मंज़िल न दे चराग न दे हौसला तो दे, तिनके का ही सही तू मगर आसरा तो दे, मैंने ये कब कहा के मेरे हक में हो जवाब, लेकिन खामोश क्यूँ है तू कोई फैसला तो दे, बरसों मैं तेरे नाम पे खाता रहा फरेब, मेरे खुदा कहा… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 1 year ago: मंज़िल न दे चराग न दे हौसला तो दे, तिनके का ही सही तू मगर आसरा तो दे, मैंने ये कब कहा के मेरे हक में … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: ये तो नही के गम नही, हाँ मेरी आँख नम नही, तुम भी तो तुम नहीं हो आज, हम भी तो आज हम नही, अब न खुशी की … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: ऐ खुदा रेत के सेहरा को समंदर कर दे, यह छलकती हुयी आखो को भी पत्थर कर दे, तुझ को देखा नही, महसूस किया … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: सोचा नहीं अच्छा-बुरा, देखा-सुना कुछ भी नहीं.. मांगा खुदा से रात-दिन, तेरे सिवा कुछ भी नहीं.. देखा तु … more →