1- बाँसुरी हूँ मैं सात छेद फिर भी कृष्ण प्यारी मैं 2 -कृष्ण से मिलूँ सही छेदन पीड़ा अधर सजी 3 -सात लोक में विराजित बाँसुरी उच्च आसन 4- -छेदित वस्तु प्राय: ही होती त्याज्य बंशी सौभाग्य 5 – धन्य ह… more →
अनुभूति कलशwrote 1 week ago: 1- बाँसुरी हूँ मैं सात छेद फिर भी कृष्ण प्यारी मैं 2 -कृष्ण से मिलूँ सही छेदन पीड़ा अधर सजी 3 -सात ल … more →
wrote 2 weeks ago: 1-सुनती रहूँ साँसों की सरगम लिखती रहूँ 2-युग युगों से अधूरी प्रेम कथा बनी है व्यथा 3-फेसबुक में गज़ब … more →
wrote 3 weeks ago: 1-भूल भुलैया ज़िंदगी के चौराहे कहाँ ले जाएँ ? 2- उजाले देता मुफलिसी में जीता अँधेरे पीता 3- बिकती कल … more →
wrote 1 month ago: 1-फूल ने रचा बूंदों के सौन्दर्य से काव्य नवीन । 2-जवानी ख़त्म बूढ़ी देह का मोल हो जाता कम । 3- खिलता … more →
wrote 1 month ago: 1- सुना जुबानी संकलन दर्द का प्रीत कहानी । 2– गज़ब रात देह उर्मियों बीच हुआ संवाद । 3- कहती ओस … more →
wrote 3 months ago: दिल-गुलाब इश्क का ये कमाल थिरके देह । इश्क नाकाम हुस्न पर इल्ज़ाम प्रेमी बेदाग़ । खुशबू हूँ मैं गुला … more →
wrote 3 months ago: जुबां खामोश चेहरे में उल्लास दर्द पर्दे में । बिन तेरे मैं वैरागिन -सी रही वनवास में । अजब हाल सितार … more →
wrote 4 months ago: चुन -चुन के तिनकों से बनाया बिखरा घर । संकीर्ण सोच बौना हुआ आदमी ओछो ही रहे । लांघ न सके दहलीज की सी … more →
wrote 4 months ago: 1- जवानी ख़त्म बूढ़ी देह का मोल हो जाता कम । 2- घिसा टायर आदमी का बुढापा खौफ छा जाता । 3-आत्म सम्मान … more →
wrote 4 months ago: दिल्ली के गैंग रेप `दामिनी’ की पीड़ा को शब्द देने का प्रयास भर है … 1-कैसे हो बयाँ ज़ुल् … more →
wrote 5 months ago: 1- कोमल स्पर्श दे असीम संतुष्टि अवर्णनीय । 2- सिमटी कली अनछुई ओस -सी र वि की चाह । 3-मनभावन अलसाई भो … more →
wrote 5 months ago: 1- अछूते रहे प्रिय-मन अथाह न पाई थाह । 2- अजब रीति प्यार में जो हारता वही जीतता । 3- मेरा विश्वास ठो … more →
wrote 5 months ago: १- वंश का नाम चलाता है आत्मज बेबुनियाद । २- खलीफ़ा बुर्ज मेहनत किसी की नाम किसी का? ३- क्रान्ति का ब … more →
wrote 6 months ago: 1- डोली में बैठी लाल ओढनी ओढ़ धूँ -धूँ वो जली। 2– कैसे करता `मैं’ `मैं’ ‘का … more →
wrote 6 months ago: 1-प्यार है छाता मुसीबत आते ही स्वयं बचाता । 2- प्यार सुरक्षा खुद ही सिमटता खुद खुलता । 3- प्यार रोता … more →
wrote 6 months ago: 1- जितना रोए घनश्याम रंग में रंगते गए | 2- डूबी श्याम में चढ़े न दूजो रंग मैं – कान्हा संग। 3- … more →
wrote 6 months ago: 1- सर पे हाथ उँगलियों का स्पर्श स्वर्ग का सुख । 2-हर गम में शीतल छाँव देता माँ का आशीष । 3- साथ हैं … more →
wrote 7 months ago: 1- अंबर-धरा क्षितिज में मिलन सुन्दर भ्रम | 2- ऊषा का प्यार सूरज हुआ लाल कैसा कमाल । 3- मुंह ढांप के … more →
wrote 7 months ago: १-तरसते वे दो बूँद प्रेम वास्ते पडा अकाल | २- गर्भ -सुरक्षा दे सकती हूँ बेटी बाहर नहीं | ३- किसी मोड … more →