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	<title>फ़िज़ा &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/फ़िज़ा/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "फ़िज़ा"</description>
	<pubDate>Thu, 22 May 2008 20:28:32 +0000</pubDate>

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	<language>en</language>

<item>
<title><![CDATA[धुँधलियाँ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=970</link>
<pubDate>Mon, 28 Apr 2008 18:02:06 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=970</guid>
<description><![CDATA[धुँधलियाँ-धुँधलियाँ
तेरी यादों की धु]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color:#000000;">धुँधलियाँ-धुँधलियाँ<br />
तेरी यादों की धुँधलियाँ<br />
छायी हैं ज़हन पर<br />
तेरी बातों की बदलियाँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">नज़दीकियाँ नज़दीकियाँ<br />
तेरी मुझसे नज़दीकियाँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">अहसास हो क़रीबी का<br />
मिज़ाज हो ख़ुशनसीबी का<br />
बदले हैं रंग फ़िज़ाओं ने<br />
नूर हो माह रकाबी का</span></p>
<p><span style="color:#000000;">धुँधलियाँ धुँधलियाँ<br />
तेरी यादों की धुँधलियाँ<br />
छायी हैं ज़हन पर<br />
तेरी बातों की बदलियाँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">बिजलियाँ बिजलियाँ<br />
तेरे रूप की बिजलियाँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">जिस्म रेशमी आग का<br />
चिकने मखमली आफ़ताब का<br />
ख़ुशरू पे बैठी हैं मुस्कियाँ<br />
उतरा है रंग हिजाब का</span></p>
<p><span style="color:#000000;">धुँधलियाँ धुँधलियाँ<br />
तेरी यादों की धुँधलियाँ<br />
छायी हैं ज़हन पर<br />
तेरी बातों की बदलियाँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तब्दीलियाँ तब्दीलियाँ<br />
मुझमें इतनी तब्दीलियाँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">भूल गया सारी मजबूरियाँ<br />
दूर हो गयीं सब दूरियाँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">तब्दीलियाँ तब्दीलियाँ<br />
मुझमें इतनी तब्दीलियाँ<br />
छायी हैं ज़हन पर<br />
तेरी बातों की बदलियाँ</span></p>
<p><span style="color:#000000;">नज़दीकियाँ नज़दीकियाँ<br />
तेरी मुझसे नज़दीकियाँ</span></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००४</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[आँखों में आँसू नहीं आते]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=945</link>
<pubDate>Fri, 21 Mar 2008 09:52:02 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=945</guid>
<description><![CDATA[आँखों में आँसू नहीं आते
क्योंकि मैं जा]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">आँखों में आँसू नहीं आते<br />
क्योंकि मैं जानता हूँ<br />
तुम लौटकर आओगी ज़रूर<br />
यह दिल तन्हा कहाँ है<br />
इसमें यादें हैं तुम्हारी<br />
तुम रहो कितने भी दूर</font></p>
<p><font color="#000000">देखता हूँ तुम्हें<br />
जब भी आँखें मूँद लेता हूँ<br />
और कोई कहाँ है इनमें हुज़ूर<br />
तुमसे प्यार किया है<br />
यह दिल का सौदा है तुम्हीं से<br />
क्यों न रहूँ थोड़ा मग़रूर</font></p>
<p><font color="#000000">पास आने के दिन आ गये<br />
धड़कनों में बेक़रारी है<br />
दिल में सुरूर ही सुरूर<br />
वादियों में चले मौसम हरे<br />
डालियों पर फूल गुलाबी हैं<br />
निगाह में भर गया है नूर</font></p>
<p><font color="#000000">जादू-सा है फ़िज़ाओं में<br />
खिल रहे हैं ख़्याल हर-सू<br />
क्यों न आये तुम्हारा मज़कूर<br />
दिल बहलता नहीं बातों से<br />
यह कैसा सिलसिला है<br />
