उसे प्यार करने में मै अपना घर जला बैठा खुद अपने ही सीने पे एक नश्तर चला बैठा हर बार सोचता था बदलूंगा आप को हर बार उसी भूल का खंजर चला बैठा जब भी जताया हक़, हक़ से मै जल गया एक बार नहीं हाथ मै अक़्सर जला … more →
इक शायर अंजाना सा...Nidhi KM wrote 7 months ago: आज फिर मन उदास है, कोई अपना नही पास है… चल रही हूँ जिन रहो मे, कभी … more →
Nidhi KM wrote 8 months ago: वो कहता है, तुम अपना प्यार शब्दों में बयां करती हो कैसे ? वो शब्दों की बात करता है … जो दिल मे … more →
kmuskan wrote 1 year ago: बहुत दिनों तक दिल्ली से बाहर रही इसलिए कुछ लिख नही पाई लेकिन अब फिर से दिल्ली मे हूँ इसलिए कुछ पंक्त … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: उसे प्यार करने में मै अपना घर जला बैठा खुद अपने ही सीने पे एक नश्तर चला बैठा हर बार सोचता था बदलूंगा … more →