लुढ़कता पत्थर शिखर से, क्यों हमें लुढ़का न देगा क्रेन पर ऊँचा चढ़ा कर, चैन उसकी तोड़ दी लोभ का दर्शन बना, मझधार नैया छोड़ दी ऋण-यन्त्र से मन्दी बढ़ी, पोखर में डॉलर बह लिया अर्थ की सरिता में भोंडे नाच से मोह… more →
हरिहर झाHarihar Jha हरिहर झा wrote 2 months ago: लुढ़कता पत्थर शिखर से, क्यों हमें लुढ़का न देगा क्रेन पर ऊँचा चढ़ा कर, चैन उसकी तोड़ दी लोभ का दर्शन बना … more →