चैन आये गर आये वह हूर</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[नग़मे खिलने लगे हैं]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=916</link>
<pubDate>Fri, 14 Mar 2008 14:32:25 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=916</guid>
<description><![CDATA[नग़मे खिलने लगे हैं नज़्म महकने लगी है
]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">नग़मे खिलने लगे हैं नज़्म महकने लगी है<br />
तेरे एहसास पे धड़कन ग़ज़ल कहने लगी है<br />
साँवली आँखों में सपनों की ख़ुशबू घुलने लगी है<br />
मुसलसल ख़ाबों की भीड़ पलकों में लगने लगी है</font></p>
<p><font color="#000000">बंजर सूखे मैदान सारे सब्ज़ होने लग गये<br />
फूल अरमानों के मेरे मन में खिलने लग गये<br />
सौंधे आसमाँ पर सतरंगी धनुष खिल गया है<br />
पर्वतों पे घटा झुकने लगी है बरसने लगी है</font></p>
<p><font color="#000000">नग़मे खिलने लगे हैं नज़्म महकने लगी है<br />
तेरे एहसास पे धड़कन ग़ज़ल कहने लगी है</font></p>
<p><font color="#000000">दुआओं की सदा मेरी फ़ुग़ाँ असर कर जायेगी<br />
रहमत ख़ुदा की होगी मेरी ज़ीस्त घर आयेगी<br />
बहारो-फ़िज़ा का रंग हर-सू बदलने लगा है<br />
तेरे तस्व्वुर की मद्धम धूप खिलने लगी है</font></p>
<p><font color="#000000">साँवली आँखों में सपनों की ख़ुशबू घुलने लगी है<br />
मुसलसल ख़ाबों की भीड़ पलकों में लगने लगी है</font></p>
<p>मुसलसल= लगातार, ज़ीस्त= जीवन, हर-सू= चारों तरफ़</p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २००२</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[माहे-कामिल कहूँ कि शाहे-ख़ुदा कहूँ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=895</link>
<pubDate>Wed, 12 Mar 2008 04:00:12 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=895</guid>
<description><![CDATA[माहे-कामिल कहूँ कि शाहे-ख़ुदा कहूँ
हुस]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">माहे-कामिल कहूँ कि शाहे-ख़ुदा कहूँ<br />
हुस्न-बानो कहूँ कि रंगे-फ़िज़ा कहूँ<br />
आपको कहूँ तो आख़िर मैं क्या कहूँ</font></p>
<p><font color="#000000">आपका हुस्न तो बेमिसाल है<br />
रूप, रंग, अदा का विसाल है<br />
उन्तिस चाँद में भी दाग़ है<br />
आपका बदन रेशमी आग है</font></p>
<p><font color="#000000">इस रेशमी आग को कहूँ तो क्या कहूँ<br />
हुस्न-बानो कहूँ कि रंगे-फ़िज़ा कहूँ</font></p>
<p><font color="#000000">हुस्न आपका सबसे आला है<br />
रब ने किस साँचे में ढाला है<br />
चाँदनी में खिला हुआ कँवल हो<br />
मुझको अल्लाह का फ़ज़ल हो</font></p>
<p><font color="#000000">अल्लाह के फ़ज़ल को नाम क्या दूँ<br />
माहे-कामिल कहूँ कि शाहे-ख़ुदा कहूँ</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: ३१ मई २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[वह मौसम इक बार ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=851</link>
<pubDate>Tue, 26 Feb 2008 17:24:01 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=851</guid>
<description><![CDATA[वह मौसम इक बार फिर सजा दे
प्यार करने की ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">वह मौसम इक बार फिर सजा दे<br />
प्यार करने की मुझको सज़ा दे<br />
दीवानों की तरह तुझको देखे जाऊँ<br />
हाथों की लकीरों में वह क़ज़ा दे</font></p>
<p><font color="#000000">अरमान पिघलकर ख़त्म न हो जायें<br />
दिल में साँसें दफ़्न न हो जायें<br />
अपने सीने से लगा ले मुझे<br />
दिल में अपने मुझको जगह दे</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी राहों पर निगाह है मेरी<br />
मेरे दिल में सिर्फ़ चाह है तेरी<br />
मेरे जीवन को अपनी चाहतों में डुबा दे<br />
मेरे सनम जीने की मुझको वजह दे</font></p>
<p><font color="#000000">वह मौसम इक बार फिर सजा दे<br />
