तेरे खुशबु मे बसे ख़त मैं जलाता कैसे, जिनको दुनिया की निगाहों से छुपाये रखा, जिनको इक उम्र कलेजे से लगाए रखा, जिनका हर लफ्ज़ मुझे याद था पानी की तरह, याद थे मुझको जो पैगाम-ऐ-जुबानी की तरह, मुझ को प्या… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामMurali Swaminathan wrote 8 months ago: लगभग एक हफ्ते पहले मैंने अपना ब्लॉग हिंदी में लिखने का निर्णय लिया था और पिछले दो दिनों में तीन पोस् … more →
Murali Swaminathan wrote 8 months ago: मुझे हिंदी बोलने में कोई दिक्कत नहीं है और न ही मेरी हिंदी की बोली मैं “पडोसन के महमूद” … more →
योगेन्द्र जोशी wrote 11 months ago: हाल में मैंने एक लेख लंदन (इंग्लैंड) से छपने वाली पत्रिका ‘नेचर’ (NATURE, Vol 455, 23 October 2008; … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हर शब्द अपना अर्थ लेकर ही जुबान से बाहर आता जो मनभावन हो तो वक्ता बनता श्रोताओं का चहेता नहीं तो खलन … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: तेरे खुशबु मे बसे ख़त मैं जलाता कैसे, जिनको दुनिया की निगाहों से छुपाये रखा, जिनको इक उम्र कलेजे से … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: झुकी झुकी सी नज़र बेकरार है के नही, दबा दबा सा सही दिल में प्यार है के नही, तू अपने दिल की जवाँ धडकनो … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो, क्या गम है जिसको छुपा रहे हो, आंखो में नमी हँसी लबो पर, क्या हाल है क्य … more →