यूँ इश्क़ का हमने दिया है इम्तिहां अक़्सर मुँह में ज़ुबां होते हुए थे बेज़ुबां अक़्सर इश्क़ की तासीर ये समझा नहीं कोई इश्क़ में मिट जाते हैं नाम-ओ-निशां अक़्सर अश्क़ बिखर जाते हैं बरसात का पानी बनकर ख… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 4 months ago: यूँ इश्क़ का हमने दिया है इम्तिहां अक़्सर मुँह में ज़ुबां होते हुए थे बेज़ुबां अक़्सर इश्क़ की तासीर … more →