प्यार करने की मुझको सज़ा दे...</font></p>
<p><font color="#000000">सूनी-सूनी आँखें रूख़ी-रूख़ी आँखें<br />
ख़ाली-ख़ाली है सीना ख़ुश्क़ हैं साँसें<br />
जुदा रहके जुदाई में जीना मुमकिन नहीं<br />
मेरे प्यार को अपने प्यार की फ़िज़ा दे</font></p>
<p><font color="#000000">दीवानों की तरह तुझको देखे जाऊँ<br />
हाथों की लकीरों में वह क़ज़ा दे...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: ३० अप्रैल २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[टूटे हुए चाँद को]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=827</link>
<pubDate>Mon, 25 Feb 2008 16:26:35 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=827</guid>
<description><![CDATA[टूटे हुए चाँद को सादे काग़ज़ में लपेटा ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">टूटे हुए चाँद को सादे काग़ज़ में लपेटा मैंने<br />
भीगे हुए सूरज को हथेलियों में समेटा मैंने<br />
तारे बसरने लगे और आसमाँ ख़ाली हो गया<br />
उसने एक आइने की तरह मुझे तोड़ दिया है<br />
...तोड़ दिया है</font></p>
<p><font color="#000000">जला दिये दिल के जज़्बात उसने<br />
बढ़ा दिये मेरे मुश्किलात उसने<br />
जीना मेरा जीना बहुत मुश्किल है<br />
यह ज़हर पीना बहुत मुश्किल है</font></p>
<p><font color="#000000">बहार में भी शाख़ों पर ख़िज़ाँ थी<br />
सूखी-सूखी बंजर हर फ़िज़ा थी<br />
फ़िज़ाएँ रंग बदलने लगी हैं<br />
हवाओं के साथ चलने लगी हैं मगर<br />
उसने निगाहों में खिलना छोड़ दिया है<br />
...छोड़ दिया है</font></p>
<p><font color="#000000">फ़िज़ाएँ मौसम के साथ खिलती हैं<br />
और मौसम बदलते रहते हैं<br />
मौसम बदला है तो फ़िज़ा भी बदलेगी<br />
बदले हुए मौसम ने हज़ार रास्तों को<br />
मेरी तरफ़ मोड़ दिया है, मोड़ दिया है<br />
...मोड़ दिया है</font></p>
<p><font color="#000000">शब्दों की स्याही में रिश्ते हैं<br />
फूलों के अर्क़ में रिश्ते हैं<br />
हर शब्द हर फूल में मिलते हैं<br />
हर जिस्म की शाखों पर खिलते हैं<br />
मिलते हैं बिछुड़ते हैं,<br />
बिछुड़ते हैं मिलते हैं<br />
समंदर की लहर जैसे चलते रहते हैं<br />
खिलते हैं महकते हैं<br />
बनते हैं बुझते हैं<br />
यह धूप-छाँव के जैसे रंग बदलते हैं</font></p>
<p><font color="#000000">उसने एक रिश्ता तोड़ा है इक जोड़ दिया है<br />
जोड़कर उसने रिश्ते को फिर तोड़ दिया है<br />
...तोड़ दिया है</font></p>
<p><font color="#000000">जला दिये दिल के जज़्बात उसने<br />
बढ़ा दिये मेरे मुश्किलात उसने<br />
जीना मेरा जीना बहुत मुश्किल है<br />
यह ज़हर पीना बहुत मुश्किल है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९ अप्रैल २००३</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[हाल दिल का बताना तुमसे]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=805</link>
<pubDate>Mon, 18 Feb 2008 15:05:28 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=805</guid>
<description><![CDATA[हाल दिल का बताना तुमसे बहुत ही मुश्किल]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">हाल दिल का बताना तुमसे बहुत ही मुश्किल है<br />
न जाने कितना, बेशुमार दर्द इसमें शामिल है<br />
हर लम्हा ज़िन्दगी को ज़िन्दगी से दूर करता है<br />
जाने किस रफ़्तार दोनों का दिल शोर करता है</font></p>
<p><font color="#000000">जाने अन्जाने मुझसे कितनी गुस्ताखियाँ हो गयीं<br />
हम क्यों समझ न पाये और आप दूर होती गयीं <br />
थोड़ी-थोड़ी दोस्ती न जाने कब मोहब्बत बन गयी<br />
एक फूल खिला और सारी फ़िज़ा जन्नत हो गयी</font></p>
<p><font color="#000000">हाल दिल का बताना तुमसे बहुत ही मुश्किल है<br />
न जाने कितना, बेशुमार दर्द इसमें शामिल है</font></p>
<p><font color="#000000">वही समझता है यह इश्क़ जो इश्क़ का मारा है<br />
