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	<title>हसरत &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/हसरत/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "हसरत"</description>
	<pubDate>Tue, 07 Oct 2008 17:46:12 +0000</pubDate>

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<item>
<title><![CDATA[मैंने अक्सर खोया है उसे]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=1089</link>
<pubDate>Thu, 04 Sep 2008 13:56:47 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/09/04/maine-aksar-khoyaa-hai-use/</guid>
<description><![CDATA[मैंने अक्सर खोया है उसे
जो मेरे दिल के ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">मैंने अक्सर खोया है उसे<br />
जो मेरे दिल के क़रीब आ जाता है<br />
जब किसी की चाह में भटकता हूँ<br />
यह दिल बहुत समझाता है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">शायद इसी एक वजह से<br />
किसी की हसरत से जी डरता है<br />
बेपनाह प्यार करता है जिससे<br />
तिल-तिलकर उसके लिए मरता है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">कई बार मातम में ख़ुद को<br />
सफ़ेद पोशाक पहने हुए  देखा है मैंने<br />
इसीलिए इक दीवार उठा रखी है<br />
निगाहो-निगाहे-पनाह के बीच मैंने</span></p>
<p><span style="color:#000000;">हर शाम ज़हन के दरवाज़े पर<br />
इक माज़ी की दस्तक होती है<br />
तेरा पुराना पता पूछती ज़िन्दगी<br />
मुझसे रोज़ ही रूब-रू होती है</span></p>
<p><span style="color:#000000;">वह यह बारहा कहती है मुझसे<br />
मुझे इश्क़ है तुझसे, तुझी से<br />
और मैं आँख चुराके कहता हूँ<br />
मुझे इश्क़ नहीं तुझसे, किसी से</span></p>
<p><span style="color:#000000;">क्यों चली आयी है इस राह<br />
ख़ुशबू के आवारा बादल की तरह<br />
कि नाचीज़ का दिल काला है<br />
तेरी आँखों के काजल की तरह</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[उम्मीद जागी है इक बार फिर तुम्हें पाने की]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=923</link>
<pubDate>Sat, 15 Mar 2008 04:13:13 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/03/15/ummeed-jaagii-hai-ek-baar-phir-tumhein-paane-kii/</guid>
<description><![CDATA[उम्मीद जागी है इक बार फिर तुम्हें पाने]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">उम्मीद जागी है इक बार फिर तुम्हें पाने की<br />
बचाये ख़ुदा! नज़र न लग जाये ज़माने की</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी जुस्त-जू को न मिटा सका कोई वक़्त-रू<br />
दिल में एक हसरत है सो तुम्हें पाने की</font></p>
<p>वक़्त-रू= समय का चेहरा, face of time</p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[गम मुझे हसरत मुझे]]></title>
<link>http://jagjitsingh.wordpress.com/2008/03/11/gham-mujhe-hasrat-mujhe/</link>
<pubDate>Tue, 11 Mar 2008 13:21:38 +0000</pubDate>
<dc:creator>Amarjeet Singh</dc:creator>
<guid>http://jagjitsingh.hi.wordpress.com/2008/03/11/gham-mujhe-hasrat-mujhe/</guid>
<description><![CDATA[गम मुझे हसरत मुझे वहशत मुझे सौदा मुझे,
]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>गम मुझे हसरत मुझे वहशत मुझे सौदा मुझे,<br />
एक दिल देकर खुदा ने दे दिया क्या क्या मुझे,</p>
<p>ये नमाज-ऐ-इश्क है कैसा आदाब किसका आदाब,<br />
अपने पाये नाज़ पर करने भी दो सजदा मुझे,</p>
<p>देखते ही देखते दुनिया से मैं उठ जाऊंगा,<br />
देखती ही देखती रह जायेगी दुनिया मुझे</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[रोज़ सपनों में आता है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=785</link>
<pubDate>Fri, 15 Feb 2008 14:36:33 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2008/02/15/roz-sapanon-mein-aata-hai/</guid>
<description><![CDATA[रोज़ सपनों में आता है
इन रातों में जगात]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">रोज़ सपनों में आता है<br />
