ऐसी चीख कि मुर्दे भी कब्र में उठकर खड़े हो जाएं। लगा कि आवाज़ बिल्कुल कानों के पास से आई है। उन हालात में. . .मैं उछलकर चारपाई पर बैठ गया, आसमान पर अब भी तारे थे. . .शायद रात का तीन बजा होगा। अब्बाजान… more →
चौपालSatish Chandra satyarthi wrote 1 year ago: ऐसी चीख कि मुर्दे भी कब्र में उठकर खड़े हो जाएं। लगा कि आवाज़ बिल्कुल कानों के पास से आई है। उन हाला … more →