समझे पाये बहुत देर से हम, यह कच्चा सहारा है<br />
पलकें भारी हो जाती हैं कोशिश करते हैं जागने की<br />
कैसी ज़िन्दगी है ज़रूरत पड़ती है साँसें माँगने की</font></p>
<p><font color="#000000">हाल दिल का बताना तुमसे बहुत ही मुश्किल है<br />
न जाने कितना, बेशुमार दर्द इसमें शामिल है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[रोते हैं सब से छिपकर ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=786</link>
<pubDate>Sat, 16 Feb 2008 05:15:13 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=786</guid>
<description><![CDATA[जब-जब सनम तेरी यादें आती हैं
कैसे कहें ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">जब-जब सनम तेरी यादें आती हैं<br />
कैसे कहें कितना तन्हा कर जाती हैं<br />
रोते हैं सब से छिपकर अँधेरों में<br />
ख़ुद से इतना रुसवा कर जाती हैं </font></p>
<p><font color="#000000">अँधेरी राहों-सा दिल सूना हो जाता है<br />
जब आँखों में तेरा सपना टूट जाता है<br />
ख़्यालों की राहों पर मुलाक़ातें होती हैं<br />
मिलते हैं जब पुरानी बातें होती हैं </font></p>
<p><font color="#000000">ख़्याल अरमानों की डोली सजाते हैं<br />
उठता है दिल में धड़कनों का तूफ़ान<br />
ख़ुशबू तेरी बहती है इन फ़िज़ाओं में<br />
ढूँढ़ता हूँ राहों में तेरे पैरों के निशान </font></p>
<p><font color="#000000">जब-जब सनम तेरी यादें आती हैं<br />
कैसे कहें कितना तन्हा कर जाती हैं<br />
रोते हैं सब से छिपकर अँधेरों में<br />
ख़ुद से इतना रुसवा कर जाती हैं </font></p>
<p><font color="#000000">हर आहट तेरा नामो-निशाँ देती है<br />
तू आज भी सखी मुझमें रहती है<br />
सितारों इन नज़ारों में तू दिखती है<br />
अँधेरों से उजालों से तू बनती है</font></p>
<p><font color="#000000">जब-जब सनम तेरी यादें आती हैं<br />
कैसे कहें कितना तन्हा कर जाती हैं<br />
रोते हैं सब से छिपकर अँधेरों में<br />
ख़ुद से इतना रुसवा कर जाती हैं</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[यह यादें तो ऐसी हैं]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=766</link>
<pubDate>Wed, 13 Feb 2008 16:22:19 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=766</guid>
<description><![CDATA[यह यादें तो ऐसी हैं जैसे मेरी परछाईं
ज]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">यह यादें तो ऐसी हैं जैसे मेरी परछाईं<br />
जब तक अंधेरे में चलते रहे<br />
तब तक हम दोनों साथ नहीं<br />
जहाँ उजालों की ओर मुड़े<br />
फिर से मेरे दिल पर आयीं</font></p>
<p><font color="#000000">यह यादें वह तो नहीं<br />
जिनको काग़ज़ पर लिखकर मिटा दें<br />
यह वह लम्हे तो नहीं<br />
जिनको कहानियाँ समझकर भुला दें</font></p>
<p><font color="#000000">यह यादें तो ऐसी हैं जैसे मेरी परछाईं<br />
जब तक अंधेरे में चलते रहे<br />
तब तक हम दोनों साथ नहीं<br />
जहाँ उजालों की ओर मुड़े<br />
फिर से मेरे दिल पर छायीं</font></p>
<p><font color="#000000">यह वह चाँद तो नहीं<br />
जिनको काले बादलों की शालें उढ़ा दें<br />
यह वह पंक्षी तो नहीं<br />
जिनको दिल-क़ैद के पिंजड़े से उड़ा दें</font></p>
<p><font color="#000000">यह यादें तो ऐसी हैं जैसे मेरी परछाईं<br />
जब तक अंधेरे में चलते रहे<br />
तब तक हम दोनों साथ नहीं<br />
जहाँ उजालों की ओर मुड़े<br />
फिर से मेरे दिल पर आयीं</font></p>
<p><font color="#000000">यह वह फ़िज़ा की हवाएँ हैं<br />
आठों पहर जो दिल में आएँ-जाएँ<br />
यह बिन बादलों के<br />
आकाश के घट से पानी छलकाएँ</font></p>
<p><font color="#000000">यह यादें तो ऐसी हैं जैसे मेरी परछाईं</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[दरिया किनारे वह लड़की बाल सँवारे]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=748</link>
