कल्पना की लकीरों से, तेरी एक तस्वीर बनाई है जब भी देखती हूँ उसमे, तेरा ही अक्स नज़र आता है किसी का उदास चेहरा उस, अजनबी फ़रिश्ते से देखा नही जाता किसी कि भी आँखों में आंसू देख ,मदद को दोडा वो आता है हर… more →
कुछ िदल सेkmuskan wrote 11 months ago: कल्पना की लकीरों से, तेरी एक तस्वीर बनाई है जब भी देखती हूँ उसमे, तेरा ही अक्स नज़र आता है किसी का उद … more →
विनय wrote 1 year ago: यह मुनासिब नहीं मैं भुला दूँ तुझको तेरे सिवा कुछ होश नहीं है मुझको ना जाने कितने अजनबी गुज़रे हैं मेर … more →
विनय wrote 1 year ago: जाने दो जाने दो यह लम्हा गुज़र जाने दो न रोको इसे न सँभालो, बह जाने दो… वक़्त के क़तरे बहते रहते … more →
विनय wrote 1 year ago: रोज़ सपनों में आता है इन रातों में जगाता है मैं क्यों न जानूँ उसको मैं न पहचानूँ उसको वह मुझसे अजनबी … more →
विनय wrote 2 years ago: जिससे दुनिया ने हर चीज़ छीनी जिसे अपनी चाहत न मिली जिसके दरवाज़े पर खु़शी आकर लौट गयी जिसकी आँखों से न … more →
विनय wrote 2 years ago: तह पर तह लगी है कौन उतारेगा धूल पन्नों पर से आँधियों में… मैं खड़ा रहा साथ उसके न उसने मुझको द … more →
विनय wrote 2 years ago: उसकी आँखों ने मुझे पहचाना तो मगर एक डर से अजनबी-सा डर… चाहता तो रुक कर बात कर लेता मगर मैं - ब … more →
विनय wrote 2 years ago: लहर इक ‘विनय’ टकराया जो पत्थर से टूट गया जब भी निकला आगे उसके हाथों से एक हाथ छूट गया जब भी बैठता है … more →