Blogs about: आइना
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खिली-खिली महकी बहारें हैं
खिली-खिली महकी बहारें हैं झीलों पर बहते शिकारें हैं ठण्डी-ठण्डी सौंधी हवाएँ … more »
तख़लीक़-ए-नज़र
खिली-खिली महकी बहारें हैं
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विनय प्रजापति wrote 5 days ago: खिली-खिली महकी बहारें हैं झीलों पर बहत … more »
तुम जो देखते हो
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: तुम जो देखते हो मैं भी जानता हूँ यह सब ह … more »
तन्हाई मिटाने दो
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: तन्हाई मिटाने दो किस्से सुनाने दो सुब … more »
ज़हर पीकर जीने चले
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: ज़हर पीकर जीने चले कच्चे-पक्के ज़ख़्म सी … more »
टूटे हुए चाँद को
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: टूटे हुए चाँद को सादे काग़ज़ में लपेटा … more »
मेरी मोहब्बत है तू कहाँ
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: मेरी मोहब्बत, है तू कहाँ, तू कहाँ है जिस … more »
रक़ाबी चाँद जला दो
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: रक़ाबी चाँद जला दो यह रात चाँदनी हो जाय … more »
काश वह कोई गुल होती
विनय प्रजापति wrote 3 months ago: काश वह कोई गुल होती मैं उसे अपने लबों स … more »
तुमको न पाया तो खोया भी कुछ नहीं
विनय प्रजापति wrote 4 months ago: तुमको न पाया तो खोया भी कुछ नहीं पत्थर … more »
अब 'विनय' तेरे ग़म से ग़ाफ़िल नहीं रहा
विनय प्रजापति wrote 7 months ago: अब ‘विनय’ तेरे ग़म से ग़ाफ़िल नहीं रहा दे … more »
