दिल से पूछो, इसकी मोहब्बत क्या है दिल बतायेगा इसकी चाहत क्या है बस तुम हो बस तुम हो सिर्फ़ तुम हो जैसे लहरों को साहिल से प्यार हुआ जैसे अम्बर को बादल से प्यार हुआ ऐसे ही मुझको तुमसे प्यार हो गया मैं द… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: दिल से पूछो, इसकी मोहब्बत क्या है दिल बतायेगा इसकी चाहत क्या है बस तुम हो बस तुम हो सिर्फ़ तुम हो जैस … more →
विनय wrote 1 year ago: यह मौसम है मस्त-मस्त यह आलम है मस्त-मस्त अम्बर पे छायी काली घटा सावन बरसे कर दे मस्त यह मौसम है मस्त … more →
विनय wrote 1 year ago: अम्बर में जब चाँद खिला उस पल से चला जानाँ एक नया सिलसिला मुहब्बत भरी वादियों में इक नया गुल खिला तुम … more →