यह ज़िन्दगी मेरी एक पतंग है मैं जिसको चाहता हूँ वह मुझसे बेरंग है उड़ती है बिल्कुल अकेली ढ़ूढ़ती है कोई सहेली यह सच है या कोई पहेली कभी इधर डोलती है कभी उधर डोलती है जाने किसमें क्या टटोलती है यह मुमकि… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: यह ज़िन्दगी मेरी एक पतंग है मैं जिसको चाहता हूँ वह मुझसे बेरंग है उड़ती है बिल्कुल अकेली ढ़ूढ़ती है क … more →