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	<title>हास्य-व्यंग &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/हास्य-व्यंग/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "हास्य-व्यंग"</description>
	<pubDate>Sun, 20 Jul 2008 10:47:53 +0000</pubDate>

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	<language>en</language>

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<title><![CDATA[मैं इमरान हाशमी बनना चाहता हूँ ]]></title>
<link>http://apurn.wordpress.com/?p=159</link>
<pubDate>Mon, 12 May 2008 06:25:48 +0000</pubDate>
<dc:creator>Shubhashish Pandey</dc:creator>
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<description><![CDATA[ (अपने बी.टेक. फाइनल इयर में जब मैंने ये ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><a href="http://apurn.files.wordpress.com/2008/05/image003.gif"><img class="alignleft size-medium wp-image-160" src="http://apurn.wordpress.com/files/2008/05/image003.gif?w=128" alt="" width="128" height="128" /></a> (अपने बी.टेक. फाइनल इयर में जब मैंने ये कविता लिखी थी उस वक़्त unicode जैसी सहूलियत नहीं थी इसलिए मेरे दोस्त कुमार वरुण, जो की इस कविता के प्रेरणा भी थे (क्युकी वो कभी कभी बोलता की यार मैं इमरान हाश्मी बनना चाहता हूँ :P ) ने इसे हिंदी पैड पे लिख के jpeg फॉर्मेट में मेल में attach किया! आज मैं इसे unicode में यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ )</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p><strong> मैं इमरान हाशमी बनना चाहता हूँ</strong> </p>
<p>पांचवी कक्षा की एक क्लास मे मास्टर ने बच्चों से पूछा<br />
बताओ क्या बनोगे, कैसे करोंगे अपने माँ-बाप का नाम ऊँचा<br />
किसी ने IAS. किसी ने PCS. किसी ने कहा अच्छा आदमी बनाना चाहता हूँ<br />
तभी पीछे की सीट से उठकर एक बच्चे ने कहा<br />
Sir! मैं इमरान हाशमी बनना चाहता हूँ</p>
<p>ऐसे जवाब की ख्वाब मे भी नही की थी कभी कल्पना<br />
पर Teacher को लगा शायद हो ये लडके का बचपना<br />
समझाया की बेटा गलती की है तुने Career को चुनने मे<br />
ये तो बता क्या प्रॉब्लम है तुझे और कुछ बनने मे ???</p>
<p>लड़का बोला Sir! जॉब मे अभी कहाँ इतना पैसा है<br />
और Business करना मुझे लगता बेवकूफों जैसा है<br />
नेता फस जाते हैं Akshar स्टिंग ऑपरेशन के जंजाल मे<br />
खेल मे Zahar भर दिया मैच फिक्सिंग के बवाल ने<br />
पर फ़िल्म इंडस्ट्री मे प्रोफिट की लाइन हमेशा ऊपर चढ़ती है<br />
बढ़िया काम से Price-Value तो बुरे से Popularity बढ़ती है<br />
और इस बात को तो ख़ुद कई बड़े फ़िल्म समीक्षक माने है<br />
MMS Clips से भी ज्यादा बिकते इमरान के फिल्मो के गाने है</p>
<p>मै भी ऐसे गाने कर अपनी लाइफ बदलना चाहता हूँ<br />
इसीलिए तो Sir! मैं इमरान हाशमी बनाना चाहता हूँ</p>
<p>हुंह!!!! आज कल के लडके जाने पढ़ते हैं किस किताब से<br />
Teacher का भी सर चक्र गया बच्चे के इस जवाब से<br />
Teacher ने फ़िर भी पूछा उसमे ऐसी क्या बात समाई है<br />
ये तो बता अभिषेक बच्चन बनने मे क्या बुराई है ???</p>
<p>सिर्फ़ दो फिल्मो से इतना नाम नही कमाया अभिषेक के बाप ने<br />
Murder किया लड़किया फ़िर भी कहती .Aashiq Banaya Aap Ne...<br />
मल्लिका,तनुश्री, उदिता निपटी पिछली फिल्मों की साइन मे<br />