<pubDate>Tue, 12 Feb 2008 05:15:17 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/?p=748</guid>
<description><![CDATA[दरिया किनारे वह लड़की बाल सँवारे
क़दमो]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">दरिया किनारे वह लड़की बाल सँवारे<br />
क़दमों के निशाँ पर बहते हैं पानी के धारे<br />
दिल की ज़ुबाँ तो दीवाना दिल ही जाने<br />
सभी तो मरते हैं उस पर यह सारे</font></p>
<p><font color="#000000">रह-रहकर आसमानों में उड़ती है चाहत<br />
देखकर उसे दिल को मिलती है राहत<br />
दरिया किनारे वह लड़की बाल सँवारे<br />
क़दमों के निशाँ पर बहते हैं पानी के धारे</font></p>
<p><font color="#000000">जादू है इन फ़िज़ाओं में शबनमी हैं रातें<br />
होती कहाँ है अपनी मुलाक़ातें दो चार बातें<br />
दरिया किनारे वह लड़की बाल सँवारे<br />
क़दमों के निशाँ पर बहते हैं पानी के धारे</font></p>
<p><font color="#000000">दिल की हर धड़कन उसका ही नाम पुकारे<br />
वह आगे-आगे है पीछे हैं उसके सारे<br />
दरिया किनारे वह लड़की बाल सँवारे<br />
क़दमों के निशाँ पर बहते हैं पानी के धारे</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[यह रंगीन फ़िज़ा ]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2008/02/06/yah-rangeen-fiza/</link>
<pubDate>Tue, 05 Feb 2008 19:40:18 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
<guid>http://vinayprajapati.wordpress.com/2008/02/06/yah-rangeen-fiza/</guid>
<description><![CDATA[यह रंगीन फ़िज़ा
बेरंग दिख रही है
सावन की ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">यह रंगीन फ़िज़ा<br />
बेरंग दिख रही है<br />
सावन की बदली<br />
तंग दिख रही है<br />
एक मैं सिर्फ़ मैं<br />
यहाँ बैठा रहता हूँ<br />
बैठकर तेरा नाम<br />
अपने साथ लेता हूँ<br />
सदियाँ गुज़र गयीं<br />
(ऐसा लगता है मुझको,<br />
शायद कुछ ग़लत कह गया मैं,<br />
लेकिन ऐसा ही है!!)<br />
मौसम बदल गये<br />
अरमाँ बदल जायें<br />
अब तो लौट आ<br />
अब तो लौट आ<br />
मुझे तेरा इंतज़ार है<br />
सिर्फ़ तेरा ही...</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’<br />
लेखन वर्ष: २०००-२००१</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[दिल में तेरे लिए सच्ची अक़ीदत है]]></title>
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<pubDate>Thu, 20 Sep 2007 06:37:12 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[है जो किसी से तुम्हें तो गुल से निस्बत ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">है जो किसी से तुम्हें तो गुल से निस्बत है<br />
तुम मुझको मिले हो ये मेरी क़िस्मत है</font></p>
<p><font color="#000000">तेरे तब्बसुम से ही है ये रंगे-बहार<br />
लगता है अब जैसे सारी फ़िज़ा जन्नत है</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी आँखों की गुलाबी डोरियाँ जैसे नश्शा-ए-मै<br />
तिश्ना-लब हूँ मुझे पीने की हसरत है</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी ज़ुल्फ़ों से गुज़रते देखी है मैंने सबा<br />
हाए ये सबा भी कितनी खु़श-क़िस्मत है</font></p>
<p><font color="#000000">तेरे अबरू मानिन्दे-कमान उठते हैं<br />
मुझको तेरे आगोश में मरने की चाहत है</font></p>
<p><font color="#000000">तेरे लब हैं की पंखुड़ियाँ गुलाब की हैं<br />
इक बोसा पाने को शबो-रोज़ की मिन्नत है</font></p>
<p><font color="#000000">सुना है जन्नत की हूरों के बारे में बहुत<br />
मगर उनमें कहाँ ये कशिशे-क़ामत है</font></p>
<p><font color="#000000">देखा है तुमने कभी चाँद को सरे-शाम<br />
एक वही है जो तेरी तरह खू़बसूरत है</font></p>
<p><font color="#000000">हो तुम ही मानिन्दे-खु़दा मेरे लिए<br />
