अपने आरंभिक छात्रजीवन के समय संस्कृत पाठ्यपुस्तकों में मैंने “सत्यं वद । धर्मं चर ।… मातृदेवो भव । पितृदेवो भव । …” के शिक्षाप्रद वचन पढ़े थे । अपरिपक्व सोच के उस काल में इन वचनों की अर्थवत… more →
विचार संकलनयोगेन्द्र जोशी wrote 4 months ago: अपने आरंभिक छात्रजीवन के समय संस्कृत पाठ्यपुस्तकों में मैंने “सत्यं वद । धर्मं चर ।… मातृदेवो … more →