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पेश है पिता पर तीन ताजा हाइकु

पिता का स्पर्श

शिराओं में दौड़ता 

चेतना बन । 

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जीवनाधार 

पिता है वटवृक्ष 

घनेरी छाँव । 

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देके सर्वस्व 

हो गया मजबूर 

बूढा शज़र ।

 

डॉ रमा द्विवेदी 

 

 

हाइकु

` पिता' पर दो ताजा हाइकू

 

 

जिस्म दोहरा 

उठाया  हर भार 

हुआ  लाचार । 

 

कैसी औलाद ? 

पिता को भेज दिया 

अनाथाश्रम । 

 

  डॉ रमा द्विवेदी 

 

 

हाइकु

प्यार का दर्द- ताजा हाइकु

बूँदें बरसीं
प्रियतम की कमी
नैनों से झरीं ।

मेघ फुहार
क्षितिज सतरंगी
मिलन – प्यार ।

प्यार का दर्द
सावन में बढ़ता
खूब रुलाता ।

डॉ रमा द्विवेदी

हाइकु

सावन का दर्द पर हाइकु

1 -सावन- दर्द
कहीं पे अतिवृष्टि
कहीं अकाल ।
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2- धरा दरकी
मेघों की प्रतीक्षा में
अँखियाँ सूखी |
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3 -मेघ फुहार
क्षितिज सतरंगी
मिलन – प्यार ।

डॉ रमा द्विवेदी

हाइकु

दो ताजा हाइकु

1- मूसलाधार
मचाए हाहाकार
मृत्यु अपार ।

2 – तांडव -नृत्य
प्रलय का आगाज
करें संहार ।

डॉ रमा द्विवेदी

हाइकु

हिंदी खाए लाठियाँ -ताजा हाइकु

अंधेर राज
हिंदी खाएं लाठियां
हुआ शहीद ।

डॉ रमा द्विवेदी

हाइकु

जनता कैद ताजा हाइकु

यही दस्तूर
राजतिलक हुआ
जनता कैद ।

डॉ रमा द्विवेदी

हाइकु