अनामिका की एक और कविता एक औरत का पहला राजकीय प्रवास वह होटल के कमरे में दाख़िल हुई अपने अकेलेपन से उसने बड़ी गर्मजोशी से हाथ मिलाया कमरे में अंधेरा था घुप्प अंधेरा था कुएँ का उसके भीतर भी ! सा… more →
अनहद नादPRIYANKAR wrote 4 months ago: अनामिका की एक कविता पहली पेंशन श्रीमती कार्लेकर अपनी पहली पेंशन लेकर जब घर लौटीं– सारी निलम्बि … more →
PRIYANKAR wrote 1 year ago: अनामिका की एक और कविता एक औरत का पहला राजकीय प्रवास वह होटल के कमरे में दाख़िल हुई अपने अकेलेपन … more →
PRIYANKAR wrote 1 year ago: अनामिका की एक कविता मौसियां वे बारिश में धूप की तरह आती हैं — थोड़े समय के लिए और अचानक हा … more →
PRIYANKAR wrote 1 year ago: अनामिका की एक कविता स्त्रियां पढ़ा गया हमको जैसे पढ़ा जाता है काग़ज बच्चों की फटी कॉपियों का ‘चन … more →