विनय wrote 1 year ago: ‘नज़र’ वह हस्ती’ उदू उसका’ उसका नाम रटे जो लिख दे वह नाम दिल पर कभी न मिटे जी … more →
विनय wrote 1 year ago: कोई आया है जाने के बाद क़ब्र पर वह गया है दो गुल मुझे नज़्र कर कोई तूफ़ाँ उठा था जो मिट गया है दे गया ह … more →
विनय wrote 1 year ago: मेरे दिल की पगडंडियों से रोज़ाना कितने गुज़रते हैं कितने क़दमों के निशाँ बनते हैं कितने मिटते हैं … more →