( यह कविता सामान को नहीं, ईमान को, सहज आत्मीयता और खुलूस को और अन्ततः मनुष्यता को बचा लेने की एक छोटी-सी कोशिश को बयान करती रोज़मर्रा की ज़िंदगी की तस्वीर है . दैनिक जीवन की रगड़-घसड़ से भरी-पूरी इस कवित… more →
अनहद नादPRIYANKAR wrote 1 year ago: ( यह कविता सामान को नहीं, ईमान को, सहज आत्मीयता और खुलूस को और अन्ततः मनुष्यता को बचा लेने की एक छोट … more →
PRIYANKAR wrote 1 year ago: असद ज़ैदी की एक कविता संस्कार बीच के किसी स्टेशन पर दोने में पूड़ी-साग खाते हुए आप छिपाते हैं अपना … more →