इन रातों में जगाता है<br />
मैं क्यों न जानूँ उसको<br />
मैं न पहचानूँ उसको</font></p>
<p><font color="#000000">वह मुझसे अजनबी है<br />
लेकिन मेरा हमनशीं है<br />
मैं क्या नाम दूँ उसको<br />
यह दिल दिया जिसको<br />
उसके लिए दीवानी हूँ<br />
उस चाँद की चाँदनी हूँ<br />
जाने कब मिलूँगी उसे<br />
महसूस करती हूँ जिसे</font></p>
<p><font color="#000000">रोज़ सपनों में आता है<br />
इन रातों में जगाता है<br />
मैं क्यों न जानूँ उसको<br />
मैं न पहचानूँ उसको</font></p>
<p><font color="#000000">उसकी ख़ुशबू साँसों में<br />
उसका चेहरा आँखों में<br />
जाने कैसा नशा छाया<br />
जाने कैसा जादू चलाया<br />
वह हसरत बन गया<br />
वह मोहब्बत बन गया<br />
जाने कब मिलूँगी उसे<br />
महसूस करती हूँ जिसे</font></p>
<p><font color="#000000">रोज़ सपनों में आता है<br />
इन रातों में जगाता है<br />
मैं क्यों न जानूँ उसको<br />
मैं न पहचानूँ उसको</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[नामंज़ूर थी पेशकश तुम्हें दिल की]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/12/25/%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a5%9b%e0%a5%82%e0%a4%b0-%e0%a4%a5%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a4%95%e0%a4%b6-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b9%e0%a5%87%e0%a4%82/</link>
<pubDate>Tue, 25 Dec 2007 14:34:34 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2007/12/25/naa-manzoor-thii-peshakash-tumhein-dil-kii/</guid>
<description><![CDATA[नामंज़ूर थी पेशकश तुम्हें दिल की
कैसे द]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">नामंज़ूर थी पेशकश तुम्हें दिल की<br />
कैसे दिखाऊँ तुम्हें उल्फ़त दिल की</font></p>
<p><font color="#000000">मजरूह तेरे प्यार ने मुझको किया<br />
देख क्या हालत हो गयी मेरे दिल की</font></p>
<p><font color="#000000">यह ज़ौक़े-दर्द वह नख़्वत तेरी<br />
कब छुपी है तुमसे हसरत दिल की</font></p>
<p><font color="#000000">यह बेसदा आँखें कुछ कहती हैं सुनो<br />
सुन रहे हो तुम बात ग़लत दिल की</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ुशामद में मेरे कितने ही दिन गये<br />
मगर न हुई इनायत तेरे दिल की</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[कितने ही ज़ख़्म चाक हुए तेरे जाने के बाद]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/12/25/%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a5%9b%e0%a4%96%e0%a4%bc%e0%a5%8d%e0%a4%ae-%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%95-%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%8f-%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%b0/</link>
<pubDate>Tue, 25 Dec 2007 14:27:02 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2007/12/25/kitane-hii-zakhm-chaak-hue-tere-jaane-baad/</guid>
<description><![CDATA[कितने ही ज़ख़्म चाक हुए तेरे जाने के बा]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">कितने ही ज़ख़्म चाक हुए तेरे जाने के बाद<br />
हुए तेरी हसरत में मुए तेरे जाने के बाद</font></p>
<p><font color="#000000">सोहबत किसी दोस्त की रास न आयी हमें<br />
अजनबी से दोस्तों में रहे तेरे जाने के बाद</font></p>
<p><font color="#000000">जब भी पहलू में किसी के यार को देखा हमने<br />
ख़ाहिश तेरी करते रहे तेरे जाने के बाद</font></p>
<p><font color="#000000">दिल का हर टुकड़ा हर एक साँस पे रोता है<br />
हम उसके आँसू पोंछा किये  तेरे जाने के बाद</font></p>
<p><font color="#000000">तुम मिल जाओ अगर ज़ीस्त मिल जाये हमें<br />
जिस्म अपना बचाते रहे तेरे जाने के बाद</font></p>
<p><font color="#000000">उज्र हमको नहीं था तुमसे बात करने को<br />
फिर भी नज़्म लिखते रहे तेरे जाने के बाद</font></p>
<p><font color="#000000">तुमसे जो मरासिम है हमारा वो इश्क़ ही है<br />
हम जी से इसे निभाते रहे तेरे जाने के बाद</font></p>