दिल में तेरे लिए सच्ची अक़ीदत है</font></p>
<p><font color="#000000">तुम क़रीब होते हो दर्द मिट जाते हैं<br />
तुमसे ही मुझको होती नसीब फ़रहत है</font></p>
<p><font color="#000000">तुम्हें देखा तो मैंने अपनी ज़िन्दगी देखी<br />
तुमको चाहना ही खु़दा की इबादत है</font></p>
<p><font color="#000000">मेरा दिल जितना चाहता है तुमको सनम<br />
तुम्हें भी मुझसे उतनी ही मोहब्बत है</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'<br />
लेखन वर्ष: २६/०७/२००४ <a href="http://vinayprajapati.iblog.com/post/222399/416165"></a></p>
]]></content:encoded>
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<title><![CDATA[अब 'विनय' तेरे ग़म से ग़ाफ़िल नहीं रहा]]></title>
<link>http://vinayprajapati.wordpress.com/2007/09/19/%e0%a4%85%e0%a4%ac-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a4%af-%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a5%9a%e0%a4%ae-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a5%9a%e0%a4%be%e0%a5%9e%e0%a4%bf%e0%a4%b2-%e0%a4%a8%e0%a4%b9/</link>
<pubDate>Wed, 19 Sep 2007 19:45:51 +0000</pubDate>
<dc:creator>विनय प्रजापति</dc:creator>
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<description><![CDATA[अब ‘विनय’ तेरे ग़म से ग़ाफ़िल नहीं रहा
दे]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><font color="#000000">अब ‘विनय’ तेरे ग़म से ग़ाफ़िल नहीं रहा<br />
देख तो वो मग़रूर वो संगदिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">हमें कोई शिबासी दे हमने तेरा राज़ न खोला<br />
पर जानाँ ये जान लो मैं बातिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">तेरी कही सुनी सब मुझे वक़्त ने भुला दी<br />
ये ग़ैर तेरी दुश्मनी के क़ाबिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">हमें जब नाज़ थे तो ये दर्द किसलिए हैं<br />
तेरे बाद कोई चेहरा मुस्तक़िल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">तुम हमसे पूछो वह शामे-माज़ी की तन्हाई<br />
कभी कोई इतना दिल में दाख़िल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">तुमने ख़ुद मुझे अपना दोस्त बनाया होता<br />
तुम्हें तो कोई काम कभी मुश्किल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">हमसे एक-एक कर सब हाथ छूटते गये<br />
मेरे कूचे में वो माहे-कामिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">सद्-हैफ़ो-अफ़सोस से कलेजा भर आया<br />
हाए मुझे सिवा ग़म कुछ हासिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">हमें कोई देता ताक़ते-नज़्ज़ाराए-हुस्न<br />
सुना  है मेरी राह में कोई हाइल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">साँसों का धुँआ दिल को दर्द देता है बहुत<br />
ज़िन्दगी में बाइसे-मसाइल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">वो गुफ़्त-गू वो मशविरे वो बयान अपने<br />
ख़ुदा के ज़ख़्म देखे तो मैं बिस्मिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">गर्दिशे-अय्याम की रवानी देखकर<br />
मेरा दिले-सौदा मुज़महिल</font><font color="#c0c0c0">1</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">अब इस चमन में फिरती है खुश्क सबा<br />
मस्जूदा कोई जल्वाए-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">किसके दिन उम्रभर एक से रहते हैं<br />
मुझमें तो वो हुस्ने-अमल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मेरी काविश</font><font color="#c0c0c0">2</font> का किसी राह तो हासिल होगा<br />
हैफ़ मेरे ग़म की कोई मंज़िल नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">मैं अहदे-ज़ीस्त करके किससे तोड़ूँ<br />
मुझे तफ़रकाए-नाक़िसो-कामिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मुझे तुम छोड़कर गये लेकिन क्या बताऊँ<br />
