सूरज की किरण मेरे चाँद से टकराई, तन बदन मे मेरे जैसे आग लग आई, उसने ली कुछ इस तर… more →
मेरे दिल ने...विनय प्रजापति wrote 3 weeks ago: न वह कभी आँखों से उतारा ही गया और न कभी … more →
Amarjeet Singh wrote 2 months ago: सूरज की किरण मेरे चाँद से टकराई, तन बदन … more →
विनय प्रजापति wrote 3 months ago: मुझसे कोई प्यार कर ले दिल अपना देकर, दि … more →
विनय प्रजापति wrote 5 months ago: मैं मर जाऊँ तो अपनी हद से गुज़र जाऊँ तो क … more →
विनय प्रजापति wrote 5 months ago: हल्के-हल्के आँसू टूटे हैं मेरी आँखों स … more →
विनय प्रजापति wrote 5 months ago: जब भी तेरा नाम लेती हैं बहुत ख़ुश होती … more →
विनय प्रजापति wrote 5 months ago: मैं आँखों के लिए ख़ाब खरीदने निकला सित … more →
विनय प्रजापति wrote 5 months ago: दर्द सुलगते क्यों हैं जलते क्यों नहीं … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: तेरी जो ख़ाहिश करता हूँ क्या कोई गुनाह … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: कोई आता है ज़िन्दगी में, जैसे रोशनी जज़् … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: दिल की लगी दिल को दिल से लगी जब लगी यह आ … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: रहते हैं हम जिन ख़ाबों में उन ख़ाबों क … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: जैसे ज़िन्दगी वीरान है जैसे ज़िन्दगी बे … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: वह कहाँ चले गये जो कल घर आये थे हमारे थो … more →
विनय प्रजापति wrote 8 months ago: धीरे-धीरे उतरती है साँस सीने में यह दर … more →
विनय प्रजापति wrote 9 months ago: तुमको ज़िन्दगी की हर ख़ुशी मिले तेरे लब … more →
विनय प्रजापति wrote 11 months ago: उसकी आँखों ने मुझे पहचाना तो मगर एक डर … more →
विनय प्रजापति wrote 11 months ago: बारिश, बूँदें, पत्ते, मिट्टी -सौंधी रात, … more →
विनय प्रजापति wrote 1 year ago: एक पानी में भीगी हुई किताब जाने किसने? … more →