गुज़रे तन्हा-तन्हा<br />
अब न रहना मुझे तन्हा-तन्हा<br />
कह दो उसे जाकर मुझे दरस दे<br />
न मुझे दूरी का इक और बरस दे<br />
मेरी जान में जान कब आयेगी</span></p>
<p><span style="color:#000000;">वह कब आयेगी जो मुझे चाहेगी<br />
जिसका इ‍ंतिज़ार करता हूँ यारा<br />
जिसके लिए फिरता हूँ मारा-मारा</span></p>
<p><span style="color:#000000;">उससे कहो अपनी इक झलक दे<br />
ज़मीं तो मिली है थोड़ा फ़लक़ दे<br />
अब जिस्म से जान, अब जायेगी<br />
वह मुझे और कितना तड़पायेगी<br />
विरह की सूनी रतियाँ सुलगायेगी</span></p>
<p><span style="color:#000000;">वह अब आयेगी जो मुझे चाहेगी<br />
जिसका इंतिज़ार करता हूँ यारा<br />
जिसके लिए फिरता हूँ मारा-मारा</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[रोज़ सपनों में आता है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=785</link>
<pubDate>Fri, 15 Feb 2008 14:36:33 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/02/15/roz-sapanon-mein-aata-hai/</guid>
<description><![CDATA[रोज़ सपनों में आता है
इन रातों में जगात]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">रोज़ सपनों में आता है<br />
इन रातों में जगाता है<br />
मैं क्यों न जानूँ उसको<br />
मैं न पहचानूँ उसको</font></p>
<p><font color="#000000">वह मुझसे अजनबी है<br />
लेकिन मेरा हमनशीं है<br />
मैं क्या नाम दूँ उसको<br />
यह दिल दिया जिसको<br />
उसके लिए दीवानी हूँ<br />
उस चाँद की चाँदनी हूँ<br />
जाने कब मिलूँगी उसे<br />
महसूस करती हूँ जिसे</font></p>
<p><font color="#000000">रोज़ सपनों में आता है<br />
इन रातों में जगाता है<br />
मैं क्यों न जानूँ उसको<br />
मैं न पहचानूँ उसको</font></p>
<p><font color="#000000">उसकी ख़ुशबू साँसों में<br />
उसका चेहरा आँखों में<br />
जाने कैसा नशा छाया<br />
जाने कैसा जादू चलाया<br />
वह हसरत बन गया<br />
वह मोहब्बत बन गया<br />
जाने कब मिलूँगी उसे<br />
महसूस करती हूँ जिसे</font></p>
<p><font color="#000000">रोज़ सपनों में आता है<br />
इन रातों में जगाता है<br />
मैं क्यों न जानूँ उसको<br />
मैं न पहचानूँ उसको</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[जब पतझड़ के मौसम आते हैं]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=780</link>
<pubDate>Fri, 15 Feb 2008 08:14:35 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/02/15/jab-patajhar-ke-mausam-aate-hain/</guid>
<description><![CDATA[तुझे देखा तू ही मेरी हमनशीं
तुझे चाहा ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">तुझे देखा तू ही मेरी हमनशीं<br />
तुझे चाहा तू ही मेरी जान-सी<br />
तुझे देखा मैंने तुझे चाहा तुझे<br />
सिर्फ़ तू ही मेरी सखी, सखी...</font></p>
<p><font color="#000000">जब पतझड़ के मौसम आते हैं<br />
पेड़ों से पत्ते पीले झड़ जाते हैं<br />
जब पतझड़ के मौसम आते हैं<br />
पेड़ों से पत्ते पीले गिर जाते हैं<br />
पत्ते वह फिर से वापस आते हैं<br />
पेड़ों पर फिर से वापस आते हैं<br />
फूलों के गुच्छे हवा में लहराते हैं<br />
आते-आते दिल क़रीब आते हैं</font></p>
<p><font color="#000000">तुझे देखा तू ही मेरी हमनशीं<br />
तुझे चाहा तू ही मेरी जान-सी<br />
तुझे देखा मैंने तुझे चाहा तुझे<br />
सिर्फ़ तू ही मेरी सखी, सखी...</font></p>
<p><font color="#000000">परवाने शमअ पर मर मिटते हैं<br />
आशिक़ ऐसे कहाँ कब मिलते हैं<br />
दीवाने शमअ पर मर मिटते हैं<br />
साहिब, ऐसे कहाँ अब मिलते हैं<br />
होते हैं उजाले मिटते जाते अँधेरे<br />
दो दिल मिल जायें होते हैं सवेरे<br />
दिए जलते हैं व गुल खिलते हैं<br />