<p><font color="#000000">फ़िराक़ ने साँसों में इक गाँठ लगा दी है सनम<br />
जतन ढेर छुटाने को किये तेरे जाने के बाद</font></p>
<p><font color="#000000">दर्द और तन्हाई के निश्तर चुभते हैं<br />
हम मान्निद दीवाने हुए तेरे जाने के बाद</font></p>
<p><font color="#000000">तमाशा गरचे अपनी मौत का किसने देखा है<br />
नज़'अ में साँस भरते रहे तेरे जाने के बाद</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[कब मेरे दिल से तेरी याद निकलती है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/12/25/%e0%a4%95%e0%a4%ac-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%95/</link>
<pubDate>Tue, 25 Dec 2007 13:47:36 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2007/12/25/kab-mere-dil-se-terii-yaad-nikalatii-hai/</guid>
<description><![CDATA[&#8220;जो नाला होंठों तक न आया वह दिल का दाग़]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">"जो नाला होंठों तक न आया वह दिल का दाग़ बन गया<br />
हम तो अपनी ख़ैर में भी ख़ुदा-ख़ुदा करते रहे"</font></p>
<p><font color="#000000">कब मेरे दिल से तेरी याद निकलती है<br />
जिस तरफ़ देखिए आबाद निकलती है</font></p>
<p><font color="#000000">तुम रहो जवाँ तुम्हारा हुस्न रहे जवाँ<br />
हर दम पे यही फ़रियाद निकलती है</font></p>
<p><font color="#000000">बेचैन हैं बरसों से दिल की धड़कनें सब<br />
सीने से अटक-अटक जान निकलती है</font></p>
<p><font color="#000000">आँखों में नमी थी सो काई बन गयी रोते-रोते<br />
रही जो आबला-पा से मवाद निकलती है</font></p>
<p><font color="#000000">तुम्हारी हसरत ही में न मर जाऊँ कहीं<br />
ज़बाँ से अब यही एक बात निकलती है</font></p>
<p><font color="#000000">मेल न हो अपना यूँ भी हमारी क़िस्मत है<br />
कि जान अब तो होके बेताब निकलती है</font></p>
<p><font color="#000000">'नज़र'ओ-'विनय' दो नाम एक ही दीवाने के<br />
ग़ज़ल किसी की हो तेरे नाम निकलती है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[नज़र बचते बचाते लड़ ही गयी]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/12/25/%e0%a4%a8%e0%a5%9b%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a4%9a%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%a1%e0%a4%bc-%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%97%e0%a4%af%e0%a5%80/</link>
<pubDate>Tue, 25 Dec 2007 12:40:43 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2007/12/25/nazar-bachate-bachaate-lar-hii-gayii/</guid>
<description><![CDATA[नज़र   बचते   बचाते   लड़   ही   गयी
मय उन]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">नज़र   बचते   बचाते   लड़   ही   गयी<br />
मय उन आँखों की हमें चढ़ ही गयी</font></p>
<p><font color="#000000">पूछो ज़रा गुलपोश से वह कहाँ है<br />
आज मेरी साँस सीने में अड़ ही गयी</font></p>
<p><font color="#000000">तस्व्वुर से तेरे सबात है हमें<br />
जान न पाकर तुम्हें धड़ ही गयी</font></p>
<p><font color="#000000">तुमको देखा तो क्या हसरत बची<br />
प्यार की मस्ती हमें चढ़ ही गयी</font></p>
<p><font color="#000000">हम ख़ाक थे दिल ख़ानाए-ख़ाली था<br />
सरे-राह ज़ीस्त हमसे भिड़ ही गयी</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ख़ाब में लम्स था सुम्बुल का]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/11/30/%e0%a4%96%e0%a4%bc%e0%a4%be%e0%a4%ac-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b2%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ac%e0%a5%81%e0%a4%b2-%e0%a4%95/</link>
<pubDate>Fri, 30 Nov 2007 23:45:50 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2007/11/30/khaab-mein-lams-tha-sumbul-ka/</guid>
<description><![CDATA[ख़स्ताहाल है जो तेरा बीमार
क्यों नहीं ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">ख़स्ताहाल है जो तेरा बीमार<br />
क्यों नहीं हो तुम बेक़रार</font></p>
