तोड़कर अहद-ए-करम नाआशना हो जाइये, बंदापरवर जाइये अच्छा ख़फ़ा हो जाइये, राह में मिलिये कभी मुझ से तो अज़राह-ए-सितम, होंठ अपने काटकर फ़ौरन जुदा हो जाइये, जी में आता है के उस शोख़-ए-तग़ाफ़ुल केश से, अब ना मिलिये… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 1 year ago: तोड़कर अहद-ए-करम नाआशना हो जाइये, बंदापरवर जाइये अच्छा ख़फ़ा हो जाइये, राह में मिलिये कभी मुझ से तो अज़र … more →