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Blogs about: अंधेरा

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-एक दिए की रौशनी तले- (दीपावली त्यौहार)5 comments

Nidhi KM wrote 1 month ago: दीपावली की रात… एक घर मे… छोटी-छोटी बेटियाँ, माँ का हाथ बटा रही है, घर मे रंग-रोगन कर, प … more →

Tags: कविताएँ, कुछ पंक्तियाँ, छनिकाएँ, अमीर, उपहार, कपड़े, कर्तव्य, घर, झोपड़ी

फिर से लौटेंगे भेड़िए - रवि कुमार28 comments

रवि कुमार, रावतभाटा wrote 3 months ago: फिर से लौटेंगे भेड़िए – रवि कुमार ( a kavita poster by ravi kumar, rawatbhata) एक कविता पोस्टर … more →

Tags: कविता-पोस्टर, कविताएं, भेडिये, रवि कुमार, Ravi kumar, ravikumarswarnkar

रात के अंधेरे ही सही - अनीस इमाम17 comments

रवि कुमार, रावतभाटा wrote 3 months ago: रात के अंधेरे ही सही – अनीस इमाम ( a kavita poster by ravi kumar, rawatbhata) शब्दों के कुछ सम … more →

Tags: कविता-पोस्टर, सूरज, रात, अनीस इमाम

क्यों जंग का बिगुल बजा रहे हो-हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: कमरों में बंद दौलत लूटकर लुटेरे जा सके यहां से कितनी दूर। उसकी चकाचैंध में रौशनी खो बैठे उनके नूर। अ … more →

Tags: शायरी, व्यंग्य, web dunia, web bhaskar, web navabharat, अभिव्यक्ति, अनुभूति, शब्द, इंटरनेट

हमारी आंखें लुप्त हो रही हैं10 comments

रवि कुमार, रावतभाटा wrote 8 months ago: हमारी आंखें लुप्त हो रही हैं (a poem by ravi kumar, rawatbhata) हम एक अंधेरी खान में जी रहे हैं हम क … more →

Tags: कविताएं, आंखें, खान

तुझे इक हर्फ़ में कैसे लिख दूँ7 comments

विनय wrote 1 year ago: बोल तुझे इक हर्फ़ में कैसे लिख दूँ तस्वीर नहीं बनती कभी हर्फ़ों से… तू रोशनी और यह तन्हाई अंधेरा … more →

Tags: मेरी त्रिवेणी, इश्क़, Love, light, तन्हाई, प्यार, रोशनी, मोहब्बत, तस्वीर

बारहा पिरोये हैं कई ज़ख़्म

विनय wrote 1 year ago: बारहा पिरोये हैं कई ज़ख़्म साँस के एक ही धागे में टुकड़े-टुकड़े बिखरी हुई ज़िन्दगी बहुत नज़दीक़ लगी है त … more →

Tags: मेरी त्रिवेणी, ज़िन्दगी, इश्क़, Love, प्यार, मोहब्बत, साँस, Life, ज़ख़्म


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