<p><font color="#000000">तुमने मुझसे बात नहीं की<br />
जला गयी मुझे आहे-शोलाबार</font></p>
<p><font color="#000000">शामे-ग़म मुझे दर्द थे<br />
और तुम आये गोया बहार</font></p>
<p><font color="#000000">पैराहन भीग जाता है लहू से<br />
यूँ बहते हैं दीदाए-फ़िगार</font></p>
<p><font color="#000000">देखना' न छूना मेरे ज़ख़्म<br />
जला न दे तुझे यह शरार</font></p>
<p><font color="#000000">दाइम मशगूले-हक़ हूँ मैं<br />
फिर भी आश्ना है अग़ियार</font></p>
<p><font color="#000000">कोई हसरत से देखे मुझे<br />
मैं उसे बना लूँ अपना प्यार</font></p>
<p><font color="#000000">तुमसे दोस्ती का बहाना मिले<br />
बन जाओ मेरे ग़मख़्वार</font></p>
<p><font color="#000000">ख़ाब में लम्स था सुम्बुल का<br />
वो क्या लम्हा था यादगार</font></p>
<p><font color="#000000">'नज़र' को न भाये कुछ अगर<br />
तो दिल में हो तुम बरक़रार</font></p>
<p>ख़स्ताहाल= abandon, बीमार= ill, बेक़रार= curious, आह= ah!, woe, शोला= fire, spark, गोया= like that, पैराहन= cloth, लहू= blood, दीदा= eyes, फ़िगार= afflicted, sore, ज़ख़्म= scar, wound, शरार= fire, spark, दाइम= always, मशगूल= busy, हक़= truth, आश्ना= friend, अग़ियार= enemy, ग़मख़्वार= who share sorrow, लम्स= touch, सुम्बुल= sumbul</p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र'<br />
लेखन वर्ष: २००५</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[दिल में तेरे लिए सच्ची अक़ीदत है]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/20/%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%9c%e0%a5%8b-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b9%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%a4%e0%a5%8b-%e0%a4%97%e0%a5%81/</link>
<pubDate>Thu, 20 Sep 2007 06:37:12 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2007/09/20/dil-mein-tere-liye-sachchii-aqeedat-hai/</guid>
<description><![CDATA[है जो किसी से तुम्हें तो गुल से निस्बत ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">है जो किसी से तुम्हें तो गुल से निस्बत है<br />
तुम मुझको मिले हो ये मेरी क़िस्मत है</font></p>
<p><font color="#000000">तेरे तब्बसुम से ही है ये रंगे-बहार<br />
लगता है अब जैसे सारी फ़िज़ा जन्नत है</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी आँखों की गुलाबी डोरियाँ जैसे नश्शा-ए-मै<br />
तिश्ना-लब हूँ मुझे पीने की हसरत है</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी ज़ुल्फ़ों से गुज़रते देखी है मैंने सबा<br />
हाए ये सबा भी कितनी खु़श-क़िस्मत है</font></p>
<p><font color="#000000">तेरे अबरू मानिन्दे-कमान उठते हैं<br />
मुझको तेरे आगोश में मरने की चाहत है</font></p>
<p><font color="#000000">तेरे लब हैं की पंखुड़ियाँ गुलाब की हैं<br />
इक बोसा पाने को शबो-रोज़ की मिन्नत है</font></p>
<p><font color="#000000">सुना है जन्नत की हूरों के बारे में बहुत<br />
मगर उनमें कहाँ ये कशिशे-क़ामत है</font></p>
<p><font color="#000000">देखा है तुमने कभी चाँद को सरे-शाम<br />
एक वही है जो तेरी तरह खू़बसूरत है</font></p>
<p><font color="#000000">हो तुम ही मानिन्दे-खु़दा मेरे लिए<br />
दिल में तेरे लिए सच्ची अक़ीदत है</font></p>
<p><font color="#000000">तुम क़रीब होते हो दर्द मिट जाते हैं<br />
तुमसे ही मुझको होती नसीब फ़रहत है</font></p>
<p><font color="#000000">तुम्हें देखा तो मैंने अपनी ज़िन्दगी देखी<br />
तुमको चाहना ही खु़दा की इबादत है</font></p>
<p><font color="#000000">मेरा दिल जितना चाहता है तुमको सनम<br />
तुम्हें भी मुझसे उतनी ही मोहब्बत है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'<br />
