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Blogs about: हल्बी

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एसे एसे मँडई कोंडागाँव चो ... Ese Ese Mandai Kondagaon Cho12 comments

cgsongs wrote 3 months ago: धान की फसल कट कर खलिहान में आ गयी और मिंजाई हो जाने के साथ ही बस्तर अंचल ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण छत्त … more →

टैग: छत्तीसगढ़ी गीत, हरिहर वैष्णव, खीरेन्द्र यादव, तरुण पाणिग्राही, बस्तर, दुष्यंत ढाली, कामिनी श्रीवास्तव, चापड़ा चटनी, महेश पाण्डे

भुरँग रुसी तो आय एबे ... Bhurung Rusi To Aay Ebe7 comments

cgsongs wrote 5 months ago: विश्व की अनेकानेक जनजातीय संस्कृतियों की तरह ही बस्तर की आदिवासी एवं लोक संस्कृति में भी संगीत का बह … more →

टैग: गीति कथा, हरिहर वैष्णव, बस्तर, जगार गीत, गुरुमाय केलमनी, गुरुमाय जयमनी, लछमी जगार

माहालखी एबे तप ने बससोत ... Mahalakhi ebe tap ne bassot3 comments

cgsongs wrote 5 months ago: सावन-भादों के महीने में जब धान के खेतों में निंदाई (निंजानी/निराई) का काम चल रहा होता तब बस्तर अंचल … more →

टैग: गीति कथा, हरिहर वैष्णव, बस्तर, दसमी बाई

आट मनिया काकड़ा ... Aath Maniya Kakda10 comments

cgsongs wrote 7 months ago: बस्तर अंचल के हल्बी-भतरी और बस्तरी परिवेश में धनकुल गीतों की महत्त्वपूर्ण परम्परा रही है। धनकुल गीत … more →

टैग: गीति कथा, हरिहर वैष्णव, बस्तर, चाखना, अर्चना मिश्र, खेम वैष्णव, भतरी, धनकुल गीत

एक दिन ले दुय दिन ... Ek Din Le Duy Din5 comments

cgsongs wrote 9 months ago: हल्बी जनभाषा में गाये जाने वाले ‘तीजा जगार’ का आयोजन ‘अमुस तिहार’1 के बाद आर … more →

टैग: गीति कथा, हरिहर वैष्णव, जगार गीत, तिजा जगार, सुकदई, सोमारी

किरिस्ना चो खेलतो-बाड़तो ... Kirisna Cho Khelto Barto10 comments

cgsongs wrote 9 months ago: छत्तीसगढ़ में बस्तर अंचल के हल्बी-भतरी परिवेश में ‘जगार गीत’ या ‘धनकुल गीत’ … more →

टैग: गीति कथा, हरिहर वैष्णव, आठे जगार, भानमती, हीरामनी, जगार गीत, धनकुल गीत

सुरिज राजा मोर आसे एबे ... Surij Raja Mor Aase Ebe10 comments

cgsongs wrote 10 months ago: सावन-भादों के महीने में जब धान के खेतों में निंदाई (निंजानी/निराई) का काम चल रहा होता तब बस्तर अंचल … more →

टैग: गीति कथा, हरिहर वैष्णव, बस्तर, दसमी बाई

झिमिर-झिमिर मारेसे पानी ... Jhimir Jhimir Marese Pani10 comments

cgsongs wrote 10 months ago: वर्षा ऋतु आरम्भ होते ही मन-मयूर नाच उठता है। सावन-भादों मानो अमृत बरसाते हैं। वर्षा का आगमन किसान के … more →

टैग: भूली बिसरी यादें, खीरेन्द्र यादव, तरुण पाणिग्राही, नन्दा शील, बस्तर, रेला, सुकसी पुड़गा, हरिहर वैष्णव


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