Blogs about: अंधेरा

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क्यों जंग का बिगुल बजा रहे हो-हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: कमरों में बंद दौलत लूटकर लुटेरे जा सके यहां से कितनी दूर। उसकी चकाचैंध में रौशनी खो बैठे उनके नूर। अ … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, इंटरनेट, दीपक भारतदीप, व्यंग्य, शब्द, शायरी, हिंदी पत्रिका, हिन्दी

हमारी आंखें लुप्त हो रही हैं10 comments

रवि कुमार, रावतभाटा wrote 2 months ago: हमारी आंखें लुप्त हो रही हैं (a poem by ravi kumar, rawatbhata) हम एक अंधेरी खान में जी रहे हैं … more →

Tags: कविताएं, आंखें, खान

तुझे इक हर्फ़ में कैसे लिख दूँ7 comments

विनय wrote 11 months ago: बोल तुझे इक हर्फ़ में कैसे लिख दूँ तस्वीर नहीं बनती कभी हर्फ़ों से… तू रोशनी और यह तन्हाई अंधेरा … more →

Tags: मेरी त्रिवेणी, इश्क़, तन्हाई, तस्वीर, प्यार, मोहब्बत, रोशनी, हर्फ़, dark

बारहा पिरोये हैं कई ज़ख़्म

विनय wrote 11 months ago: बारहा पिरोये हैं कई ज़ख़्म साँस के एक ही धागे में टुकड़े-टुकड़े बिखरी हुई ज़िन्दगी बहुत नज़दीक़ लगी है त … more →

Tags: मेरी त्रिवेणी, ज़िन्दगी, इश्क़, Love, प्यार, मोहब्बत, साँस, Life, ज़ख़्म


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