(कविता – स्तेफ़ान स्पेंडर) बंदूकें धन के अंतिम कारण के हिज्जे बताती हैं बसंत में पहाड़ों पर सीसे के अक्षरों में लेकिन जैतून के पेड़ों के नीचे मरा पड़ा वो लड़का अभी बच्चा ही था और बहुत अनाड़ी भी … more →
अनुवादanileklavya wrote 4 months ago: (कविता – स्तेफ़ान स्पेंडर) बंदूकें धन के अंतिम कारण के हिज्जे बताती हैं बसंत में पहाड़ों पर सी … more →
anileklavya wrote 4 months ago: (लेख – अरुंधती रॉय) अभी हाल ही में एक युवा कश्मीरी मित्र से मेरी बात हो रही थी कश्मीर में जीवन … more →
anileklavya wrote 4 months ago: (कविता – स्तेफ़ान स्पेंडर) मैं हमेशा उनके बारे में सोचता हूँ जो सच में महान थे मैं हमेशा उनके … more →
anileklavya wrote 4 months ago: (कविता – हैरॉल्ड पिंटर) हँसी थम जाती है पर कभी नहीं होती खत्म हँसी झुठाने में लगा देती है अपना … more →
anileklavya wrote 5 months ago: (लेख – हावर्ड ज़िन – 09 दिसंबर, 2006) यह निबंध हावर्ड ज़िन की सिटी लाइट्स द्वारा प्रकाशि … more →
anileklavya wrote 5 months ago: (कविता – हैरॉल्ड पिंटर) लाश कहाँ मिली थी? लाश किसको मिली थी? लाश जब मिली तब क्या वह मृत थी? ला … more →
anileklavya wrote 5 months ago: (कविता – हैरॉल्ड पिंटर) मौत की उम्र तो हो चली है पर उसके पंजे में अब भी दम है पर मौत आपको निहत … more →
anileklavya wrote 5 months ago: (लेख – तारिक़ अली) पिछले तीन सप्ताह से पाकिस्तान के सैनिक शासक तालिबान को इस बात के लिए मनाने … more →
योगेन्द्र wrote 5 months ago: विगत पोस्ट (२ जनवरी, २००९) के आगे । इस ब्लॉग पर प्रस्तुत मेरे लेख-शृंखला का उद्येश्य रहा है उन कुछ श … more →
anileklavya wrote 5 months ago: (लेख – पी. साईनाथ – 03 अप्रैल, 2006) किसानों द्वारा आत्महत्याओं की संख्या इस हफ़्ते 400 … more →
anileklavya wrote 5 months ago: (कविता – हैरॉल्ड पिंटर) और दोपहर के बाद आते हैं सजे-धजे प्राणी लाशों में सूंघने के लिए और करने … more →
anileklavya wrote 5 months ago: (कविता – पाब्लो नेरूदा) फिर एक सुबह सब कुछ जल रहा था, एक सुबह लपटें उठ रही थीं ज़मीन से इंसानो … more →
Aditya Nigam wrote 7 months ago: [यह लेख कुछ अरसा पहले वाक् पत्रिका के लिए लिखा गया था - पुराने दोस्त सुधीश पचौरी के इसरार पर। जब यह … more →
योगेन्द्र wrote 8 months ago: (पिछले लेख से आगे) मैंने पिछली बार अपना मत व्यक्त किया था कि अनुवाद में भावों को महत्त्व दिया जाना च … more →
योगेन्द्र wrote 8 months ago: (पिछले लेख से आगे) मैंने इस बात की चर्चा की थी कि एनडीटीवी के प्रियदर्शनजी ने तीन शब्दों (वस्तुतः पद … more →
योगेन्द्र wrote 9 months ago: कल के दैनिक समाचार-पत्र ‘हिन्दुस्तान’ में एनडीटीवी टीवी चैनल से संबद्ध प्रियदर्शनजी का लिखा एक आलेख … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: आज यह ब्लॉग/पत्रिका भी बीस हजार पाठक संख्या को पार गया. यह मेरा पांचवां ब्लॉग है जिसने यह संख्या पार … more →