एक अरसा बर्क़े-सोज़े-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">तुमको जाना है तो जाओ कब हमने रोका है<br />
किसी के जाने का ग़म हमें बिल्कुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">इस दरया को ख़्वाहिश है समंदर की<br />
और सहाब का बरसना मुसलसल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">सू-ए-शिर्क सजदे-मस्जूद किये मैंने<br />
क्योंकि मैं तेरे कूचे का माइल</font><font color="#c0c0c0">3</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">अब किससे करूँगा उसकी जफ़ा का शिकवा<br />
आज से कोई दराज़ दस्तिए-क़ातिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">इस ज़र्फ़ कोई आये तो देखे हाल बीमार का<br />
वो पुरसिशे-जराहते-दिल</font><font color="#c0c0c0">4</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">अच्छा हुआ तुमने रोज़े-आख़िर न बोला<br />
रोज़े-विदा से कोई उक़्दाए-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">दु:ख गिनते-गिनते उम्र कट जायेगी<br />
किसी की इनायत किसी का तग़ाफ़ुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">फ़िज़ा क्यों इतनी ख़ामोश है गुलशन में<br />
क्या आशियाँ में नालाए-बुलबुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">था तब मिला नहीं, खोकर मिलता है कौन<br />
दिल मुझे ख़्याले-यारे-वस्ल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मैं जिसको दोस्त कह नहीं सकता अब<br />
मुझे उसके लिए जज़्बाए-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">किसको खरोंचे हो अपने नाख़ून से तुम<br />
इस सीने में कोई जराहते-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">उर्दी-ओ-दै का अब मैं क्या ख़्याल रखूँ<br />
ये कैसी जलन, मुझे तपिशे-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">अपनी यकताई पर बेहद नाज़ था हमको<br />
आज भी है लेकिन वो मुतक़ाबिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">अब भी खिलती है शुआहाए-ख़ुर-फ़ज़िर <br />
मगर फ़िज़ा में शाहिद-ए-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">बहुत ढूँढ़ा हमने उसके जैसा, न पाया एक<br />
वो नमकपाशे-ख़राशे-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">अब ख़ुल्द में रहें या दोज़ख में रहें हम<br />
ऐ सनम मेरा तो आबो-गिल</font><font color="#c0c0c0">5</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">उस फ़ितनाख़ेज़ का नहीं अब डर मुझको<br />
कि मेरे दिल में स’इ-ए-बेहासिल</font><font color="#c0c0c0">6</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">आँखों से निक़ाब उठाओ कि वहम खुल जाये<br />
कि तुझमें वो तर्ज़े-तग़ाफ़ुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">कहने को तो ज़ामिन नहीं मुझसा ज़माने में<br />
पर जाने क्यों मुझे तहम्मुल</font><font color="#c0c0c0">7</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">वो जिसकी चाप से धड़कनें रुक जायें थीं<br />
ज़िन्दगी में वो हौले-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">ऐ लोगों मैं ख़ुद को किस ज़ात का बताऊँ<br />
सुना है तुममें ज़रा भी दीनो-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">दायम अपने बग़ल में पाओगे तुम हमको<br />
चाहो तो कह लो मैं तुझमें मुश्तमिल</font><font color="#c0c0c0">8</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">क्यों है मुझको तेरे रूठ कर जाने का ग़म<br />
जबकि जानते हो मैं कभी तेरा काइल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">कहता तो हूँ बात दिल की मगर क्या करूँ<br />
मेरा कोई भी ख़्याल मानिन्दे-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">उसकी ख़ामोश आँखों में अयाँ थीं बातें दिल की<br />