लम्हे रुकते हैं, ख़्याल बहते हैं</font></p>
<p><font color="#000000">तुझे देखा तू ही मेरी हमनशीं<br />
तुझे चाहा तू ही मेरी जान-सी<br />
तुझे देखा मैंने तुझे चाहा तुझे<br />
सिर्फ़ तू ही मेरी सखी, सखी...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[राहों में ढूँढ़ता हूँ कभी]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=747</link>
<pubDate>Mon, 11 Feb 2008 15:24:44 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/02/11/raahon-mein-dhhoomdhhata-hoon-kabhii/</guid>
<description><![CDATA[राहों में ढूँढ़ता हूँ कभी
तुम मिलती नह]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">राहों में ढूँढ़ता हूँ कभी<br />
तुम मिलती नहीं यह भी सही<br />
जानो न जानो प्यार क्या<br />
है यह इक नशा-सा<br />
उतरता नहीं आँखों से पलकों पर भी</font></p>
<p><font color="#000000">चाहता है दिल यह, पास तुम रहो<br />
कोई तस्वीर जो आँखों में<br />
छुपाकर रखी थी<br />
समझता नहीं क्यों मैं<br />
कि वह हक़ीक़त हो नहीं सकती</font></p>
<p><font color="#000000">राहों में ढूँढ़ता हूँ कभी<br />
तुम मिलती नहीं यह भी सही</font></p>
<p><font color="#000000">इक़रार है ज़ुबाँ पर<br />
क्या करूँ दिल राज़ी नहीं<br />
हो रहा जो अभी<br />
पहले ऐसा कभी हुआ नहीं<br />
सपनों पर अपने अब यक़ीं रहा नहीं</font></p>
<p><font color="#000000">क्या करूँ अभी वह मैं जानता नहीं<br />
इक सवाल है दिल में मेरे<br />
जो कभी तुम मिलो<br />
तो पूछ लूँगा तुम्हीं से हमनशीं<br />
क्या तुम मिलोगी मुझसे कभी</font></p>
<p><font color="#000000">राहों में ढूँढ़ता हूँ कभी<br />
तुम मिलती नहीं यह भी सही</font></p>
<p><font color="#000000">आ जाओ यहाँ तुम तोड़कर बन्धन<br />
तेरा इन्तिज़ार करता हूँ<br />
समझता था जो पहले वह था ग़लत<br />
जब तुम नज़रों में समाये<br />
तब जाके जाना क्या ग़लत क्या सही</font></p>
<p><font color="#000000">राहों में ढूँढ़ता हूँ कभी<br />
तुम मिलती नहीं यह भी सही...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[खोया-खोया फिरता हूँ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=733</link>
<pubDate>Sat, 09 Feb 2008 10:26:30 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/02/09/khoya-khoya-firata-hoon/</guid>
<description><![CDATA[खोया-खोया फिरता हूँ
तेरे बिना ज़िन्दगी
]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">खोया-खोया फिरता हूँ<br />
तेरे बिना ज़िन्दगी<br />
तू जो मिल जाये मुझे<br />
सँवर जाये ज़िन्दगी</font></p>
<p><font color="#000000">तू नहीं तो कुछ नहीं<br />
कुछ भी नहीं<br />
क़सम है तुझे मेरी<br />
अब आ भी जा</font></p>
<p><font color="#000000">तू गयी इतनी दूर<br />
मैं रहा तुझको ढूँढ़<br />
प्यार का है असर<br />
ओ मेरी जाने-जिगर</font></p>
<p><font color="#000000">बस मेरी है तू<br />
प्यार है इक इम्तिहाँ<br />
खो गयी है तू<br />
जान हो गयी इन्तिहाँ</font></p>
<p><font color="#000000">खोया-खोया फिरता हूँ<br />
तेरे बिना ज़िन्दगी</font></p>
<p><font color="#000000">तू कहाँ है बता<br />
ओ मेरी दिलरुबा<br />
तेरे बिना रूठ गयी<br />
मुझसे हर ख़ुशी</font></p>
<p><font color="#000000">ओ चाँदनी मेरी<br />
तुझसे ही मेरी ख़ुशी<br />
अब आ भी जा<br />
ओ मेरे हमनशीं</font></p>
<p><font color="#000000">खोया-खोया फिरता हूँ<br />
तेरे बिना ज़िन्दगी<br />
तू जो मिल जाये मुझे<br />
सँवर जाये ज़िन्दगी</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
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