लेखन वर्ष: २६/०७/२००४ <a href="http://vinayprajapati.iblog.com/post/222399/416165"></a></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[हमने अबस की आरज़ू छोड़ दी]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/20/%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%85%e0%a4%ac%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%86%e0%a4%b0%e0%a5%9b%e0%a5%82-%e0%a4%9b%e0%a5%8b%e0%a4%a1%e0%a4%bc-%e0%a4%a6%e0%a5%80/</link>
<pubDate>Thu, 20 Sep 2007 06:34:50 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2007/09/20/ham-ne-abas-kii-aarazoo-chhor-dii/</guid>
<description><![CDATA[हमने अबस की आरज़ू छोड़ दी
तुमको पाने की ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">हमने अबस की आरज़ू छोड़ दी<br />
तुमको पाने की जुस्तजू छोड़ दी</font></p>
<p><font color="#000000">चाक़ जिगर को गरेबाँ में छिपाके<br />
हमने हसरते-रफ़ू छोड़ दी</font></p>
<p><font color="#000000">बुलाता रहा माज़ी पलट-पलट के<br />
मगर अब इश्क़ की खू़ छोड़ दी</font></p>
<p><font color="#000000">मैं हूँ अधूरी खा़हिशों का मुब्तिला<br />
ग़ालिबन हमने वो बाज़ू छोड़ दी</font></p>
<p><font color="#000000">है आज मौसम बदला-बदला<br />
वो गुफ़्तार वो गुफ़्तगू छोड़ दी</font></p>
<p><font color="#000000">हर  जगह पाओगे तुम मुझको<br />
मैंने मेरी नज़र चार-सू छोड़ दी</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'<br />
लेखन वर्ष: ३१ जुलाई २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[अब 'विनय' तेरे ग़म से ग़ाफ़िल नहीं रहा]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/19/%e0%a4%85%e0%a4%ac-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a4%af-%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a5%9a%e0%a4%ae-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a5%9a%e0%a4%be%e0%a5%9e%e0%a4%bf%e0%a4%b2-%e0%a4%a8%e0%a4%b9/</link>
<pubDate>Wed, 19 Sep 2007 19:45:51 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.hi.wordpress.com/2007/09/19/ab-vinay-tere-gham-se-ghafil-nahiin-raha/</guid>
<description><![CDATA[अब ‘विनय’ तेरे ग़म से ग़ाफ़िल नहीं रहा
दे]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">अब ‘विनय’ तेरे ग़म से ग़ाफ़िल नहीं रहा<br />
देख तो वो मग़रूर वो संगदिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">हमें कोई शिबासी दे हमने तेरा राज़ न खोला<br />
पर जानाँ ये जान लो मैं बातिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी कही सुनी सब मुझे वक़्त ने भुला दी<br />
ये ग़ैर तेरी दुश्मनी के क़ाबिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">हमें जब नाज़ थे तो ये दर्द किसलिए हैं<br />
तेरे बाद कोई चेहरा मुस्तक़िल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">तुम हमसे पूछो वह शामे-माज़ी की तन्हाई<br />
कभी कोई इतना दिल में दाख़िल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">तुमने ख़ुद मुझे अपना दोस्त बनाया होता<br />
तुम्हें तो कोई काम कभी मुश्किल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">हमसे एक-एक कर सब हाथ छूटते गये<br />
मेरे कूचे में वो माहे-कामिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">सद्-हैफ़ो-अफ़सोस से कलेजा भर आया<br />
हाए मुझे सिवा ग़म कुछ हासिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">हमें कोई देता ताक़ते-नज़्ज़ाराए-हुस्न<br />
सुना  है मेरी राह में कोई हाइल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">साँसों का धुँआ दिल को दर्द देता है बहुत<br />
ज़िन्दगी में बाइसे-मसाइल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">वो गुफ़्त-गू वो मशविरे वो बयान अपने<br />
ख़ुदा के ज़ख़्म देखे तो मैं बिस्मिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">गर्दिशे-अय्याम की रवानी देखकर<br />
मेरा दिले-सौदा मुज़महिल</font><font color="#c0c0c0">1</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">अब इस चमन में फिरती है खुश्क सबा<br />
मस्जूदा कोई जल्वाए-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">किसके दिन उम्रभर एक से रहते हैं<br />
