स्वर: उस्ताद अमानत अली ख़ान और फ़रीदा ख़ानुम फूल-फूल ने ली अंगड़ाई कली-कली मुस्काई मिलन रुत आई… गुलशन-गुलशन में फूलों ने रंग नये बिखराए बादल भी अपने दामन में भर-भर मौजें लाये महफ़िल-महफ़िल गूँज उठी है खुशिय… more →
निंदा पुराणअंकुर वर्मा wrote 1 year ago: स्वर: उस्ताद अमानत अली ख़ान और फ़रीदा ख़ानुम फूल-फूल ने ली अंगड़ाई कली-कली मुस्काई मिलन रुत आई… गुलशन-गु … more →
अंकुर वर्मा wrote 1 year ago: रचना: क़तील शिफ़ाई स्वर: उस्ताद अमानत अली ख़ान आ मेरे प्यार की ख़ुशबू मंजिल पे तुझे पहुँचायें चलता चल हम … more →
अंकुर वर्मा wrote 1 year ago: रचना: इब्ने इंशा स्वर: उस्ताद अमानत अली ख़ान इंशा जी उठो अब कूच करो इस शहर में दिल को लगाना क्या इस द … more →
अंकुर वर्मा wrote 1 year ago: स्वर: उस्ताद अमानत अली ख़ान होंठों पे कभी उन के मेरा नाम ही आये आये तो सही बर-सर-ए-इल्ज़ाम ही आये (बर … more →