सुनाने मे आया है की अब सेलिना हृषिता भी है लाइन मे</p>
<p>मै भी ऐसे टेस्टी CHOCOLATE का स्वाद चखाना चाहता हूँ<br />
इसीलिए तो Sir मैं इमरान हाशमी बनाना चाहता हूँ</p>
<p>अब मास्टर का गुस्सा पहुच गया सातवे आसमान पे<br />
बोले.. सिवाय लड़किया घुमाने के क्या किया इमरान ने ??<br />
Sir! लड़कियों को पीछे घुमाना कोई आसान काम नही<br />
वरना बड़े Powerful लोगो का होता ये अंजाम नहीं</p>
<p>क्या नही जानते आप America के पूर्व राष्ट्रपति को ??<br />
कैसे प्राप्त हुए मोनिका के चक्कर मे .वीरगति को<br />
बदल गया कप्तान देश का सौरभ-नग्मा के टक्कर मे<br />
Cricket खेलना भूल गया वो .नए खेल के चक्कर मे<br />
मेरी इतनी बातों का मतलब बिलकुल सीधा-साफ है<br />
काबिलियेत मे भी इमरान हाशमी. बिल क्लिंटन का बाप है</p>
<p>मैं भी एक Demanded और काबिल आदमी बनाना चाहता हूँ<br />
इसीलिए तो Sir! मैं इमरान हाशमी बनाना चाहता हूँ</p>
<p>................................. Shubhashish ( 2006)</p>
<p>In printable format<br />
<a href="http://apurn.files.wordpress.com/2008/05/mih1.jpg"><img class="alignleft size-thumbnail wp-image-173" src="http://apurn.files.wordpress.com/2008/05/mih1.jpg?w=74" alt="" width="74" height="96" /></a><br />
<a href="http://apurn.files.wordpress.com/2008/05/mih2.jpg"><img class="alignleft size-thumbnail wp-image-173" src="http://apurn.files.wordpress.com/2008/05/mih2.jpg?w=74" alt="" width="74" height="96" /></a> </p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[जूली - A real story ]]></title>
<link>http://apurn.wordpress.com/?p=131</link>
<pubDate>Sat, 12 Apr 2008 13:37:25 +0000</pubDate>
<dc:creator>Shubhashish Pandey</dc:creator>
<guid>http://apurn.wordpress.com/?p=131</guid>
<description><![CDATA[जमाने के सितम ने कर दिया बहुत बुरा हाल ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>जमाने के सितम ने कर दिया बहुत बुरा हाल है,<br />
इंजीनियरिंग कॉलेज में जूली का ये चौथा साल है,</p>
<p>यूँ तो क्लास में टीचर एंट्री देते नहीं इसे,<br />
पर २-३ क्लास करके जूली ने मचाया काफी बवाल है,</p>
<p>कहाँ साल भर प्रिप्रेशन करने के बाद लड़के एडमिशन लेने आते हैं,<br />
और फिर रहने के लिए हॉस्टल का एक ट्रीपल सीटर रूम पाते हैं,</p>
<p>पर जूली तो बचपन से ही हॉस्टल में अपनी मनमानी चलायी है,<br />
किसी ट्रिपल सीटर में दिन तो सिंगल सीटर में रातें बिताई है,</p>
<p>वार्डेन महीनों में कभी चेक करे ये बड़ी बात हैं,<br />
पर जूली कमरों में झांकती हर रात हैं,</p>
<p>दरवाजा बंद है तो अगले पे जाती है,<br />
गर खुला मिल जाये तो बिस्तर पे आराम फरमाती है,</p>
<p>इतना ही नहीं जूली ने और भी कई गुल खिलाये हैं,<br />
चंगु-मंगू नाम के दो बच्चे अपने गुलशन में उगाये हैं,</p>
<p>पर आजकल जूली घूमती तन्हा अकेली है,<br />
उसके बच्चो का पिता कौन है ये अबुझ पहेली है,</p>
<p>हमारे पड़ोस वाले गुप्ता जी नशे में मस्त रहते हैं,<br />
इनकी बक-बक से पूरे हॉस्टलवासी त्रस्त रहते हैं,</p>
<p>उस रात जूली उनके कमरे में सोई थी,<br />
अपने टाइगर के खयालो में जाने कहाँ खोई थी,</p>
<p>इतने में गुप्ता जी नशे में अन्दर आये,<br />
और जूली की बाहों में बिस्तर पर रात बिताये,</p>
<p>सुबह जब आँखे खुली तो गलती का एहसास था,<br />
तन्हाई के सिवा अब कुछ नहीं जूली के पास था,</p>