मुझमें तो वो हुस्ने-अमल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मेरी काविश</font><font color="#c0c0c0">2</font> का किसी राह तो हासिल होगा<br />
हैफ़ मेरे ग़म की कोई मंज़िल नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">मैं अहदे-ज़ीस्त करके किससे तोड़ूँ<br />
मुझे तफ़रकाए-नाक़िसो-कामिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मुझे तुम छोड़कर गये लेकिन क्या बताऊँ<br />
एक अरसा बर्क़े-सोज़े-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">तुमको जाना है तो जाओ कब हमने रोका है<br />
किसी के जाने का ग़म हमें बिल्कुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">इस दरया को ख़्वाहिश है समंदर की<br />
और सहाब का बरसना मुसलसल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">सू-ए-शिर्क सजदे-मस्जूद किये मैंने<br />
क्योंकि मैं तेरे कूचे का माइल</font><font color="#c0c0c0">3</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">अब किससे करूँगा उसकी जफ़ा का शिकवा<br />
आज से कोई दराज़ दस्तिए-क़ातिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">इस ज़र्फ़ कोई आये तो देखे हाल बीमार का<br />
वो पुरसिशे-जराहते-दिल</font><font color="#c0c0c0">4</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">अच्छा हुआ तुमने रोज़े-आख़िर न बोला<br />
रोज़े-विदा से कोई उक़्दाए-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">दु:ख गिनते-गिनते उम्र कट जायेगी<br />
किसी की इनायत किसी का तग़ाफ़ुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">फ़िज़ा क्यों इतनी ख़ामोश है गुलशन में<br />
क्या आशियाँ में नालाए-बुलबुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">था तब मिला नहीं, खोकर मिलता है कौन<br />
दिल मुझे ख़्याले-यारे-वस्ल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मैं जिसको दोस्त कह नहीं सकता अब<br />
मुझे उसके लिए जज़्बाए-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">किसको खरोंचे हो अपने नाख़ून से तुम<br />
इस सीने में कोई जराहते-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">उर्दी-ओ-दै का अब मैं क्या ख़्याल रखूँ<br />
ये कैसी जलन, मुझे तपिशे-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">अपनी यकताई पर बेहद नाज़ था हमको<br />
आज भी है लेकिन वो मुतक़ाबिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">अब भी खिलती है शुआहाए-ख़ुर-फ़ज़िर <br />
मगर फ़िज़ा में शाहिद-ए-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">बहुत ढूँढ़ा हमने उसके जैसा, न पाया एक<br />
वो नमकपाशे-ख़राशे-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">अब ख़ुल्द में रहें या दोज़ख में रहें हम<br />
ऐ सनम मेरा तो आबो-गिल</font><font color="#c0c0c0">5</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">उस फ़ितनाख़ेज़ का नहीं अब डर मुझको<br />
कि मेरे दिल में स’इ-ए-बेहासिल</font><font color="#c0c0c0">6</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">आँखों से निक़ाब उठाओ कि वहम खुल जाये<br />
कि तुझमें वो तर्ज़े-तग़ाफ़ुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">कहने को तो ज़ामिन नहीं मुझसा ज़माने में<br />
पर जाने क्यों मुझे तहम्मुल</font><font color="#c0c0c0">7</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">वो जिसकी चाप से धड़कनें रुक जायें थीं<br />
ज़िन्दगी में वो हौले-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">ऐ लोगों मैं ख़ुद को किस ज़ात का बताऊँ<br />
सुना है तुममें ज़रा भी दीनो-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">दायम अपने बग़ल में पाओगे तुम हमको<br />
चाहो तो कह लो मैं तुझमें मुश्तमिल</font><font color="#c0c0c0">8</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">क्यों है मुझको तेरे रूठ कर जाने का ग़म<br />
जबकि जानते हो मैं कभी तेरा काइल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">कहता तो हूँ बात दिल की मगर क्या करूँ<br />
