Hi Friends, First of all I am sorry for again I am not writing regularly rather say I am not writing et al. I would not say I have been lazy but I really lacked motivation to write. In fact it would b… more →
चिन्तनrachanabajaj wrote 2 days ago: यहां और यहां से पता चला कि हिन्दी ब्लॊग जगत के नामी- गिरामी चिट्ठाकार इन दिनो बेनामीयों से हैरान परे … more →
rachanabajaj wrote 1 week ago: ..वैसे तो आप मेरी आवाज कई दिनों पहले सुन चुके हैं. इस बार सुनिये मेरी और मेरी दीदी के सम्मिलित स्व … more →
rachanabajaj wrote 2 months ago: कभी कभी हमारे अपने, हमसे कहीं दूर चले जाते हैं, वो फ़िर कभी वापस लौट कर नही आ पाते हैं.. फ़िर भी उन्ह … more →
rachanabajaj wrote 3 months ago: ……. कभी कभी ऐसा होता है कि किसी इन्सान को हम धीरे धीरे, परत दर परत पह्चानने लगते हैं तब … more →
rachanabajaj wrote 3 months ago: आज मैने एक पत्रिका मे “CLERIHEW ” के बारे मे पढा.. एक ब्रिटिश लेखक श्री Edmund Clerihew … more →
rachanabajaj wrote 3 months ago: *** ये मेरे अपने दिमाग की उपज नही है बल्कि बहुत पहले किसी मित्र ने मेल को अग्रेषित करके भेजा था.. कर … more →
rachanabajaj wrote 3 months ago: बाधाओं को दूर भगा दो, नई-नई अब राह बना दो, कर लो तुम नारि अभिनन्दन! नही रही मै ऐसी-वैसी, नही परिक्षा … more →
rachanabajaj wrote 4 months ago: मैने जैसे ही कमरे के अन्दर कदम रखा, उसने मुस्कुराते हुए मुझसे पूछा- “आ गयीं आप?” मैने … more →
rachanabajaj wrote 4 months ago: जी भर के जी ले इसे तू अभी ही, कभी ना पलट के ये पल आयेगा! गम हो या खुशियां, ठहर कुछ न पाता, एक दिन वक … more →
rachanabajaj wrote 4 months ago: इस तरह की बात अब हर दिन सुनाई देती है.. दुख होता है, लेकिन दुख होने की भी एक आदत सी पड जाती है … more →
rachanabajaj wrote 4 months ago: कल ऒस्कर समारोह मे संगीतकार रहमान की “जय” के साथ ही पिन्की की “स्माइल” भी … more →
rachanabajaj wrote 5 months ago: इस नववर्ष के आगमन के समय मै अपने भाईयो, भाभीयो, दीदी और खूब सारे बच्चो के साथ थी….. व्यस्त … more →
rachanabajaj wrote 7 months ago: *** मैने कल कल क्यूं कुछ नही लिखा, इस बात को भूल जाईये! आईये! आज मेरे साथ, जरा सा मुस्कुरा इये!! * … more →
rachanabajaj wrote 7 months ago: (सात दिन सात पोस्ट -२) कल की बात जहां खत्म की थी वही से शुरु करती हूं, यानि भारतीय पुरुष प्रधान समा … more →
rachanabajaj wrote 7 months ago: हमारे आस पास जो चल रहा हो उसका असर हम पर भी होता ही है..पिछले दिनो मैने जम कर टेलीविजन देखा– … more →
rachanabajaj wrote 9 months ago: जो बीत गई वो बात गई, जो कल होगा वो सपना है, आज जो मेरे साथ चल रहा, उतना ही बस अपना है! मित्र मिल … more →
rachanabajaj wrote 10 months ago: वैसे तो करने के लिये बहुत काम होते हैं, लेकिन फ़िर भी कभी कभी कुछ भी करने का मन नही करता और् ऐसे ही फ़ … more →
rachanabajaj wrote 10 months ago: ..हिन्दी चिट्ठा जगत अब बहुत बडा हो चुका है और हम सब विभिन्न क्षेत्रों मे रहते हैं…हम सब अलग अल … more →
rachanabajaj wrote 11 months ago: मुझे सिर्फ बातें बनाना ही नही और भी बहुत कुछ आता है.:) ये देखिये, मैने और मेरी बेटी ने मिलकर रंगोल … more →