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	<title>हवा &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/हवा/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "हवा"</description>
	<pubDate>Sun, 20 Jul 2008 10:54:39 +0000</pubDate>

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	<language>en</language>

<item>
<title><![CDATA[खिली-खिली महकी बहारें हैं]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=971</link>
<pubDate>Wed, 07 May 2008 02:35:50 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=971</guid>
<description><![CDATA[खिली-खिली महकी बहारें हैं
झीलों पर बहत]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">खिली-खिली महकी बहारें हैं<br />
झीलों पर बहते शिकारें हैं<br />
ठण्डी-ठण्डी सौंधी हवाएँ हैं<br />
गीले पत्तों को खनकाएँ हैं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">जाने कैसी तलब जागी है<br />
जाने किसका इन्तिज़ार है<br />
बेज़ार-सा यह दिल मेरा<br />
किसके लिए गुलज़ार है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">आज ऐसा क्यों लग रहा है<br />
नये-नये सब नज़ारें हैं<br />
खिली-खिली महकी बहारें हैं<br />
झीलों पर बहते शिकारें हैं</span></p>
<p><span style="color:#000000;">शबनमी रातों का यह चाँद<br />
और उजली-उजली चाँदनी<br />
आइनाए-दिल में कौन यार है<br />
इश्क़ जिससे वजहसार है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">बंजर ज़मीने-दिल से आज<br />
उलझे हुए मखमली धारे हैं<br />
खिली-खिली महकी बहारें हैं<br />
झीलों पर बहते शिकारें हैं</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[हवा ]]></title>
<link>http://kmuskan.wordpress.com/?p=30</link>
<pubDate>Sat, 03 May 2008 11:19:58 +0000</pubDate>
<dc:creator>kmuskan</dc:creator>
<guid>http://kmuskan.wordpress.com/?p=30</guid>
<description><![CDATA[बहते- बहते जब थक गई हवा बेचारी
तो आराम क]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>बहते- बहते जब थक गई हवा बेचारी<br />
तो आराम करने उतरी मेरे अगंना।</p>
<p>िफर मेरी बिगया मे िकया खूब धमाल<br />
पेड पौधो- संग िमलकर खूब मचाई धमा  चौकडी।</p>
<p>डाल से टूटे पतो को हवा मे उडाया कभी<br />
कभी िदया जमीन पर पटक ।</p>
<p>कभी धूप मे पडे कपडो को<br />
यहाँ से वहाँ िबखरा िदया।</p>
<p>दादाजी के कुरते मे घुसकर खूब िकया तंग<br />
पर जब समय का खयाल आया<br />
तो उड  गए उसके होश<br />
बोली चलती हूं हो गई देर ।</p>
<p>लोट के िफर आऊगी<br />
खूब धमा -चौकडी मचाऊगी</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[मैं हूँ चाँद है तुम भी होगी कहीं]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=864</link>
<pubDate>Fri, 29 Feb 2008 15:19:37 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=864</guid>
<description><![CDATA[मैं हूँ, चाँद है, तुम भी होगी कहीं
मैं द]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">मैं हूँ, चाँद है, तुम भी होगी कहीं<br />
मैं देखता हूँ जो चाँद को...<br />
तुम भी इसे देखती होगी कहीं</font></p>
<p><font color="#000000">माहे-कामिल ने देखा है मुझे<br />
तेरे पाँव के निशाँ पे सजदा करते हुए<br />
सहर उस वक़्त दरक रही थी<br />
सूरज आ रहा था कमसिन किरनें लिए</font></p>
<p><font color="#000000">यह हवा यह घटाएँ<br />
सभी से मैंने कहा था, कहना<br />
मुझे प्यार है तुमसे<br />
जाने तुमने मेरी सदा को<br />
महसूस किया होगा कि नहीं</font></p>
