सूरज की किरण मेरे चाँद से टकराई, तन बदन मे मेरे जैसे आग लग आई, उसने ली कुछ इस तरह से अंगडाई, फूलों से उड़ एक तितली मेरे करीब आई, आँखें खुली नजरो से नज़रे टकराई, थोड़ा वो शरमाई फिर मुस्कुराई, दिल मे मेरे… more →
मेरे दिल ने...विनय wrote 2 months ago: आँखों की ख़ुशबू को छुआ नहीं महसूस किया जाता है दिल को बहलावा नहीं दर्द दिया जाता है दर्द जो है इश्क़ … more →
विनय wrote 5 months ago: भीगी हुई आँखों में तस्वीर तुम्हारी है रूठी हुई हमसे तक़दीर हमारी है मैं दिवाना राहे-इश्क़ का मुसाफ़िर ह … more →
विनय wrote 5 months ago: ख़ाब सब ख़ाब हैं आँखों में बिखरे हुए दिल के कोने-कोने तक छितरे हुए वह अब कहाँ बाक़ी जो था मुझमें मैं … more →
विनय wrote 6 months ago: झोंके हवा के उसका रूख़सार चूमते हैं फूल उसकी आँखों को देख यार झूमते हैं तेरे हुस्नो-शबाब के बारे क्य … more →
विनय wrote 6 months ago: कभी कहीं हम-तुम मिलते, जब मिलते लड़ते-झगड़ते, बिगड़ते-बड़बड़ाते रूठते-मनाते और फिर चिढ़ते-चिढ़ाते कभ … more →
विनय wrote 7 months ago: सहने दे ग़म थोड़ा – थोड़ा जो तुमने रुख़ मोड़ा-मोड़ा जान यह जाने दे ज़रा-ज़रा रहने दे आँखों को भर … more →
विनय wrote 9 months ago: यह मुनासिब नहीं मैं भुला दूँ तुझको तेरे सिवा कुछ होश नहीं है मुझको ना जाने कितने अजनबी गुज़रे हैं मेर … more →
विनय wrote 11 months ago: न वह कभी आँखों से उतारा ही गया और न कभी लबों से पिया ही गया वह इक दर्द का बवण्डर था शायद न जिसे कभी … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: सूरज की किरण मेरे चाँद से टकराई, तन बदन मे मेरे जैसे आग लग आई, उसने ली कुछ इस तरह से अंगडाई, फूलों स … more →
विनय wrote 1 year ago: मुझसे कोई प्यार कर ले दिल अपना देकर, दिल मेरा ले ले मुझसे कोई प्यार कर ले… तन्हाइयों का दर्द छ … more →
विनय wrote 1 year ago: मैं मर जाऊँ तो अपनी हद से गुज़र जाऊँ तो क्या तुम जी सकोगी, बोलो…! सीने जो एक दिल है इसमें तेरा … more →
विनय wrote 1 year ago: हल्के-हल्के आँसू टूटे हैं मेरी आँखों से अब बात नहीं बनती है तेरी यादों से बोल तुझे इक हर्फ़ में कैसे … more →
विनय wrote 1 year ago: जब भी तेरा नाम लेती हैं बहुत ख़ुश होती हैं आँखें मुस्कुराती हैं तेरे लबों से कहीं ज़्यादा हसीं होके … more →
विनय wrote 1 year ago: मैं आँखों के लिए ख़ाब खरीदने निकला सितारों के लिए चाँद ढूँढ़ने निकला दिन अदा किया तब रात नसीब हुई हर … more →
विनय wrote 1 year ago: दर्द सुलगते क्यों हैं जलते क्यों नहीं मेरी आँखों में अब्र हैं बरसते क्यों नहीं यह तुमको देखकर ही शाय … more →
विनय wrote 1 year ago: तेरी जो ख़ाहिश करता हूँ क्या कोई गुनाह करता हूँ चाहे जो भी समझ ले तू मैं तुझसे प्यार करता हूँ यह उम् … more →
विनय wrote 1 year ago: कोई आता है ज़िन्दगी में, जैसे रोशनी जज़्बों का शौक़ के बाद क्यों कुछ कमी उसकी आँखें हमने देखी हैं नीली- … more →
विनय wrote 1 year ago: दिल की लगी दिल को दिल से लगी जब लगी यह आग फिर न बुझी यह दिल की लगी है दिल से लगी है जब यह लगी है फिर … more →
विनय wrote 1 year ago: रहते हैं हम जिन ख़ाबों में उन ख़ाबों का एहसास तुम हो रह जायें जो साँसें तन में बाक़ी उन साँसों की ख़ा … more →