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तांडव नृत्य -ताजा हाइकु

1- मूसलाधार

       मचाए हाहाकार

       मृत्यु अपार  ।

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2  –  तांडव -नृत्य

      प्रलय का आगाज

      करें संहार ।

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डॉ रमा द्विवेदी

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हाइकु

बूँदें बरसीं - हाइकु

1 -बूँदें बरसीं

     प्रियतम की कमी

     नैनों से झरीं ।

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  2 –  अमृत जल

    झर -झर बरसे

    प्रेमी तरसे ।

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डॉ रमा द्विवेदी

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हाइकु

पेश है पिता पर तीन ताजा हाइकु

पिता का स्पर्श

शिराओं में दौड़ता

चेतना बन ।

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जीवनाधार

पिता है वटवृक्ष

घनेरी छाँव ।

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देके सर्वस्व

हो गया मजबूर

बूढा शज़र ।

डॉ रमा द्विवेदी

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हाइकु

` पिता' पर दो ताजा हाइकू

जिस्म दोहरा

उठाया  हर भार

हुआ  लाचार ।

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कैसी औलाद ?

पिता को भेज दिया

अनाथाश्रम ।

  डॉ रमा द्विवेदी

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हाइकु