मेरा कोई भी ख़्याल मानिन्दे-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">उसकी ख़ामोश आँखों में अयाँ थीं बातें दिल की<br />
वो चाहकर भी कभी सू-ए-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">किया जो मैंने तुम्हें अपना समझकर किया<br />
ये दिल तेरी जफ़ा से मुनफ़’इल</font><font color="#c0c0c0">9</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">मैंने देखा था उसे जाते ख़ुल्द की ओर<br />
वो हलाके-फ़रेब-वफ़ा-ए-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">जो कभी साहिल पर था कभी समंदर में<br />
उसको दाग़े-हसरते-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">जिसपे लिखा करते थे तुम अपना नाम<br />
शख़्स वो आज गर्दे-साहिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">आज फ़ारिग</font><font color="#c0c0c0">10</font> हूँ कि तुम हो मेरे ग़मख़्वार<br />
मैं हरीफ़े-मतलबे-मुश्किल<font color="#c0c0c0">11</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">था तो थोड़ा बहुत मैं ये मानता हूँ लेकिन<br />
आज उतना भी तो सोज़िशे-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मैं दर्द को दिल से जुदा कर सकता हूँ<br />
पर फ़ुसूने-ख़्वाहिशे-सैक़ल</font><font color="#c0c0c0">12</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">अब मैं किस मुँह से जाऊँ बज़्म में उसकी<br />
ये दिल दरख़ुर-ए-महफ़िल</font><font color="#c0c0c0">13</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">देखिए शाइबाए-ख़ूबिए-तक़दीर</font><font color="#c0c0c0">14</font> उसमें<br />
वो दिन गया कि रोज़े-अजल नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">इश्क़ फिरता था उस रोज़ गलियों-गलियों<br />
आज किसी में इतना भी ख़लल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">बढ़के आया तो लगा तेरा तीर इस दिल में<br />
चारासाज़ न हुआ पर जाँगुसिल</font><font color="#c0c0c0">15</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">किसपे लिखके भेजूँ मैं तुझे पयाम अपना<br />
पास औराक़े-लख़्ते-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">आस्माँ के पार जाने की तमन्ना थी उसको<br />
पर आइना-ए-बेमेहरि-ए-क़ातिल</font><font color="#c0c0c0">16</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">मेरे मुँह से न सुनो वज्हे-सुखन ईसा<br />
ख़ुद गुलों में रंगे-अदा-ए-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मगर टूटा है किसी का नाज़ुक दिल मुझसे<br />
ये डर कि मैं क़ाबिले-सुम्बुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">अब कोई रहनुमा नहीं रहे-इश्क़ में<br />
तुम ख़ुश रहो तेरी राह में साइल</font><font color="#c0c0c0">17</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#999999">१. </font><font color="#000000">निष्तेज</font> २. <font color="#000000">कोशिश, द्वेष</font> ३. <font color="#000000">अनुरक्त, आसक्त</font> ४. <font color="#000000">दिल के ज़ख़्म का हाल पूछने वाला<br />
</font>५. <font color="#000000">शरीर और आकार</font> ६. <font color="#000000">निष्फल प्रयत्न</font> ७. <font color="#000000">दिल की घबराहट, सहनशक्ति</font> ८.<font color="#000000"> शामिल</font><br />
९. <font color="#000000">लज्जित</font> १०. <font color="#000000">निश्चिंत</font> ११. <font color="#000000">कठिन काम कर लेने वाला</font> १२. <font color="#000000">परिष्कृति की अभिलाषा का जादू</font><br />
१३. <font color="#000000">महफ़िल के योग्य</font> १४. <font color="#000000">सौभाग्य की झलक</font> १५. <font color="#000000">जानलेवा, दुखदायी</font><br />
१६. <font color="#000000">माशूक़ की बेरहमी का सुबूत</font> १७. <font color="#000000">उम्मीदवार, प्रश्नकर्ता</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'<br />
लेखन वर्ष: २००५</p>
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