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Blogs about: आंदोलन

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नमक सत्याग्रह और मेरी दादी

Krishna Kumar Mishra wrote 1 month ago: डांडी मार्च "फ़ोटो साभार के० एल० कामत" नमक कानून के साथ टूटा एक मिथक “बिन्नियों वाला … more →

Tags: History & Environment, Gandhi, Salt, salt satyagraha, dandi, Grandmother, dadi, British, Empire

गोरखपुर और गुडगाँव के मजदूरों का दमन और बुद्धिजीवी वर्ग की चुप्पी 4 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: एक तरफ तो उत्तर प्रदेश की सरकार ‘सर्वजन हिताय’ होने का दावा करती है लेकिन दूसरी और इस सर … more →

Tags: आतंकवाद, आह्वान, उदारीकरण, कम्युनिस्ट, क्रांति, दायित्वबोध, पूंजीवादी संकट, ललकार, संघर्ष

होन्डुरस की घटनाओं ने खोली बुर्जुआ लोकतंत्र की पोल

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: एक करोड़पति जमींदार राष्ट्रपति जिसका जुर्म था कि उसने अपने देश को अमेरिकन पक्षीय खेमें से निकाल लिया … more →

Tags: क्रांति, पूंजीवादी संकट, बुर्जुआ लोकतंत्र, साम्राज्यवाद, पुलिस दमन, प्रतिरोध, होन्डुरस, Honduras

भगत सिंह, कम्युनिस्ट और गाँधी होने का मतलब2 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 2 months ago: पूंजीपतियों के चाटुकार बुद्धिजीवियों द्वारा जानबूझकर परंतु कुछ पढ़े-लिखे लोगों द्वारा अनजाने में भावु … more →

Tags: भगत सिंह, आह्वान, कम्युनिस्ट, फासिज्म, युद्ध, कविता, मजदूर वर्ग की विरासत, वर्ग चेतना, इन्कलाब

प्रथम अरविन्द स्मृति संगोष्ठी कार्यक्रम

saathisukhdev wrote 4 months ago: (24 जुलाई, 2009) विषय भूमण्डलीकरण के दौर में श्रम कानून और मज़दूर वर्ग के प्रतिरोध  के नये रूप भूमण् … more →

Tags: दायित्वबोध, आह्वान, पूंजीवादी संकट, संघर्ष, साम्राज्यवाद, काले कानून, Marxism, उदारीकरण, आधी आबादी

हम अब भी लालगढ़ में हैं - चत्रधर महतो

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: हम अब भी लालगढ़ में हैं, ऐसा कहना है लालगढ़ (पश्चिम बंगाल) के आदिवासी नेताओं का. मंगलवार, 30 जून को … more →

Tags: पूंजीवादी संकट, आतंकवाद, उत्पादन के संबंध, उदारीकरण, कम्युनिस्ट पार्टी क, वर्ग चेतना, संशोधनवाद, समाज और संस्कृति, दुस्साहसवाद

सर्वहारा वर्ग, "जन-साधारण" और किसान वर्ग - शोषण के रूपों का महत्त्व1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: 28.  ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां सर्वहारा वर्ग के शोषण का … more →

Tags: सर्वहारा, मार्क्सवाद, संघर्ष, फासिज्म, विरासत, एंगेल्स

बुर्जुआ समाज के अंतरविरोध और सर्वहारा द्वारा इनका उपयोग2 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: 27.  ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां बुर्जुआ वर्ग की कतारों के … more →

Tags: सर्वहारा, मार्क्सवाद, संघर्ष, विरासत, कार्ल मार्क्स, मजदूर वर्ग की विरासत, कम्युनिस्ट पार्टी क, वर्ग चेतना, डेविड रियाज़ानोव

जब औजार क्रांति की माँग करते हैं 3 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: श्री ज्ञानदत्त पाण्डेय जी के आलेख  उद्यम और श्रम की इन टिप्पणियों को  देखें ; अभिषेक ओझा said… … more →

Tags: क्रांति, समाजवाद, पूंजीवादी संकट, साम्राज्यवाद, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, उदारीकरण, पूँजी, मजदूर

आज के किसान का चरित्र - हमारी पहुँच - कुछ और स्पष्टता

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: “कांग्रेस की जीत पर अफलातून और सुरेश चिपलूनकर के दुःख में हम भी शरीक होते मगर … की टिप्पणियों के प्र … more →

