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प्यार, एक मीठा अहसास

प्यार नहीं है शब्दों का कोई खेल, है बस मीठा अहसास |
जहाँ सभी भावों अनुभावों का हो जाता मात्र अभाव ||
कहीं शून्य में खो जाते दो प्रेमी, पल का भान न रहता |

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कहीं खो गया परिचय मेरा

इस जगती की भरी भीड़ में कहीं खो गया परिचय मेरा |
इसीलिये तो इतना आकुल, इतना व्याकुल है मन मेरा ||
मैंने कितने स्वप्न सजाए थे अपने परिचय के बल पर |

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भर लो रंगों से पिचकारी

प्रिय मित्रों, आज सभी ने जी भरकर फाग खेला – होली का त्यौहार मनाया – ख़ूब मन भरकर गुझिया दही भल्ले पापड़ी चाट खाई – इसी अवसर एक लिये एक रचना लिखी थी, जो होली की व्यस्तताओं के चलते पोस्ट नहीं कर सकी, अब समय मिला है सो पोस्ट कर रही हूँ – होली की रंगभरी उमंगभरी शुभकामनाओं के साथ…

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होली है

होली है, हुडदंग मचा लो, सारे बन्धन तोड़ दो |
और नियम संयम की सारी आज दीवारें तोड़ दो ||
कैसा नखरा, किसका नखरा, आज सभी को रंग डालो |

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ऐसी होरी की न कौनो उपमा जहान में

मित्रों, होली का हुडदंग शुरू हो चुका है | यों रंग खेलने की होली १७ मार्च को है, पर बच्चों ने तो कई दिन पहले से ही आते जातों पर रंग फेंकना शुरू कर दिया था | और सदा से ही रंग की एकादशी के साथ ही बड़े भी एक दूजे को रंगने लग जाते हैं | तो होली के इस रंगारंग पर्व की रंग और मस्ती भरी ढेर सारी शुभकामनाएँ… “एडवांस” में…

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मन में सदा हिलोरें भरतीं

मन में कितनी भरी उमंगें, ज्यों सागर में अनगिन लहरें |
भाव तरंगित होते, लगता मधुर गान हैं गाती लहरें ||
मन पंछी बन ऊँचे ऊँचे दूर गगन में उड़ना चाहे |

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मत समझो मैं दुर्बल हूँ

मत समझो मैं दुर्बल हूँ, मैं हूँ साहस से परिपूर्ण सदा |
हर नई डगर पर चलती हूँ मैं अटल इरादे लिये सदा ||
मुझमें कितनी ही रूप भरे, मुझमें कितने ही रंग भरे |

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