मैं सबसे बुरा था सबसे बुरा हूँ सबसे बुरा ही रहूँगा मैं जी रहा था जी रहा हूँ ऐसे ही जीता रहूँगा उसने मुझको सदा ख़ुशबू के इक बादल के पार देखा और मैं चाह कर भी कभी उसको इस तरह न देखूँगा मैं सबसे बुरा था … more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: मैं सबसे बुरा था सबसे बुरा हूँ सबसे बुरा ही रहूँगा मैं जी रहा था जी रहा हूँ ऐसे ही जीता रहूँगा उसने … more →
विनय wrote 1 year ago: ज़ोर से दिल धड़कता है (हाँ धड़कता है) तूफ़ान साँसों में चलता है (हाँ चलता है) आँखें ठहर जाती हैं तस्वी … more →
विनय wrote 2 years ago: लहर इक ‘विनय’ टकराया जो पत्थर से टूट गया जब भी निकला आगे उसके हाथों से एक हाथ छूट गया जब भी बैठता है … more →