<p><font color="#000000">मैं तन्हा ही तन्हाइयों को दोहराता हूँ<br />
दिल की सदाओं से तुमको बुलाता हूँ<br />
तुम चले आओ सुनकर मेरी सदा<br />
मैं रोज़ ही गीली पलकें सुखाता हूँ</font></p>
<p><font color="#000000">मेरी आँखों ने देखे हैं<br />
कई टूटते हुए सितारे<br />
जिनको तुमने भी देखा होगा<br />
जाने उन्होंने तुमको मेरी<br />
क़िस्मत में लिखा होगा कि नहीं</font></p>
<p>माहे-कामिल= full moon, पूर्णिमा का चाँद</p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १८ मई २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[तेरी अदाओं पर मैं फ़िदा]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=787</link>
<pubDate>Sat, 16 Feb 2008 05:48:36 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=787</guid>
<description><![CDATA[साहिबा, साहिबा, साहिबा
तेरी अदाओं पर म]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">साहिबा, साहिबा, साहिबा<br />
तेरी अदाओं पर मैं फ़िदा<br />
साहिबा, साहिबा, साहिबा</font></p>
<p><font color="#000000">तू मेरे प्यार की सुबह<br />
तुझको ढूँढ़ती मेरी निगाह<br />
क़ातिलाना तेरी हर अदा<br />
मार न डाले कहीं दिलरुबा</font></p>
<p><font color="#000000">साहिबा, साहिबा, साहिबा<br />
साहिबा, साहिबा, साहिबा</font></p>
<p><font color="#000000">जवानी के जोश में जवाँ<br />
हो न जाये कोई ख़ता<br />
वाक़िफ़ नहीं तू मेरे इश्क़ से<br />
हमनज़र बचके जायेगी कहाँ</font></p>
<p><font color="#000000">साहिबा, साहिबा, साहिबा<br />
साहिबा, साहिबा, साहिबा</font></p>
<p><font color="#000000">तू जान है मेरे जिस्म की<br />
कैसे रहेगी मुझसे जुदा<br />
देख हाल मेरा बेहाल है<br />
दूर कैसे तू मेरी जाने-वफ़ा</font></p>
<p><font color="#000000">साहिबा, साहिबा, साहिबा<br />
साहिबा, साहिबा, साहिबा</font></p>
<p><font color="#000000">उड़ती-उड़ती तू चली कहाँ<br />
तू पतंग है मेरी मैं हवा<br />
तू किस सोच में डूबी है<br />
सुन तो बात मेरी ज़रा</font></p>
<p><font color="#000000">साहिबा, साहिबा, साहिबा<br />
साहिबा, साहिबा, साहिबा</font></p>
<p><font color="#000000">हसीना तुझको देखकर<br />
हवाओं में कैसा शोर मचा<br />
रुबा से दिलरुबा बनाया<br />
देख तू न होना कभी ख़फ़ा</font></p>
<p><font color="#000000">साहिबा, साहिबा, साहिबा<br />
साहिबा, साहिबा, साहिबा</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[कोई आया है जाने के बाद कब्र पर]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=751</link>
<pubDate>Tue, 12 Feb 2008 10:43:28 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=751</guid>
<description><![CDATA[कोई आया है जाने के बाद क़ब्र पर
वह गया है]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">कोई आया है जाने के बाद क़ब्र पर<br />
वह गया है दो गुल मुझे नज़्र कर<br />
कोई तूफ़ाँ उठा था जो मिट गया है<br />
दे गया है समन्दर जो लुट रहा है<br />
लहरें काट देती हैं कभी साहिल को<br />
साहिल लहरों के साथ बह रहा है</font></p>
<p><font color="#000000">कोई आया है जाने के बाद क़ब्र पर<br />
वह गया है दो गुल मुझे नज़्र कर</font></p>
<p><font color="#000000">ठहरी हवा धूल पर कुछ निशाँ बाक़ी हैं<br />
ख़ामोशी चीरकर सिसकियाँ आती हैं<br />
नक़ाब उठाया जब कायनात मिट चुकी है<br />
वह आँधी भी सब तबाह कर चुकी है<br />
जो रह गया है दिल में वह वीराना है<br />
ज़िन्दगी, साँसों का साथ निभाना है</font></p>
<p><font color="#000000">कोई आया है जाने के बाद क़ब्र पर<br />
वह गया है दो गुल मुझे नज़्र कर...</font></p>
