कल्पना की लकीरों से, तेरी एक तस्वीर बनाई है जब भी देखती हूँ उसमे, तेरा ही अक्स नज़र आता है किसी का उदास चेहरा उस, अजनबी फ़रिश्ते से देखा नही जाता किसी कि भी आँखों में आंसू देख ,मदद को दोडा वो आता है ह… more →
कुछ िदल सेkmuskan wrote 6 months ago: कल्पना की लकीरों से, तेरी एक तस्वीर बनाई है जब भी देखती हूँ उसमे, तेरा ही अक्स नज़र आता है किसी का उद … more →
विनय wrote 10 months ago: यह मुनासिब नहीं मैं भुला दूँ तुझको तेरे सिवा कुछ होश नहीं है मुझको ना जाने कितने अजनबी गुज़रे हैं मेर … more →
विनय wrote 1 year ago: जाने दो जाने दो यह लम्हा गुज़र जाने दो न रोको इसे न सँभालो, बह जाने दो… वक़्त के क़तरे बहते रहते … more →
विनय wrote 1 year ago: रोज़ सपनों में आता है इन रातों में जगाता है मैं क्यों न जानूँ उसको मैं न पहचानूँ उसको वह मुझसे अजनबी … more →
विनय wrote 1 year ago: उसकी आँखों ने मुझे पहचाना तो मगर एक डर से अजनबी-सा डर… चाहता तो रुक कर बात कर लेता मगर मैं - ब … more →
विनय wrote 1 year ago: लहर इक ‘विनय’ टकराया जो पत्थर से टूट गया जब भी निकला आगे उसके हाथों से एक हाथ छूट गया जब भी बैठता है … more →