<p>तब से वो पतला कुत्ता टाइगर भी साथ नहीं रहता है,<br />
वो भी ज़माने की तरह जूली को बेवफा कहता है,</p>
<p>"अरे माफ़ कीजीयेगा.... जूली का परिचय देना तो भूल गया"</p>
<p> यूँ तो AKGEC के ब्वायेस हॉस्टल में इसे किसी परिचय की जरुरत नहीं,<br />
पर जूली नाम की ये आवारा कुतिया जरा भी खूबसूरत नहीं ,</p>
<p>पर जूली का हॉस्टल से प्यार देखते हे बनता है,<br />
साल में कई मौको पे इसका का बैर्थ-डे मानता है,</p>
<p>दर-असल जब भी जूली किसी का बर्थ-डे के खा जाती है ,<br />
तो बर्थडे बॉय की बर्थडे बमप्स में लातें भी पाती है,</p>
<p>अरे एक बार तो मेरे आँखों के सामने हे पूरा हंगामा खडा था,<br />
गलती से जूली छत पे बंद क्या हुई सारा होस्टल ताले पे जुटा पड़ा था,</p>
<p>थोडी देर में ताला टुटा तो लोगो की जान में जान आई ,<br />
ये बात और है की थोडी हे देर में जूली फिर कई लातें खाई ,</p>
<p>जूली नाक में दम कर देती है अच्छे-अच्छो की,<br />
कहानी पे यकीं कर लो कसम तुम्हे जुली के बच्चो की ,</p>
<p>(प्रस्तुत कविता सत्य घटनाओ पे आधारित है, पाठकों से विनम्र निवेदन है की वो इससे खिलाफ कोई भी शिकायत एनीमल राईट मूवमेंट वालों से ना करें :P )<br />
  ..................................... Shubhashish (2004-05)</p>
<p>In printable format</p>
<p><a href="http://apurn.files.wordpress.com/2008/05/juli1.jpg"><img src="http://apurn.wordpress.com/files/2008/05/juli1.jpg?w=73" alt="" width="73" height="96" class="alignleft size-thumbnail wp-image-177" /></a><br />
<a href="http://apurn.files.wordpress.com/2008/05/juli2.jpg"><img src="http://apurn.wordpress.com/files/2008/05/juli2.jpg?w=74" alt="" width="74" height="96" class="alignleft size-thumbnail wp-image-178" /></a></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ये सेंसेक्स (हास्य व्यंग)]]></title>
<link>http://apurn.wordpress.com/?p=121</link>
<pubDate>Mon, 07 Apr 2008 10:21:38 +0000</pubDate>
<dc:creator>Shubhashish Pandey</dc:creator>
<guid>http://apurn.wordpress.com/?p=121</guid>
<description><![CDATA[1) सन सन कर के दौड़ रहा है जब से ये सेंसेक]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>1) सन सन कर के दौड़ रहा है जब से ये सेंसेक्स,<br />
हर गली मोहल्ले खुल गए नए शोपिंग कॉम्प्लेक्स,<br />
अब सब के बस का कहाँ रहा girlfriend पालना....</p>
<p>2) महाराष्ट्र में भारत माँ का फटा कलेजा<br />
चाचा से भी आगे बढ़ता दिखा भतीजा<br />
शहर क्या आप के बाप का ?</p>
<p>3) माँ और पत्नी झगड़ रही हैं, कौन है तेरा खास?<br />
२४ घंटे फुफकार रहा ऑफिस में बैठा बॉस,<br />
लाइफ की बैंड बज गयी .........</p>
<p>4) बुड्ढे माँ-बाप की जाने कब पूरी होगी आस,<br />
कड़ी मेहनत कर के अपना पप्पू हो गया पास,<br />
मगर क्या job लगेगी ?   </p>
<p>...............................  Shubhashish</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[देशव्यापी संकट और सब्जी]]></title>
<link>http://lovelykumari.wordpress.com/?p=11</link>
<pubDate>Sun, 23 Mar 2008 10:25:15 +0000</pubDate>
<dc:creator>Lovely Kumari</dc:creator>
<guid>http://lovelykumari.wordpress.com/?p=11</guid>
