सौंधी हुई एक खु़शबू मेरी आँखों में आकर सो गयी है कभी भर जो आती है आँख सारा मंज़र महका देती है… तुम्हारे बिन लम्हों की गलियों में सदियों का फ़ासला तय कर रहा हूँ भटक रहा हूँ तुम्हारा नाम तुम्हारा नि… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: सौंधी हुई एक खु़शबू मेरी आँखों में आकर सो गयी है कभी भर जो आती है आँख सारा मंज़र महका देती है… … more →
विनय wrote 1 year ago: अजब जाला है डोरियों का एक डोर का छोर जाने और कितनी डोरियों से जुड़ा है… डोरियाँ कुछ मानूस जानी … more →