<p><font color="#000000">वह महज़ राख हाथों में भर सकते हैं<br />
खाक पर अपना नाम लिख सकते हैं<br />
हवा पर जो मेरे क़दमों के निशाँ छूटे<br />
वह उन पर कभी नहीं चल सकते हैं<br />
बहुत ज़्यादा इतना कर सकते हैं<br />
बैठकर जाती हुई तारीख़ें गिन सकते हैं</font></p>
<p><font color="#000000">कोई आया है जाने के बाद कब्र पर<br />
वह गया है दो गुल मुझे नज़्र कर...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[यादों का सागर]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/15/%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a4%b0/</link>
<pubDate>Sat, 15 Sep 2007 19:32:08 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/15/%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a4%b0/</guid>
<description><![CDATA[यादों का सागर
गहरा है
उसमें डूब जाऊँ त]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">यादों का सागर<br />
गहरा है<br />
उसमें डूब जाऊँ तो<br />
वक़्त का हर लम्हा<br />
ठहरा है<br />
कोई काँटा-सा है<br />
जो लग गया है<br />
इक फाँस-सा है<br />
और फँस गया है<br />
कोई आवाज़<br />
हमें देता नहीं<br />
क्या वो मकान<br />
वीराँ हो गया है<br />
क्या शाखों पर<br />
गुल खिलते नहीं<br />
या हवाओं का<br />
रुख़ बदल गया है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००२</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[बारिश जैसी हो तुम]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/15/%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b6-%e0%a4%9c%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%ae/</link>
<pubDate>Sat, 15 Sep 2007 13:56:44 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[खिली हुई शाम की बिखरी हुई धूप में
बारि]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">खिली हुई शाम की बिखरी हुई धूप में<br />
बारिश जैसी हो तुम<br />
ये लाल फूल खिले हुए हैं<br />
तुम्हारी यादों की तरह<br />
ये भीगे हुए पत्तों पर हवा की सरसराहट-से हैं<br />
बहते हुए तुम्हारे ख़्याल...</font></p>
<p><font color="#000000">तन्हा शाम ऐसे खु़शनुमा मौसम में<br />
तुमसे दूर मेरे साथ और भी ग़मगीन<br />
और ज़्यादा नागँवार हो गयी है<br />
कहाँ हो तुम?<br />
तुम्हारे एहसास, तुम्हारी याद, तुम्हारे ख़्याल<br />
सब मुझे तन्हाई की सूली पर चढ़ा रहे हैं...</font></p>
<p><font color="#000000">अब तो आ जाओ<br />
या अपने पास बुला लो मुझे<br />
मेरे महबूब मेरे मसीहा<br />
बादे-खु़दा सब तेरा है...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ठंडी हवा का एक झोका गुजरा...]]></title>
<link>http://meredilne.wordpress.com/?p=22</link>
<pubDate>Fri, 06 Jun 2008 15:23:44 +0000</pubDate>
<dc:creator>Amarjeet Singh</dc:creator>
<guid>http://meredilne.wordpress.com/?p=22</guid>
<description><![CDATA[ठंडी हवा का एक झोका गुजरा,
जैसे मेरा या]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>ठंडी हवा का एक झोका गुजरा,<br />
जैसे मेरा यार मुस्कुराता हुआ गुजरा,</p>
<p>दिल मे मेरे एक उदासी सी छाई,<br />
तकदीर मुझे उनसे कही दूर ले आई,</p>
<p>ज़िंदगी से भी ज्यादा वो करीब मेरे,<br />
पास हो के भी चाँद जैसे दूर मेरे,</p>
<p>जाग रहा हूँ सदियों से मैं ऐसे,<br />
सो रहे है मस्ती से वो जैसे,</p>
<p>पलके अब मेरी इस कदर भर आई,<br />
बरखा बाहर जैसे उनके लिए ही आई,</p>
]]></content:encoded>
</item>

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