कोई हमें भाता नहीं उस मेहरबां को छोड़कर और कुछ मिलता नहीं उससे फ़ुगां को छोड़कर अपनी अपनी है तमन्ना अपनी अपनी है दुआ चुन लिया हमने उसे सारे जहां को छोड़कर ऐसा नहीं कोई भी छत कोई भी दर हासिल नहीं हमको जाना… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: कोई हमें भाता नहीं उस मेहरबां को छोड़कर और कुछ मिलता नहीं उससे फ़ुगां को छोड़कर अपनी अपनी है तमन्ना अपन … more →