वो चाहकर भी कभी सू-ए-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">किया जो मैंने तुम्हें अपना समझकर किया<br />
ये दिल तेरी जफ़ा से मुनफ़’इल</font><font color="#c0c0c0">9</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">मैंने देखा था उसे जाते ख़ुल्द की ओर<br />
वो हलाके-फ़रेब-वफ़ा-ए-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">जो कभी साहिल पर था कभी समंदर में<br />
उसको दाग़े-हसरते-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">जिसपे लिखा करते थे तुम अपना नाम<br />
शख़्स वो आज गर्दे-साहिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">आज फ़ारिग</font><font color="#c0c0c0">10</font> हूँ कि तुम हो मेरे ग़मख़्वार<br />
मैं हरीफ़े-मतलबे-मुश्किल<font color="#c0c0c0">11</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">था तो थोड़ा बहुत मैं ये मानता हूँ लेकिन<br />
आज उतना भी तो सोज़िशे-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मैं दर्द को दिल से जुदा कर सकता हूँ<br />
पर फ़ुसूने-ख़्वाहिशे-सैक़ल</font><font color="#c0c0c0">12</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">अब मैं किस मुँह से जाऊँ बज़्म में उसकी<br />
ये दिल दरख़ुर-ए-महफ़िल</font><font color="#c0c0c0">13</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">देखिए शाइबाए-ख़ूबिए-तक़दीर</font><font color="#c0c0c0">14</font> उसमें<br />
वो दिन गया कि रोज़े-अजल नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">इश्क़ फिरता था उस रोज़ गलियों-गलियों<br />
आज किसी में इतना भी ख़लल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">बढ़के आया तो लगा तेरा तीर इस दिल में<br />
चारासाज़ न हुआ पर जाँगुसिल</font><font color="#c0c0c0">15</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">किसपे लिखके भेजूँ मैं तुझे पयाम अपना<br />
पास औराक़े-लख़्ते-दिल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">आस्माँ के पार जाने की तमन्ना थी उसको<br />
पर आइना-ए-बेमेहरि-ए-क़ातिल</font><font color="#c0c0c0">16</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#000000">मेरे मुँह से न सुनो वज्हे-सुखन ईसा<br />
ख़ुद गुलों में रंगे-अदा-ए-गुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">मगर टूटा है किसी का नाज़ुक दिल मुझसे<br />
ये डर कि मैं क़ाबिले-सुम्बुल नहीं रहा</font></p>
<p><font color="#000000">अब कोई रहनुमा नहीं रहे-इश्क़ में<br />
तुम ख़ुश रहो तेरी राह में साइल</font><font color="#c0c0c0">17</font> नहीं रहा</p>
<p><font color="#999999">१. </font><font color="#000000">निष्तेज</font> २. <font color="#000000">कोशिश, द्वेष</font> ३. <font color="#000000">अनुरक्त, आसक्त</font> ४. <font color="#000000">दिल के ज़ख़्म का हाल पूछने वाला<br />
</font>५. <font color="#000000">शरीर और आकार</font> ६. <font color="#000000">निष्फल प्रयत्न</font> ७. <font color="#000000">दिल की घबराहट, सहनशक्ति</font> ८.<font color="#000000"> शामिल</font><br />
९. <font color="#000000">लज्जित</font> १०. <font color="#000000">निश्चिंत</font> ११. <font color="#000000">कठिन काम कर लेने वाला</font> १२. <font color="#000000">परिष्कृति की अभिलाषा का जादू</font><br />
१३. <font color="#000000">महफ़िल के योग्य</font> १४. <font color="#000000">सौभाग्य की झलक</font> १५. <font color="#000000">जानलेवा, दुखदायी</font><br />
१६. <font color="#000000">माशूक़ की बेरहमी का सुबूत</font> १७. <font color="#000000">उम्मीदवार, प्रश्नकर्ता</font></p>
<hr />शायिर: विनय प्रजापति 'नज़र'<br />
लेखन वर्ष: २००५</p>
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