Tags: क्रांति, कम्युनिस्ट, समाजवाद, सर्वहारा, Communist, वर्ग चेतना, इन्कलाब, क्रांतिकारी, जनवादी

नए सांस्कृतिक कार्यभारों की ज़मीन--- महत्तव्पूर्ण सामजिक-आर्थिक सरंचनागत परिवर्तनों और विश्व-ऐतिहासिक विपर्यय का यह दौर

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: एक नए सर्वहारा पुनर्जागरण और प्रबोधन के वैचारिक सांस्कृतिक कार्यभार (सांस्कृतिक मोर्चे पर नई शुरुआत … more →

Tags: लेनिन, क्रांति, कम्युनिस्ट, समाजवाद, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, पूंजीवादी संकट, मार्क्सवाद

"कांग्रेस की जीत पर अफलातून और सुरेश चिपलूनकर के दुःख में हम भी शरीक होते मगर …की टिप्पणियों के प्रत्युत्तर में5 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: इस पोस्ट से सम्बंधित प्राप्त टिप्पणियों के पश्चात् यह ज़रूरी हो गया है कि इस विषय पर वाद-विवाद जारी … more →

Tags: दायित्वबोध, प्रतिबद्ध, लेनिन, आह्वान, कम्युनिस्ट, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, विरासत

नई समाजवादी क्रान्ति का उद्घोषक 'बिगुल' के मई-2009 अंक की विषय - सामग्री2 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: मज़दूर वर्ग के लिए सबसे बुरी बातों में से एक शायद यह है कि मई दिवस को आज एक अनुष्ठान बना दिया गया है … more →

Tags: बिगुल, भगत सिंह, सर्वहारा, संघर्ष, बाल श्रम, कविता, एंगेल्स, उदारीकरण, कार्ल मार्क्स

चीनी विशेषता वाले ''समाजवाद'' में मज़दूरों के स्वास्थ्य की दुर्गति

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: इस साईट पर फ़िलहाल नया प्रकाशन बंद कर दिया गया है क्योंकि ‘नई समाजवादी क्रांति का उद्घोषक … more →

Tags: क्रांति, बिगुल, मजदूर, मध्यवर्ग का ऊपरी तबक, शोषण-उत्पीड़न, श्रमशक्ति, समाजवाद, सर्वहारा, नवउदारवादी दौर

मई दिवस का इतिहास-2

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: इस पोस्ट का पहला भाग ….यहाँ देखें शिकागो की हड़ताल और हे मार्केट की घटना पहली मई को शिकागो में … more →

Tags: लेनिन, कम्युनिस्ट, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, संघर्ष, फासिज्म, युद्ध, विरासत

मई दिवस का इतिहास

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: अलेक्जेण्डर ट्रैक्टनबर्ग अनुवाद : अभिनव सिन्हा मई दिवस का जन्म काम के घण्टे कम करने के आन्दोलन से अट … more →

Tags: कम्युनिस्ट, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, संघर्ष, युद्ध, विरासत, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध

मेट्रो कर्मचारियों का आन्दोलन

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: दमन-उत्पीड़न से नहीं कुचला जा सकता मेट्रो कर्मचारियों का आन्दोलन दिल्ली मेट्रो की ट्रेनें, मॉल और दफ् … more →

Tags: चर्चा है कि, बिगुल, मजदूर, शोषण-उत्पीड़न, श्रमशक्ति, संघर्ष, सर्वहारा, बेरोजगारी, मजदूरों का जीवन

मई दिवस पर याद किया मज़दूरों की शहादत को

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: बिगुल संवाददाता गोरखपुर नौजवान भारत सभा, बिगुल मज़दूर दस्ता और अखिल भारत नेपाली एकता मंच ने मिलकर अन् … more →

Tags: आह्वान, कम्युनिस्ट, क्रांति, मजदूर, सर्वहारा, इन्कलाब, मई दिवस, मजदूरों के हक़

`बिगुल´ के लक्ष्य और स्वरूप पर एक बहस और हमारे विचार

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: (बिगुल, अप्रैल 1999) `बिगुल´ का पाठक कौन है? मज़दूरों के किस हिस्से तक पहुँचना इसका मकसद है? – … more →

Tags: कम्युनिस्ट, क्रांति, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मजदूर, लेनिन, सर्वहारा, मजदूरों के हक़, वर्ग दृष्टिकोण


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