होली का उत्साह और ब्रज दोनों मनो पर्याय हों … कदम्ब छांव। मारे होली के दांव। ब्रज के गांव॥ नंद-यशोदा। लाए होरी कौ सौदा। कान्हा है मोदा॥ हे ग्वाल-बाल! बजाओ ढ़प ताल!!! मचे धमाल॥ कान्हा कौ स… more →
पसंदwrote 2 months ago: होली का उत्साह और ब्रज दोनों मनो पर्याय हों … कदम्ब छांव। मारे होली के दांव। ब्रज के गांव॥ नं … more →
wrote 1 year ago: स्वरचित हिंदी कविताएँ, हाइकू, ग़ज़लें … more →
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wrote 1 year ago: शमाने किया परवानेके साथ आखिरी नृत्य ————————— … more →
wrote 1 year ago: हाइकु जापानीज़ लघु काव्य है. श्री रविन्द्रनाथ टागोरने भारतमें बगालीमें भाषामें प्रथम प्रकाशित किया. … more →
wrote 3 years ago: कुछ धृष्टता की है जो मेरे दूसरे ब्लॉग मन की बात पर पढ़ी जा सकती है। बहुत दिनों से लिख रही हूँ और सोच … more →
wrote 4 years ago: नारी का सम्मान एक शब्द बन के रह गया …! इसे अर्थ देने की जिम्मेदारी मेरा / तुम्हारी /हम सबकी है … more →
wrote 4 years ago: जय जननी, जय शक्तिदायिनी, नवदुर्गा माँ! १ जय अपर्णा! हिमालय तनया, शैलपुत्री माँ! २ जय भवानी, जय ब्र … more →
wrote 5 years ago: सुबह की पायल खनकते ही,निशा की गोद से उठकर हम अक्सर उनकी गोद में समा जाते है | बिन कहे ही वो कुछ ऐसी … more →
wrote 5 years ago: हाथी निकल गया, बस पूंछ की नोक बाक़ी है। साल बीत गया बस दो दिन बीतने बाक़ी हैं। यह इस साल की सबसे बाद व … more →
wrote 5 years ago: हाइकू-गूँज 1.परबतो से टकराई गूँज उठी चारो दिशा में आवाज़ तुम्हारी 2.अख़बार में हर दिन गूंजते है दुनि … more →
wrote 5 years ago: हाइकू- नारी 1. ममता से भरी अन्नपूर्णा कहलाती है जन्मदात्रि 2. जिसके बिना सारा जग सुना सु … more →
wrote 5 years ago: हाइकू – सवेरा 1. पंछीयो की किलबिल सूरज निकलते ही घरौंदा छोड़े 2. चाँद छुप गया चँदन … more →
wrote 5 years ago: हाइकू- प्रकृति 1.बहती हवाए लहराते हरेभरे खेत … more →
wrote 5 years ago: हिन्दी में हाइकू लिखने का हमारा ये पहला प्रयास है| हाइकू – समय 1. रोकना चाहती हूँ … more →
wrote 5 years ago: कन्हैया जन्मे त्रिभुवन हरषे पुष्प बरसे। भादौं की रात, कृष्ण-पक्ष अष्टमी, रोहिणीचाल। घिरा तिमिर, बादल … more →
wrote 5 years ago: भारतवर्ष, नायाब जनतंत्र, एकता मंत्र। जाने जहान, जगत अभिमान, हिंद महान। सुयोग्य हर, हिं … more →
wrote 5 years ago: १ गुलमोहर दहके संग लेके! अमलतास। २ विघ्नबेलिया चहुँ ओर बहके, क्या तरुणाई! ३ अरी कनेर! क्यों न सकुचाय … more →
wrote 6 years ago: १ पसीना बहा, अट्टालिका उठायीं, मालिक कौन? २ श्रम पड़ा है, श्रमजीवी खड़ा है, मशीनी युग! ३ समान जन, … more →