दाग़े-शबे-हिज्राँ बुझाये नहीं बुझते आँसू बहते हैं इतना छुपाये नहीं छिपते होता है कभी, शाम आती है चाँद नहीं आता मरासिम हम से यूँ निभाये नहीं निभते ख़ुदा के आस्ताँ पे आज भी सर झुकाये हूँ मगर दाग़े-दिल उ… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 4 months ago: दाग़े-शबे-हिज्राँ बुझाये नहीं बुझते आँसू बहते हैं इतना छुपाये नहीं छिपते होता है कभी, शाम आती है चाँ … more →
विनय wrote 6 months ago: जो लोग अच्छे होते हैं दिखते नहीं हैं चाहने वाले बाज़ार में बिकते नहीं हैं ख़ुद से पराया ग़ैरों से अपन … more →
विनय wrote 9 months ago: हम सब के सच्चे दोस्त हैं हर दिल की बात समझते हैं उसकी ख़ुशी को हम अपने ख़ुशी के आँसुओं में रखते हैं … more →
विनय wrote 1 year ago: मैं मर जाऊँ तो अपनी हद से गुज़र जाऊँ तो क्या तुम जी सकोगी, बोलो…! सीने जो एक दिल है इसमें तेरा … more →
विनय wrote 1 year ago: हल्के-हल्के आँसू टूटे हैं मेरी आँखों से अब बात नहीं बनती है तेरी यादों से बोल तुझे इक हर्फ़ में कैसे … more →
विनय wrote 1 year ago: कभी यूँ भी होता है ज़िन्दगी मिलती है खो जाती है यह शाम उसकी यादों में मुझको डुबो जाती है नहीं यह मुमक … more →
विनय wrote 1 year ago: मैं आँखों के लिए ख़ाब खरीदने निकला सितारों के लिए चाँद ढूँढ़ने निकला दिन अदा किया तब रात नसीब हुई हर … more →
विनय wrote 1 year ago: ज़हर पीकर जीने चले कच्चे-पक्के ज़ख़्म सीने चले आँसू सूखे हुए थे पलकों से बरसते हैं सितारे सारी रात चाँ … more →
विनय wrote 1 year ago: अंगीठी में सुलगता कोयला झलोगे तब जाकर धुँआ ज़रा कम उठेगा आँसू अपनी आँख के सब पोंछ दो शायिर: विनय प्रज … more →
विनय wrote 1 year ago: जब से भूल जाना चाहा तुमको तेरी याद और भी आती है सपना क्या कभी कोई ऐसा हुआ जो बिखरा नहीं बची राख को आ … more →
विनय wrote 1 year ago: नामालूम वह दिन मैंने जन्नत में गुज़ारे या जहन्नुम में मगर बीते हुए दिन मुझे आज भी ढ़ूँढते हैं वह ताने … more →