सत्यवीर सिंह जी ज्ञान(म) जी अजॆय जी नित्य सूर्य कॆ समान मार्ग तॊ दिखा रहॆ। आप की ज़ुबान से बह रही सुवाणी की माप तो न कर सके, धन्य धन्य हम रहे। राज्य-राज्य भिन्न हो ध्यॆय एक ही रहॆ आज हिंदी का सही रूप … more →
अमृतवाणीRaji Chandrasekhar wrote 2 years ago: सत्यवीर सिंह जी ज्ञान(म) जी अजॆय जी नित्य सूर्य कॆ समान मार्ग तॊ दिखा रहॆ। आप की ज़ुबान से बह रही सुव … more →