<description><![CDATA[आप सोंच रहे होंगे की इन तीनो अलग से दिख]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font size="3">आप सोंच रहे होंगे की इन तीनो अलग से दिखने वाले शब्दों का क्या सम्बन्ध! पर सम्बन्ध है वह भी ऐसा नही जिसे अनदेखा किया जा सके.हर रविवार सुबह की सब्जी के लिए पतिदेव से होने वाली खिचातानी की विवरण सुनने के बाद आपको इन तीनो का सम्बन्ध अच्छी तरह समझ आएगा. जैसा की हम सभी जानते हैं आराम करने का लोकतांत्रिक अधिकार सभी मनुष्यों को है,परन्तु जब आराम जी का जंजाल बन जाए तो इसपर विराम लगाना ही उचित होता है. मुझे नास्ता तैयार करना था रविवार की सुबह वैसे ही सबके लिए आलस्य का पुलिंदा बन कर आती है परन्तु पेट की अग्नि ही इस आराम मे  व्यवधान उत्पन करती है,तो मैंने पतिदेव से विनम्र अनुरोध किया जाकर सब्जी ले आइये नास्ता तैयार करना है उन्होंने कहा "हाँ जाते हैं दो मिनट". मन प्रफुल्लित हो उठा बेकार मे लोग कहते हैं पुरूष प्यार की शुरुआत तो अप्रेल की उष्मा से करते हैं परन्तु अंतः यह दिसम्बर की शुस्कता और ठंडेपन मे बदल जाती है. प्रफुलित होते १ घंटे का वक्त कब अल्प्वेतन भोगी महंगाई से त्रस्त कर्मचारी के मासिक वेतन राशी की तरह निकला पता ही नही चला परन्तु पतिदेव अख़बार पर नजर गडाये अपनी भ्ब्य अहम ब्रम्हास्मी की छवि के साथ कुर्सी पर यथावत विराजमान! हमने समझा किसी गहन (?) विषय पर विचारमग्न होने के कारण ध्यान नही रहा होगा दुबारा स्मरण दिलाना चाहिए.कहाँ वह पुरी दुनिया की सारी समस्याओं का हल निकल रहें हैं (अक्सर हम भारतवाशी गलिओं चौराहों पर राजनितिक बातें करतें है,वह जो सुबह अख़बार मे पडा हो ,और देश की दुर्दशा के लिए चिंता प्रगट करते हैं)  और कहाँ हम एक निहायत ही तुच्छ बात के लिए उनका ध्यान भंग कर रहें हैं,फ़िर भी  मूल आवश्कताओं  की तो अनदेखी की नही जा सकती, तो हमने अत्यन्त ही अपराधबोध के साथ उनके मन मस्तिष्क मे छाये बिचारों के बिच से गुस्ताखी माफ़ जहापनाह वाले अंदाज मे झाँकने की कोसिस की.निवेदन किया ९ बज गए सब्जी कब लाइयेगा  शंखनाद हुआ जाते हैं बस २ मिनट. अब भाग्यशाली होने पर संदेह होने लगा था जिसे हमने मुस्कुरा कर ऐसे ढंक दिया जैसे पडोसी के घर नया इटालियन सोफा आने पर ह्रदय की वेदना अपनी टूटी कुर्सी पर नये कुशन रखकर ढंकी थी. बहरहाल इंतिज़ार किरोसीन की लाइन की तरह लम्बा होता जा रहा था और अब तक वो कुर्सी पर यथावत बिराजमान थे.हमारा सविनय निवेदन महिला आरक्षन  साबित हो रहा था जिसकी आशा मे युग बीते मव्न्तर बीते पर कोई प्रोग्रेस नही. अब मुझे गुस्सा आ रहा था .मैं गुस्से से चीख पडी अख़बार मे नजर गडाये क्या मोक्ष- मार्ग खोज रहें हैं, जाते क्यों नही? वो जैसे नींद से जागे तुम्हे सब्जी की पडी है यहाँ यह देखो डॉलर के रेट रुपयों के मुकाबले घट रहें हैं देश के आई .टी  सेक्टर को नुकशान होगा.बी.प.ओ सेक्टर वालों को भी परेशानी होगी. अब तो तय था की यहाँ इस भयानक मुसीबत से छुटकारा पाने के लिए तरकीबें खोजी जाएँगी तो सब्जी जैसी बातें मायने नही रखती.हम भारतीय लोग हमेसा बडी मुसीबतों का इंतिज़ार करतें हैं और जब वह आ जाए तो सरकार और सिस्टम को कोसकर अपनी नाकामी छुपाते है (जैसे नंदीग्राम और सिंगुर की नाकामी तसलीमा नसरीन विवाद से छुपाई गई).तो हर सन्डे सब्जी किसी बडे विवाद या मुसीबत की भेंट चढ़ती रहती है.और मैं निरीह भारतवाशी की तरह इस इंतिज़ार मे रहती हूँ की कब इन छोटी बातों की तरफ पतिदेव (भारतावाशी के परिपेछ्य मे सरकार पढा जाए ) का ध्यान जाए. </font></p>
<p>अगली बार पढिये पासफोर्ट पुरान.......</p>
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