आँखों में जल रहा है क्यूं, बुझता नही धुँआ, उठता तो है घटा सा बरसता नही धुँआ, चूल्हा नही जलाया य बस्ती ही जल गई, कुछ रोज हो गए हैं अब उठता नही धुँआ, आँखों से पोंछने से लगा आंच का पता, यूँ चेहरा फेर लेन… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 1 year ago: आँखों में जल रहा है क्यूं, बुझता नही धुँआ, उठता तो है घटा सा बरसता नही धुँआ, चूल्हा नही जलाया य बस्त … more →